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असफलता निखरने की प्रक्रिया का नाम है…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • Dec 29, 2025
  • 3 min read

Dec 29, 2025

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

Image Credit : mykhel.com
Image Credit : mykhel.com

दोस्तों, ‘असफलता’, एक ऐसा शब्द है जिसे सुनते ही अक्सर मन में डर बैठ जाता है क्योंकि अक्सर माना जाता है कि असफल होना याने जीवन में पीछे रह जाना, लोगों की नज़रों में गिर जाना, या अपने सपनों से दूर हो जाना। लेकिन जीवन के अनुभव ने मेरा परिचय इसके दूसरे रूप से करवाया है। मैंने महसूस किया है कि असफलता कभी भी अंतिम फैसला नहीं होती, वह तो इंसान को तैयार करने की प्रक्रिया होती है। लेकिन जो लोग असफलता से घबराकर रुक जाते हैं, वे वहीं थम जाते हैं और जो लोग असफलता को समझकर याने उससे सीखकर आगे बढ़ते हैं, वही सच में सफल होते हैं।


जी हाँ दोस्तों, हकीकत में असफलता, अनुभव का सबसे गहरा स्रोत होती है। वो हमें वह सिखाती है, जो सफलता कभी नहीं सिखा सकती। सफलता अक्सर लोगों को अहंकारी बनाती है, और असफलता विनम्र। सफलता तालियाँ देती है, असफलता आत्मचिंतन कराती है। यही आत्मचिंतन इंसान को बेहतर निर्णय लेने योग्य बनाता है। इसी से धैर्य पैदा होता है, और इसी से आत्मबल मजबूत होता है।


उदाहरण के तौर पर आप एम. एस. धोनी को ही देख लीजिए। आज पूरी दुनिया उन्हें एक सफल कप्तान और महान क्रिकेटर के रूप में जानती है।लेकिन उनका सफर आसान नहीं था। धोनी का चयन कई बार राज्य टीमों में नहीं हुआ। वे छोटे शहर से थे, उनके पास न सिफ़ारिश थी, न बड़े संसाधन। एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें रेलवे में टिकट कलेक्टर की नौकरी करनी पड़ी। दिन में नौकरी और शाम को क्रिकेट अभ्यास। यह दिनचर्या आसान नहीं थी। कई लोग कहते थे, “अब क्या क्रिकेट खेलेगा?” “नौकरी मिल गई, वही काफी है।” लेकिन धोनी ने असफलताओं को अपने आत्मविश्वास पर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने अभ्यास जारी रखा, धैर्य रखा और सही मौके का इंतज़ार किया। आज वही धोनी भारत को वर्ल्ड कप दिलाने वाले कप्तान बने।
अगर उन्होंने शुरुआती असफलताओं को अपनी सीमा मान लिया होता, तो यह इतिहास कभी न बनता।


असफलता के दौर में सही माहौल ज़रूरी है क्योंकि असफलता के बाद इंसान सबसे ज़्यादा संवेदनशील होता है। ऐसे समय में ताने, तुलना और दबाव उसे और तोड़ देते हैं। लेकिन एक भरोसेमंद आवाज़—“तू कर सकता है”—फिर से खड़ा कर देती है। माता-पिता, शिक्षक, दोस्त और समाज यदि असफलता को सीख की तरह देखें, तो असफल इंसान खुद को बोझ नहीं, संभावना समझने लगता है।


याद रखें असफलता आपका मूल्य तय नहीं करती। एक असफल प्रयास आपकी पूरी पहचान नहीं बन सकता। वह सिर्फ़ यह बताता है कि रास्ता अभी पूरा नहीं हुआ है और कुछ चीजों को सीखना अभी बाक़ी है। जो लोग असफलता से खुद को जोड़ लेते हैं, वे डर में जीने लगते हैं और जो लोग असफलता को सीढ़ी बना लेते हैं, वे ऊँचाई तक पहुँचते हैं।


दोस्तों, अंत में इतना ही कहूँगा कि जीवन में सफल होना चाहते हो तो ठोकरों से डरने और असफलता से भागने के स्थान पर सीखना शुरू करो और याद रखो कि ठोकरों से डरना और असफलता से भागना, अपने विकास से भागना है। हर ठोकर आपके भीतर नई ताकत पैदा करती है। हर गिरावट आपको और समझदार बनाती है। इसलिए ही मैं कहता हूँ असफलता आपको रोकने नहीं आती, वह आपको अगले स्तर के लिए तैयार करने आती है। इसलिए ही कहा जाता है, “जो सीखता है, वही बढ़ता है और जो बढ़ता है, वही अंततः सफल होता है।”


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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