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अनिश्चितता के दौर में ही आप निखरते हैं…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • 2 days ago
  • 3 min read

Jan 13, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


जीवन में महानता का असली मापदंड हमारी उपलब्धियाँ नहीं, बल्कि वे क्षण होते हैं जब परिस्थितियाँ हमें परखती हैं। जब जोखिम सबसे बड़ा होता है, जब समय कम होता है, जब हर व्यक्ति घबराया होता है, उसी समय व्यक्ति का असली चरित्र उभरकर सामने आता है। वही पल तय करते हैं कि हम साधारण हैं या असाधारण। रतन टाटा की हृदय सर्जरी एक ऐसी ही प्रेरक घटना है, जो हमें बताती है कि दबाव के क्षण ही मानव को महान बनाते हैं, ना कि जीवन की आसान जीतें।


संकट: जहाँ घबराहट हार जाती है और धैर्य जीतता है

मुंबई के एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट में 2002 की शांत सुबह, बाहर की दुनिया सामान्य थी, लेकिन अंदर ऑपरेशन थियेटर में समय जैसे थम गया था। देश के सबसे सम्मानित उद्योगपति की तीन प्रमुख धमनियाँ ब्लॉक थीं। हालात इतने गंभीर थे कि देर करना जानलेवा हो सकता था और तब सबसे बड़ी जिम्मेदारी एक व्यक्ति के कंधों पर आ गिरी-डॉ. रामकांत पांडा। यह केवल एक मरीज का मामला नहीं था। यह देश की उम्मीदों का मामला था। लेकिन उनके हाथ स्थिर थे, मन शांत था और दृष्टि स्पष्ट।


जब कौशल और संयम मिलते हैं, तब चमत्कार होता है

सर्जरी के दौरान सबसे खतरनाक धमनी-जिसे “Widow Maker” कहा जाता है-लगभग टूटने को थी। हल्का सा रिसाव हुआ और कमरे में तनाव जम गया। इस स्थिति में घबराना सहज था, लेकिन डॉ. पांडा की आवाज़ स्थिर रही- “सक्शन स्थिर रखो।” उन्होंने तुरंत रणनीति बदल दी। धमनी पर बारीक पैच लगाया, दबाव कम किया और धैर्यपूर्वक ग्राफ्ट लगाया। एक-एक कर सभी बायपास पूरे होते गए। और आखिरकार… दिल ने फिर धड़कना शुरू किया। लेकिन परीक्षा खत्म नहीं हुई। सीना बंद करते समय दिल फिर रुक गया-Ventricular Fibrillation झटका दिया गया। कुछ सेकंड के लिए दिल फिर से मौन… और फिर-धीरे-धीरे धड़कनें लौट आईं।


यह घटना सिर्फ एक मेडिकल केस नहीं है क्योंकि हम इससे जीवन को बेहतर बनाने के तीन बड़े पाठ सीख सकते है-

1. महानता दृढ़ता में है, दिखावे में नहीं

डॉ. पांडा ने चमत्कार किया, लेकिन बिना किसी शोर या नाटक के। सच्ची महानता वही है, जो शांत रहकर काम करती है।

2. कठिनाई ही क्षमता को निखारती है

आसान समय में तो हर कोई अच्छा लगता है। लेकिन जब परिस्थिति चुनौती देती है, तब असली कौशल सामने आता है। जैसा कि रतन टाटा ने कहा, “डॉ. पांडा ने न सिर्फ मेरी जान बचाई, बल्कि भारत में हृदय चिकित्सा को नई दिशा दी।”

3. कौशल का सर्वोच्च उद्देश्य है - सेवा

डॉ. पांडा आज भी गरीबों का मुफ्त इलाज करते हैं। वे बताते हैं कि असली कौशल तभी सार्थक है जब वह दूसरे लोगों के जीवन में रोशनी लाए।


जीवन संदेश: महानता हर किसी में है, बस जागने की देर है

इस घटना ने हमें यह सिखाया कि:

1) दबाव हो, तो शांत रहिए

2) जोखिम हो, तो धैर्य रखिए

3) चुनौती आए, तो कौशल का उपयोग कीजिए और

4) सफलता मिले, तो विनम्र रहिए

जिस व्यक्ति में यह चार गुण मिल जाएँ, वह किसी भी क्षेत्र में महान बन सकता है, चाहे वह डॉक्टर हो, शिक्षक हो, उद्यमी हो या एक साधारण इंसान।


अंत में…

जब हालात आपको परख रहे हों, जब दुनिया अनिश्चित लगे, जब दांव बड़ा हो, तभी आपका असली ‘आप’ उभरता है। याद रखिए, महानता शोर नहीं करती। वह संकट में शांत रहकर दूसरों की उम्मीद बनती है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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