अपूर्णता ही जीवन की सच्ची वास्तविकता है…
- Nirmal Bhatnagar

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Sep 5, 2026
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, भावनाओं या यूँ कहूँ भावनात्मक जुड़ाव के कारण हम सभी के घर में कोई ना कोई पुराना, टूटा, अनुपयोगी सामान होता है। जैसे किसी का दिया हुआ किनारे से थोड़ा सा टूटा हुआ कॉफ़ी मग। ऐसे सामान को हम पहले की तरह ज़्यादा सुंदर बनाने का प्रयास नहीं करते, बल्कि वो जैसा या जिस हाल में होता है उसे वैसा ही सम्भाल कर रखते हैं।
दोस्तों, यही बात रिश्तों और इंसानों पर भी लागू होती है। हम अक्सर पूर्णता याने परफेक्शन की तलाश में रहते हैं। हमें ऐसे रिश्ते या व्यक्ति चाहते हैं, जिसमें कोई कमी न हो। जिनके साथ हमारा कभी मतभेद ना हो और जिनके साथ कभी मनमुटाव ना हो या जिनसे कभी झगड़ा ना हुआ हो। लेकिन सच तो यह है कि जीवन में ऐसी पूर्णता असंभव ही है। इसीलिए अपूर्णता को जीवन की वास्तविकता कहा जाता है।
इस दुनिया में हर व्यक्ति के भीतर कोई न कोई कमी है। कोई बहुत संवेदनशील है, कोई जल्दी क्रोधित हो जाता है, कोई निर्णय लेने में कमजोर है, तो कोई अपनी भावनाएँ व्यक्त नहीं कर पाता। लेकिन क्या इन कमियों के कारण उनके महत्व या अस्तित्व को ख़त्म या समाप्त माना जा सकता है? मेरी नजर में तो बिल्कुल भी नहीं। जिस तरह एक तस्वीर की ख़ूबसूरती केवल उसके एक हिस्से से नहीं, बल्कि पूरी तस्वीर से बनती है, उसी तरह मनुष्य भी अपनी खूबियों और कमियों के साथ मिलकर पूर्ण होता है। कई बार हम किसी की एक गलती देखकर उसके वर्षों के प्रेम, सहयोग और अच्छाइयों को भुला देते हैं। किसी रिश्ते में एक मतभेद हुआ और हमने रिश्ता ही खत्म कर दिया। किसी व्यक्ति से एक भूल हुई और हमने उसके पूरे व्यक्तित्व पर फैसला सुना दिया। क्या ऐसा करना सही है? मुझे तो लगता है ऐसे निर्णय लेने से पहले हमें थोड़ा ठहरकर सोचना चाहिए। ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि मैं भी नहीं चाहूँगा कि कोई मुझे मेरी एक गलती के आधार पर ना परखे।
दोस्तों, अगर हम ख़ुद के लिए ऐसा चाहते हैं तो हमें दूसरों को भी उनकी ग़लतियों या उनके अधूरेपन के साथ स्वीकारना होगा। याद रखिएगा, रिश्ते इसलिए खूबसूरत नहीं होते क्योंकि उनमें कोई कमी नहीं होती; वे तो इसलिए खूबसूरत होते हैं क्योंकि लोग कमियों के बावजूद एक-दूसरे को स्वीकार करना जानते हैं और यही करुणा है।
दोस्तों, दयालुता केवल किसी जरूरतमंद की सहायता कर देना नहीं है। दयालुता सामने वाले के जीवन की उन बातों या लड़ाइयों को समझ लेने की क्षमता भी है, जिसके बारे में वो हमें नहीं बता रहा है। दोस्तों, अगली बार कभी किसी ऐसे व्यक्ति से सामना हो जिसमें कमियाँ हैं, तो तुरंत कोई धारणा मत बनाइयेगा या तुरंत को निर्णय मत सुनाइएगा। संभव है, उसकी वही कमी उसके जीवन की किसी गहरी कहानी का परिणाम हो।
याद रखिएगा, जिस तरह हर टूटी हुई चीज़ बेकार नहीं होती, उसी तरह हर अपूर्ण व्यक्ति कम मूल्यवान नहीं होता। कुछ चीज़ों को उनकी पूर्णता नहीं, उनसे जुड़ी भावनाएँ मूल्यवान बनाती हैं। इसी तरह कुछ रिश्ते दरारों के साथ भी इसलिए स्वीकारे जाते हैं क्योंकि उनके प्रेम में दरारों को स्वीकारने की क्षमता होती है।
दोस्तों, दयालुता केवल हमारा व्यवहार नहीं है; वह हमारी आत्मा का प्रतिबिंब है। इसलिए लोगों को उनकी कमियों से नहीं, उनकी पूरी कहानी से देखिए। शायद तब आपको समझ आएगा कि जिसे आप अपूर्ण समझ रहे थे, वही अपने भीतर जीवन की सबसे सुंदर कहानी लिए हुए है।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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