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अपनी ऊर्जा और समय को उद्देश्य से जोड़ें…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • 10 hours ago
  • 3 min read

Sep 7, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है,,,


दोस्तों, जीवन में अक्सर हमारी सबसे बड़ी बाधा परिस्थितियां नहीं, बल्कि हमारे भीतर बैठा हुआ डर होता है। अक्सर आपने देखा होगा कि लोग रास्ते की कठिनाइयों को देख रुके नज़र आते हैं, लेकिन हक़ीक़त में रास्ता इसलिए कठिन नज़र आता है क्योंकि उन्होंने अपना पहला कदम नहीं उठाया होता है। संभव है अब आप सोच रहे होंगे कि पहला कदम उठाने से रास्ता कैसे सरल हो जाएगा? तो चलिए आगे बढ़ने से पहले मैं आपकी इस दुविधा को दूर कर देता हूँ। डर और अनिश्चितता के बाद पहला कदम उठाना असल में लक्ष्य के प्रति आपकी प्रतिबद्धता दर्शाता है और जब इंसान किसी लक्ष्य के प्रति सच्ची प्रतिबद्धता रखता है, तो उसके भीतर बदलाव आने लगता है। उसकी दृष्टि बदलती है, निर्णय बदलते हैं और सबसे महत्वपूर्ण, वह उन संभावनाओं को देखना शुरू कर देता है, जिन्हें डर के कारण पहले देख ही नहीं पा रहा था।


दोस्तों, प्रकृति का एक नियम है, ‘जो आगे बढ़ता है, उसके लिए रास्ते बनते हैं।’ एक छोटे से बीज को ही देखिए। मिट्टी के भीतर दबा हुआ होने के बाद भी वह ऊपर आने का साहस करता है। जबकि उसके उपर मिट्टी का भार और चारों और कीचड़ व अँधेरा होता है। लेकिन फिर भी वह रुकता नहीं है, किसी तरह मिट्टी को हटा पत्थरों के बीच से रास्ता बनाते हुए वो सूरज के प्रकाश तक पहुँच जाता है और अंततः एक फलदार वृक्ष बन जाता है। दोस्तों, उसके लिए रास्ता प्रकृति ने नहीं, बल्कि आगे बढ़ने की उसकी जिद ने बनाया था ।


हमारी जिंदगी भी कुछ ऐसी ही है। जब हम किसी सकारात्मक उद्देश्य के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध होते हैं, तो परिस्थितियाँ अचानक जादुई ढंग से आसान नहीं हो जाती। बल्कि हमारी प्रतिबद्धता हमें कठिन परिस्थितियों से निपटने की शक्ति देती है। इसलिए पहले जहाँ दीवार दिखाई देती थी, अब वहाँ दरवाज़ा दिखाई देने लगता है। जहाँ पहले असंभव लगता था, अब वहाँ नए विकल्प दिखाई देने लगते है और जहाँ पहले हम परिस्थितियों और कठिनाइयों को देख रुक जाते थे, अब वहाँ हम पूर्ण विश्वास के साथ आगे बढ़ने के विकल्प देखने लगते हैं।


दोस्तों, इतिहास में परिवर्तन लाने वाले लोगों ने अनुकूल परिस्थितियों का इंतज़ार करने के स्थान पर, स्वयं को अपने उद्देश्य या लक्ष्य के प्रति इतना दृढ़ संकल्पित किया है कि उनके सामने कठिन परिस्थितियाँ बदलती नजर आती हैं। इसलिए कहते हैं, “साहस का अर्थ यह कतई नहीं है कि आपको डर नहीं लगता। साहस का अर्थ तो बस इतना है कि आप डर के बावजूद भी सही दिशा में पहला कदम उठाना जानते हैं। इसी तरह सकारात्मक प्रतिबद्धता का अर्थ केवल यह कहना नहीं है कि “मैं यह करूँगा।” इसका अर्थ है, “मैं अपने समय, ऊर्जा, निर्णय और व्यवहार को उस उद्देश्य के साथ जोड़ कर कार्य करूँगा।”


दोस्तों, सोच और प्रतिबद्धता की वजह से ही धीरे-धीरे कुछ अद्भुत घटने लगता है। अचानक से विरोध करने वाले लोग आपकी सहायता करने लगते हैं, आपको नए अवसर दिखाई देने लगते हैं, अनुभव आपकी ताकत बन जाता है और असफलताएँ भी आपको अगले कदम के लिए तैयार करने लगती हैं। शायद यही वह क्षण होता है, जब प्रकृति आपके साहस का सम्मान करना शुरू करती है।


याद रखिएगा, जब आपका उद्देश्य सही हो, आपकी नीयत सकारात्मक हो और आपकी प्रतिबद्धता सच्ची हो, तो हर बाधा अंत नहीं होती। वो तो बस इतना देखने आती हैं कि आप सचमुच अपने लक्ष्य के लिए कितने गंभीर हैं। इसलिए दोस्तों, लक्ष्य की दिशा में बस चलते रहिए… क्योंकि कई बार रास्ता आगे नहीं मिलता, बल्कि आगे बढ़ने से बनता है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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