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जन्म से कोई महान नहीं बनता…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • 21 hours ago
  • 3 min read

Sep 4, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, इस दुनिया में मात्र जन्म ले लेने से कोई महान नहीं बन सकता। आपको नाम, परिवार, संपत्ति, अवसर, संस्कार और शायद समाज में पहचान, जन्म से मिल सकती है। लेकिन व्यक्तिगत सफलता और महानता को स्वयं अर्जित करना पड़ता है। इसी बात को समझाते हुए अब्राहम लिंकन ने कहा था, “इस बात से कुछ फ़र्क़ नहीं पड़ता कि आपके दादा-परदादा कितने महान थे। अगर आप महान बनना चाहते हैं तो आपको स्वयं को गढ़ना होगा।”


मेरी नजर में यह वाक्य अपने आप में ही पूरा जीवन दर्शन है। आपके दादाजी के किए कार्य, पिता की उपलब्धियाँ और समाज में परिवार का सम्मान, आपकी जीवन यात्रा का विकल्प नहीं हो सकता है। अगर आप सफलता की ऊंचाइयों को छूना चाहते हैं, तो आपको अपने लक्ष्य स्वयं बनाने के साथ ख़ुद को मज़बूत करना होगा। आपको अपनी जीवन यात्रा में हमेशा दो विकल्प मिलेंगे, पहला, परिस्थितियों और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर निर्णय लेना और दूसरा, स्वयं पर विश्वास रखते हुए आगे बढ़ना।


याद रखिएगा, आत्मविश्वास के कारण एक ही परिस्थिति में खड़े दो व्यक्ति बिल्कुल अलग निर्णय ले सकते हैं। जिसमें आत्मविश्वास होगा वो तमाम विषम परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बाद भी पहला कदम उठाकर जीवन में आगे बढ़ जायेगा और जिसे अपने ऊपर संदेह होगा, वो अवसर मिलने के बाद भी उसे भुना नहीं पायेगा। इसीलिए कहते हैं, “केवल परिस्थितियाँ नहीं, हमारे निर्णय भी हमारे जीवन की दिशा तय करते हैं।”


कल्पना कीजिए, दो युवाओं के सामने एक जैसा अवसर आता है। पहला सोचता है, “मैं अभी तैयार नहीं हूँ, बाद में प्रयास करूँगा।” दूसरा सोचता है, “मैं अभी पूरी तरह तैयार नहीं हूँ, लेकिन सीखते हुए आगे बढ़ सकता हूँ।” पहला अपनी जगह सुरक्षित रखता है, जबकि दूसरा अपनी संभावनाओं का विस्तार करता है। अंतर अवसर का नहीं, आत्मविश्वास का था। एक बात और याद रखिएगा, आत्मविश्वास का अर्थ सफलता की गारंटी होना नहीं है। आत्मविश्वास तो असफलता की संभावना जानते हुए भी पहला कदम उठाने का नाम है। इसलिए अक्सर मंज़िल उन लोगों को मिलती है जो पूरी तरह तैयार होने का इंतज़ार नहीं करते, बल्कि चलते-चलते स्वयं को तैयार करते हैं। कोई भी भविष्य को नहीं जानता और जीवन में असफलताएँ और आलोचनाएं मिलती हैं, योजनाएँ बदलती हैं और ग़लत दिशा में जाने का डर भी लगता है। लेकिन जो व्यक्ति अपने विवेक, मेहनत और सीखने की क्षमता पर विश्वास रखता है, वह हर मोड़ पर स्वयं को फिर से तैयार कर, आगे बढ़ जाता है।


दोस्तों, भाग्य हमें अवसर दे सकता है, लेकिन उस अवसर को पहचानने और उसके लिए कदम उठाने का निर्णय हमारा होता है। परिस्थितियाँ दरवाज़ा खोल सकती हैं, लेकिन उसके भीतर प्रवेश करने का साहस हमें स्वयं जुटाना पड़ता है। इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि हमारा आत्मविश्वास हमारी नियति को आकार देता है। जिस व्यक्ति को लगता है कि वह सीख सकता है, वह सीखने के अवसर खोजता है। जिसे लगता है कि वह बदल सकता है, वह अपनी आदतें बदलता है। जिसे लगता है कि वह गिरकर फिर उठ सकता है, वह असफलता से डरता नहीं और धीरे-धीरे यही छोटे-छोटे विश्वास बड़े निर्णयों में बदलते हैं, निर्णय आदतों में, आदतें चरित्र में और चरित्र अंततः जीवन की दिशा तय करता है। इसलिए अपने परिवार की उपलब्धियों पर गर्व कीजिए, लेकिन उनके पीछे छिपकर मत बैठिए। आपकी विरासत आपको शुरुआत दे सकती है, लेकिन आपकी पहचान आपकी अपनी यात्रा बनाएगी।


याद रखिएगा, नाम, संपत्ति, संस्कार आदि रूपी छायादार पेड़ विरासत में मिल सकता है, लेकिन उसे शाखाओं के रूप में फैलाने की जिम्मेदारी हमारी होती है। हम कहाँ और किस परिवार से हैं, यह हमारी कहानी का परिचय मात्र है और हम कहाँ तक पहुँचेंगे यह हमारा आत्मविश्वास, चुनाव और कर्म तय करेंगे। इसलिए स्वयं पर विश्वास रख, विकल्पों को पहचानिए, सही निर्णय लीजिए और अपनी यात्रा पर आगे बढ़ते रहिए।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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