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अतीत है सीखने के लिए…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • 1 day ago
  • 3 min read

Aug 19, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, इस दुनिया में हर इंसान का एक अतीत होता है, जिसमें किसी के हिस्से में अच्छे रिश्ते, सफलताएँ और सुख होता है, तो किसी के हिस्से में असफलताएँ, धोखे, बिछड़ने का दर्द या अधूरे सपने। याने किसी का अतीत सकारात्मक अनुभवों से भरा होता है, तो किसी का नकारात्मक। हालांकि दोनों ही तरह के अनुभव होने से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता क्योंकि जब तक हम ना चाहें हमारा अतीत हमारे वर्तमान और भविष्य को प्रभावित नहीं कर सकता है। इसलिए मैं हमेशा कहता हूँ कि हमारे जीवन की सबसे बड़ी भूल अपने अतीत को अपने वर्तमान और भविष्य पर शासन करने देना है। क्योंकि बीता हुआ समय कभी लौटकर नहीं आता। इसलिए बुद्धिमानी इसी में है कि अतीत को बोझ बनाकर ढोने के बजाय उसे अपना शिक्षक बना लिया जाए। क्योंकि हर ठोकर, हर असफलता और हर कठिन अनुभव अपने भीतर कोई न कोई अमूल्य सीख छिपाए होता है।


सोच कर देखिए, अगर कोई वाहन चालक रास्ते में हुए एक छोटे-से हादसे को याद करके पूरी यात्रा केवल पीछे देखने वाले शीशे में देख कर करना चाहे, तो क्या वह अपनी मंज़िल तक पहुँच पाएगा? नहीं ना! अतीत का स्थान भी जीवन में उसी शीशे की तरह है. हमें उसे केवल सीख लेने के लिए देखना चाहिए, जीवन चलाने के लिए नहीं। दुर्भाग्य से हममें से बहुत से लोग पीछे देखकर आगे चलने की गलती करते हैं। वे जो खो गया, उसी का शोक मनाते रहते हैं। कोई वर्षों तक किसी रिश्ते के टूटने का दुःख ढोता रहता है, कोई व्यवसाय में हुए नुकसान को भूल नहीं पाता, तो कोई किसी के विश्वासघात को अपनी पहचान बना लेता है। परिणाम यह होता है कि वर्तमान की खुशियाँ भी उनसे दूर हो जाती हैं।


याद रखिएगा, जो चला गया, वह स्मृति बन चुका है; लेकिन जो आपके पास आज है, वही आपका वास्तविक जीवन है। इसलिए जो बचा है, उसे सँभालिए। नए लक्ष्य बनाइए, नई योजनाएँ तैयार कीजिए और नई उम्मीदों के साथ फिर से जीवन में आगे बढ़िए। दोस्तों, जीवन कभी उन लोगों का साथ नहीं छोड़ता, जो गिरकर फिर उठना जानते हैं। वैसे भी अपने नुकसान के लिए किसी व्यक्ति, परिस्थिति या भाग्य को दोष देते रहना, सिर्फ़ आपकी ऊर्जा को ख़त्म करता है। याद रखें, बदले की भावना केवल मन को जलाती है, जबकि क्षमा और स्वीकार्यता आपको आगे बढ़ने की शक्ति देती है। इसलिए अपनी ऊर्जा शिकायतों में नहीं, अपने श्रेष्ठ उद्देश्य में लगाइए ताकि आपकी वही ऊर्जा आपकी नई पहचान बना सके। इसी बात को समझाते हुए प्रसिद्ध लेखक सी. एस. लेविस ने कहा था, “आप पीछे जाकर अपनी शुरुआत नहीं बदल सकते हैं, लेकिन आप आज से एक नया अंत अवश्य लिख सकते हैं।


दोस्तों, जीवन का सबसे सुनहरा कल उन लोगों का इंतज़ार करता है, जो बीते हुए कल की बेड़ियों को तोड़ने का साहस रखते हैं। जब तक आप पुराने दुःखों, कड़वी यादों और मन की गाँठों से मुक्त नहीं होंगे, तब तक भविष्य आपके दरवाज़े पर दस्तक देकर भी लौट जाएगा। इसलिए आज और इसी क्षण ख़ुद से एक वादा कीजिए; मैं अपने अतीत से सीखूँगा, लेकिन उसमें जियूँगा नहीं क्योंकि जीवन बदलने का सही समय "कल" नहीं, आज है।


दोस्तों, जो लोग परिवर्तन को टालते रहते हैं, समय भी एक दिन उन्हें पीछे छोड़ देता है। लेकिन जो वर्तमान में निर्णय लेकर आगे बढ़ते हैं, वही अपने भविष्य की नई कहानी लिखते हैं। याद रखें, अतीत आपका परिचय हो सकता है, लेकिन आपका भविष्य नहीं। आपका भविष्य उन निर्णयों से तय होता है, जो आप आज लेते हैं। इसलिए बीते हुए कल को सम्मानपूर्वक विदा दीजिए, आज को पूरी शक्ति से जियें और आने वाले कल का स्वागत खुले मन से करें।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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