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अनुशासित रहेंगे तो मंजिल तक पहुँच ही जाएँगे…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • 1 day ago
  • 3 min read

May 8, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, किसी क्षेत्र विशेष में प्रतिभाशाली होना आपको आसान शुरुआत तो दे सकता है, लेकिन अनुशासित रहते हुए की गई मेहनत ही मंज़िल तक पहुँचाती है। जी हाँ दोस्तों, हम सभी के भीतर कोई कोई न कोई प्रतिभा होती है। जैसे, कोई बोलने की कला में पारंगत होता है, तो कोई लिखने की, किसी के पास नेतृत्व क्षमता होती है, तो किसी के पास लोगों के जीवन को बेहतर बनाने की क्षमता।


लेकिन जीवन में सफल होने के लिए सिर्फ प्रतिभा का होना पर्याप्त नहीं है। प्रतिभा तो एक बीज की तरह होती है। अगर उसे मेहनत, धैर्य और अनुशासन का पानी न मिले, तो वह कभी वृक्ष नहीं बन पाती। आइए इसे एक उदाहरण से समझने का प्रयास करते हैं। मुंबई में दो दोस्त रहा करते थे, दोनों ही बहुत अच्छे बल्लेबाज़ थे। स्कूल शिक्षा के दौरान भी दोनों लगभग हर मैच में बेहतरीन प्रदर्शन किया करते थे। उनकी प्रतिभा का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि सेंट ज़ेवियर स्कूल मुंबई के खिलाफ खेलते हुए उन्होंने वर्ष 1988 में 664 रन बनाए थे।


असाधारण प्रतिभा के कारण दोनों ही बल्लेबाजों को जल्द ही भारत की टीम में चुन लिया गया और दोनों ने ही देश के लिए बेहतरीन प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। दिग्गज विशेषज्ञों ने दोनों में से पहले खिलाड़ी को तकनीकी रूप से प्रतिभा का अधिक धनी बताया और उसे भविष्य का सर्वोत्तम बल्लेबाज़ तक घोषित कर दिया। लेकिन इस खिलाड़ी की सोच थोड़ी अलग थी। वह सोचता था, “मैं तो जन्म से प्रतिभाशाली हूँ, मुझे ज्यादा मेहनत की जरूरत नहीं।” इस सोच ने इस बेहतरीन खिलाड़ी को आत्मविश्वास होने के बाद भी जल्द ही भटका दिया। हालाँकि शुरुआत में वो थोड़ा आगे निकल गया था, लेकिन बीतते समय के साथ उसकी रन बनाने की क्षमता घटने लगी।


वहीं दूसरा लड़का एकदम शांत था क्योंकि उसे अपनी मेहनत पर भरोसा था। इसलिए सफल होने के बाद भी वो हर दिन सुबह उठकर अभ्यास करता था। फिर चाहे मौसम बारिश का हो या ठंड का या फिर गर्मी का। वह अपने लक्ष्य के लिए लगातार मेहनत करता रहा। समय बीतता गया और विशेषज्ञों की नजर में कम प्रतिभाशाली खिलाड़ी और बेहतर बनता गया; निखरता गया और अंत में वही विजेता बना। इसलिए ही लेख की शुरुआत में मैंने कहा था, “प्रतिभा तुम्हें अच्छी शुरुआत दिला सकती है, लेकिन मंज़िल तक मेहनत ही पहुँचाती है।”

दोस्तों, आगे बढ़ने से पहले मैं आपको बता दूँ कि पहले खिलाड़ी का नाम विनोद कांबली था। जो शुरुआती सफलता के बाद भटक गए और खेल से जल्द ही बाहर हो गए। वहीं दूसरे खिलाड़ी क्रिकेट का भगवान माने जाने वाले सचिन तेंदुलकर थे। दोस्तों, इस दुनिया में कई लोग बहुत प्रतिभाशाली हैं, लेकिन अनुशासन की कमी उन्हें पीछे छोड़ देती है। जबकि कई साधारण लोग अपनी निरंतर मेहनत से असाधारण बन जाते हैं।


इसलिए दोस्तों, हमेशा याद रखिए, कड़ी मेहनत आपको वहाँ ले जाती है, जहाँ अच्छी किस्मत भी आपको खोज सके। इसलिए ही तो कहा गया है, “ भाग्य भी उसी का साथ देता है, जो खुद चलने का साहस रखता है।” इसलिए अपने भीतर की प्रतिभा को पहचानने के साथ ही, उसे मेहनत से निखारिए और धैर्य के साथ आगे बढ़ते रहिए क्योंकि प्रतिभा ईश्वर का उपहार है, लेकिन उसे उपलब्धि में बदलना आपकी जिम्मेदारी है। इसलिए आज से एक निर्णय लें और ख़ुद से कहें , “आज से मैं सिर्फ़ सपने नहीं देखूँगा, उसे पूरा करने के लिए लगातार मेहनत भी करूँगा क्योंकि मैं जानता हूँ कि धीरे चलने वाला व्यक्ति भी अगर रास्ते में न रुके तो मंज़िल तक पहुँच ही जाता है।”


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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