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अमर वही जो दूसरों के जीवन में रंग भर दे…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • 14 minutes ago
  • 3 min read

Mar 20, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, हर इंसान अपने जीवन में कुछ ना कुछ ऐसा करना चाहता है जो उसके नाम को अमर करदे। याने वह ऐसी पहचान बनाना चाहता है जो उसके नाम को अमिट या यादगार बना दे। कोई इस लक्ष्य को धन कमा कर पाना चाहता है, तो कोई सेवा के रास्ते से, तो कोई किसी और तरीक़े से। लेकिन तमाम प्रयासों के बाद भी हर इंसान इस लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाता है क्योंकि उसे अमरता का असली सूत्र पता नहीं होता है। आइए आज जीवन बदल देने वाली एक कहानी के माध्यम से जीवन के इस गूढ़ रहस्य को समझने का प्रयास करते हैं।


कई वर्ष पहले आर्यन नाम के एक महान चित्रकार थे। उनके बनाए चित्र इतने सुंदर और सजीव होते थे कि लोग उन्हें देखकर मंत्रमुग्ध हो जाया करते थे। लेकिन इसके बाद भी वे इस बात से परेशान थे कि उनकी बनाई हर पेंटिंग कुछ ही वर्षों में फीकी लगने लगती थी। जबकि वे चाहते थे कि वे ऐसा कुछ बनाए जो कभी मिटे नहीं, जो हमेशा सजीव लगे। इसी प्रश्न का उत्तर खोजते-खोजते वे हिमालय पर रहने वाले एक योगी के पास पहुँचे। योगी ने मुस्कुराकर कहा, “वत्स, यदि अमर चित्र बनाना है, तो रंगों से नहीं, अनुभवों से बनाओ, वह भी कागज पर नहीं, जीवन में बनाओ।”


आर्यन इस बात को ठीक से समझ नहीं पाया। उसने योगी से इसे थोड़ा विस्तार से बताने के लिए कहा। इसपर योगी ने उसे तीन दिन में बिना रंग, बिना कूची, बिना कैनवास के तीन चित्र बनाने के लिए कहा। जिसमें पहले दिन उसे उस व्यक्ति का चित्र बनाना था जो सबसे अधिक भूखा हो। आर्यन इस उद्देश्य को ले पास ही के एक गाँव में काफ़ी देर तक भटका और अंत में उस भिखारी तक पहुँचा, जो कई दिनों से भूखा था। आर्यन ने उसे भोजन कराया जिसकी वजह से भिखारी के चेहरे पर संतोष और आँखों में चमक आ गई। उसी क्षण आर्यन को महसूस हुआ, ‘यही वह चित्र है, जो किसी रंग से नहीं बन सकता। उसने उस क्षण को अपने भीतर सहेज लिया।’


दूसरे दिन योगी ने आर्यन को कहा, “अब तुम्हें उस व्यक्ति का चित्र बनाना है जो गहरे दुख में हो, साथ ही तुम्हें उसे शब्दों का इस्तेमाल करे बिना, सिर्फ अपनी उपस्थिति से शांत करना है।” आर्यन एक बार फिर गाँव तक गया और उसने वहाँ एक महिला को देखा, जो अपने प्रियजन को खोकर रो रही थी। वह उसके पास बैठ गया और बिना कुछ कहे कई घंटों तक उसकी पीड़ा को सुनता रहा। धीरे-धीरे उस महिला का रोना थम गया और चेहरे पर एक हल्की शांति लौट आई। आर्यन समझ गया, ‘यह शांति ही उसका दूसरा चित्र है।’


तीसरे दिन योगी ने कहा, “अब अपना ऐसा चित्र बनाओ जिसमें ‘तुम’ न हो।” यह सबसे कठिन था। आर्यन ने ध्यान किया, विचार किया… और तब अचानक ही उसे एहसास हुआ कि जब वह भूखे को खिला रहा था और दुखी के पास बैठा था, तब वह अपने बारे में सोच ही नहीं रहा था। उस समय उसका अहंकार पूरी तरह समाप्त हो गया था। वही ‘अहंकार-शून्य’ अवस्था उसका तीसरा चित्र थी। अगले दिन चित्रकार को ख़ाली हाथ आया देख योगी ने उससे पूछा, “कहाँ हैं तुम्हारे चित्र?” आर्यन मुस्कुराया और बोला, “महाराज, वे अब कागज पर नहीं, मेरे स्वभाव में बस गए हैं और इसलिए अब वे कभी फीके नहीं पड़ेंगे।”


दोस्तों, जीवन के इस गूढ़ रहस्य को हमेशा याद रखिएगा, जो हम अपने लिए करते हैं, वह समय के साथ खत्म हो जाता है। लेकिन जो हम दूसरों के लिए करते हैं, वह अमर हो जाता है। इस बात को आप मदर टेरेसा के जीवन से भी समझ सकते हैं। ना तो उन्होंने अपने पूरे जीवन में ढेर सारे पैसे कमाए और ना ही कोई भव्य स्मारक बनाए। उन्होंने तो बस हजारों जरूरतमंद लोगों के जीवन में प्रेम और सेवा का रंग भरा। उनके दिलों में अमिट छाप छोड़ी, इसीलिए उनका नाम आज भी जीवित है।


दोस्तों, हम सब भी दूसरों के जीवन में सहारा बनकर; बिना स्वार्थ के मदद करकर अमर हो सकते हैं। इसलिए अपने जीवन को केवल उपलब्धियों तक सीमित मत रखिए, उसमें सेवा, संवेदना और विनम्रता को भी शामिल कीजिए क्योंकि अंत में, अमर वही होता है, जो खुद से ऊपर उठकर दूसरों के जीवन में रंग भर देता है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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