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शिक्षक कभी साधारण नहीं होता…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • 15 minutes ago
  • 3 min read

Sep 5, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, किसी राष्ट्र का भविष्य संसद में बनने वाले कानूनों से कहीं पहले कक्षा में तय होना शुरू हो जाता है क्योंकि जिस बच्चे के हाथ में आज किताब है, कल उसी के हाथ में समाज, संस्थाएँ और देश की जिम्मेदारी होगी। शायद इसी गहरी सच्चाई की समझ की वजह से डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने कहा था, “एक वकील की गलती फाइलों में दबकर रह जाती है, एक इंजीनियर की गलती दीवारों के पीछे छिप जाती है, एक डॉक्टर की गलती कब्रिस्तान में दफन हो जाती है; लेकिन एक शिक्षक की गलती पूरी पीढ़ियों का भविष्य प्रभावित कर देती है।”


दोस्तों, डॉ राधाकृष्णन का यह कथन केवल शिक्षक की जिम्मेदारी की बात नहीं करता। बल्कि यह तो उस शक्ति की बात करता है, जो एक शिक्षक के पास होती है। सोच कर देखिए, जब एक बच्चा पहली बार कक्षा में आता है, तब उसे अपने ख़ुद के बारे में या अपने भविष्य के बारे में कुछ पता नहीं होता। वह नहीं जानता कि वह कितना प्रतिभाशाली है। वह यह भी नहीं जानता कि असफलता का अर्थ क्या है। इतना ही नहीं, उसे यह भी नहीं पता कि उसके सपनों की कोई सीमा है या नहीं। लेकिन धीरे-धीरे वह अपने आसपास के बड़ों से यह सब सीखता और समझता है और उसकी इस यात्रा का सबसे प्रभावशाली मार्गदर्शक शिक्षक होता है। उसके कहे शब्द ही उसकी सोच, उसके नजरिये, उसके चरित्र का निर्माण करते हैं। यदि शिक्षक किसी बच्चे से बार-बार कहे, “तुम कमजोर हो,” तो एक दिन बच्चा अपनी क्षमता से पहले अपनी कमजोरी को पहचानने लगेगा। इसी तरह अगर शिक्षक हर गलती पर उसे अपमानित करे, तो वह गलती से सीखने के बजाय गलती करने से डरना सीख जाएगा और अगर एक शिक्षक उसके प्रश्नों को महत्व न दे, तो उसकी जिज्ञासा धीरे-धीरे शांत हो सकती है। इसके विपरीत अगर एक शिक्षक उससे कह दे, “तुम अभी नहीं कर पा रहे हो, इसका अर्थ यह नहीं कि तुम कभी नहीं कर पाओगे,” तो शायद वही एक वाक्य उस बच्चे के भीतर वर्षों तक जीवित रहने वाला आत्मविश्वास पैदा कर दे। यही शिक्षक की असली ताकत है।


दोस्तों, शिक्षक केवल विषय नहीं पढ़ाता, वह बच्चे को स्वयं को पढ़ना सिखाता है। वह उसे बताता है कि असफलता अंत नहीं है। प्रश्न करना गलत नहीं है। अलग होना कमजोरी नहीं है। मेहनत प्रतिभा को दिशा दे सकती है और सबसे महत्वपूर्ण, तुम्हारी वर्तमान स्थिति तुम्हारी अंतिम पहचान नहीं होती है। इस आधार पर देखा जाए तो शिक्षा का सबसे बड़ा परिणाम केवल अच्छे अंक नहीं हो सकते। यदि विद्यार्थी गणित में बहुत अच्छा है, लेकिन निर्णय नहीं ले सकता; विज्ञान जानता है, लेकिन संवेदनशील नहीं है; अंग्रेज़ी बोल सकता है, लेकिन सत्य बोलने का साहस नहीं रखता, तो हमारी शिक्षा अभी अधूरी है। याद रखिएगा, समाज को केवल कुशल लोग नहीं, बल्कि अच्छे और जिम्मेदार मनुष्य चाहिए।

दोस्तों, एक शिक्षक की कही हुई बात कभी-कभी कक्षा-कक्ष से निकलकर विद्यार्थी के पूरे जीवन में चली जाती है। जब बीतते समय के साथ वह विद्यार्थी आगे चलकर माता-पिता बनता है या किसी संस्था का नेतृत्व करता है या फिर किसी बड़े पद पर पहुंचकर निर्णय प्रभावित करता है, तो कुल मिलाकर वह अगली पीढ़ी को तैयार करता है; संस्कार देता है। इसलिए ही मैं हमेशा कहता हूँ, “शिक्षक का प्रभाव सिर्फ़ एक बच्चे तक नहीं, बल्कि पीढ़ियों तक दिखाई देता है।”


दोस्तों, शिक्षक का हर शब्द महत्वपूर्ण है। उसका व्यवहार महत्वपूर्ण है। उसकी निष्पक्षता महत्वपूर्ण है। उसका विश्वास महत्वपूर्ण है क्योंकि शिक्षक के सामने बैठा बच्चा केवल आज का विद्यार्थी नहीं है, वह आने वाले कल का निर्माता है। इसलिए याद रखिएगा, एक शिक्षक का काम केवल बच्चों को यह बताना नहीं कि दुनिया कैसी है; उसका सबसे बड़ा दायित्व यह है कि वह बच्चों को इतना सक्षम बनाए कि वे दुनिया को बेहतर बना सकें। बच्चा पाठ्यपुस्तक का एक अध्याय भूल सकता है, लेकिन शिक्षक द्वारा दिया गया विश्वास जीवनभर उसके साथ रह सकता है। इसलिए तो कहते हैं, “शिक्षक जब कक्षा में प्रवेश करता है, तो उसके सामने केवल कुछ विद्यार्थी नहीं होते, उसके सामने आने वाली पीढ़ियों का भविष्य बैठा होता है।”


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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