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अपनों के साथ बिताए साधारण पलों से बनाएँ जीवन ख़ूबसूरत !!!

Writer: Nirmal Bhatnagar
Nirmal Bhatnagar
11 minutes ago
3 min read

Sep 11, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, जीवन के बेहतरीन पाठ आपको कभी भी, किसी से भी मिल सकते हैं। मुझे एक बार फिर इस बात का एहसास एक मित्र द्वारा साझा किए गए व्हॉट्सएप मैसेज को पढ़ते वक्त हुआ, जिसने मुझे उम्र और ज़िंदगी का अंतर व्यवहारिक नजरिये के साथ बेहतरीन तरीक़े से समझाया था। चलिए आज उसी सीख के साथ अपने लेख की शुरुआत करते हैं-


दोस्तों, जिन लोगों से आप प्रेम करते हैं, जिनके साथ आप इस जीवन की जीना चाहते हैं, उनके बिना बिताया समय उम्र है और इन्हीं अपनों के साथ बिताए हुए पल जीवन है। बात सुनने में बड़ी साधारण सी है, लेकिन अपने आप में पूरी ज़िंदगी का हिसाब-किताब खुद में समेटे हुए है। अक्सर आपने अपनों से सुना होगा, “यार पता ही नहीं चला कि समय कहाँ चला गया। देखते ही देखते माता-पिता बूढ़े हो गए और बच्चे बड़े। सभी दोस्त आज अपने-अपने जीवन में व्यस्त हो गए।”


ऐसी बातों को करते वक्त हम कभी ध्यान ही नहीं देते हैं कि जीवन के इतने वर्षों तक हमने अपने जीवन को जिया कैसे और कितना। ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि सामान्यतः सुबह से शाम तक हम अपने काम में व्यस्त रहे। कभी हम मीटिंग के लिए चिंतित थे, तो कभी लक्ष्य पाने की ऊहापोह में, तो कभी हमें पैसे, जिम्मेदारियों और सुखद भविष्य की चिंता सताती थी। कुल मिलाकर कहूँ तो हमारी पूरी दौड़ भौतिक लक्ष्यों को पाने की चाह में थी और इसी भागदौड़ में कई बार वे लोग पीछे छूट गए, जिनके लिए हम यह सब कर रहे थे। हमने बच्चों के भविष्य को सुरक्षित तो बनाया, लेकिन उनके साथ बैठकर उनका आज सुनने का समय नहीं निकाला। हमने परिवार को सुविधाएँ दीं, लेकिन अपना समय नहीं दिया। हमने दोस्तों से कहा, “कभी मिलते हैं…” और वह ‘कभी’ कई वर्षों तक नहीं आया।


दोस्तों, सच तो यह है कि समय केवल कैलेंडर पर नहीं, रिश्तों के बीच भी बीतता है और उम्र की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि जब हमारे पास समय होता है, तब हम अक्सर उसे महत्व नहीं देते; और जब महत्व समझ आता है, तब समय हमारे हाथ से निकल चुका होता है। याद रखिएगा, जिंदगी की ख़ूबसूरती हमेशा बड़ी उपलब्धियों में नहीं होती। कई बार वह अपनों के साथ चाय पीने में, माता-पिता के पास बैठने में, बच्चों की बातें बिना मोबाइल के सुनने में, पुराने दोस्तों को बिना वजह फ़ोन करने में और जीवनसाथी के साथ बिना किसी खास वजह के घूमने, जैसी छोटी-छोटी चीजों में छिपी होती है। इन पलों का कोई आर्थिक मूल्य भले ही नहीं होता, लेकिन यही पल जीवन का भावनात्मक मूल्य तय करते हैं। इसलिए हमें अपनी उम्र को वर्षों में गिनने के स्थान पर, जीवन की यादों में गिना जाना चाहिए। जिससे जब हम कल पीछे मुड़कर देखेंगे, तो शायद हमें यह अफसोस नहीं होगा कि जब हमारे अपनों को हमारी जरूरत थी तब हम वहाँ होकर भी वहाँ नहीं थे।


दोस्तों, हमें जीवन को लंबा बनाने के साथ-साथ अर्थपूर्ण भी बनाना है। कमाइए, आगे बढ़िए, सपने देखिए, सफलता हासिल कीजिए; लेकिन उन लोगों के लिए भी समय बचाकर रखिए, जिनके साथ आपकी सफलता का आनंद सार्थक बन सके क्योंकि जिंदगी की सबसे मूल्यवान संपत्ति बैंक-बैलेंस नहीं, बल्कि वे चेहरे और यादें हैं जिन्हें देखकर हमारा मन कहता है, “हाँ, इस समय मैंने सचमुच जीवन जिया था।”


अंत में एक बार और याद दिला दूँ कि उम्र बताती है कि हमने कितने वर्ष इस दुनिया में बिताए; और ‘ज़िंदगी’ बताती है कि उन वर्षों में हमने कितने पल सचमुच जीवन जिया। इसलिए दोस्तों तारीख बदलने से पहले अपनों के साथ बैठो, जो दूर हैं उन्हें फ़ोन करो; मैसेज करो क्योंकि जिंदगी के सबसे खूबसूरत साल किसी बड़ी उपलब्धि में नहीं, बल्कि अपनों के साथ बिताए साधारण से पलों में छिपे होते हैं।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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