top of page
Search

आँखें वह कहती हैं जिसे कहने का साहस हम नहीं जुटा पाते…

Writer: Nirmal Bhatnagar
Nirmal Bhatnagar
2 days ago
3 min read

Oct 31, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, आप निश्चित तौर पर ऐसे लोगों के संपर्क में आयें होंगे, जिनके होठों पर तो मुस्कान रहती है, लेकिन उनकी आँखें कुछ और ही कहानी सुना रही होती हैं। इसी तरह आपने यह भी देखा होगा कि कई लोगों की आंखें बिना कुछ कहे भी बहुत कुछ कह देती है। जानते हैं क्यों? क्योंकि शब्दों को आसानी से सम्भाला जा सकता है, लेकिन भावनाओं को छिपाना मुश्किल होता है। इसीलिए हम दुनिया के सामने अपनी तकलीफ को मज़ाक में उड़ा सकते हैं और मन की बात को चुप्पी के पीछे छिपा कर मुस्कुरा सकते हैं। लेकिन ऐसी स्थिति में अक्सर हमारी आँखें वही कह देती हैं, जिसे हमारी ज़ुबान कहने से डरती है। प्रसिद्ध सूफी कवि रूमी ने इसी बात को बताते हुए कहा था, “जो कुछ हम अपने दिल में छिपाते हैं, वह हमारी आँखों में दिखाई देने लगता है।”


ज़रा सोच कर देखिएगा, जब मन में किसी के लिए सच्चा प्यार होता है, तो उसे देखते ही हमारे चेहरे पर चमक आ जाती है। जब किसी बात का दुख होता है, तो भीड़ में बैठे होने के बावजूद आँखों की उदासी छिपाना मुश्किल हो जाता है और जब किसी के प्रति नाराज़गी होती है, तो कई बार बिना कुछ कहे ही हमारा व्यवहार बदल जाता है।


दोस्तों, हम अक्सर दूसरों से अपनी भावनाएँ छिपाने की कोशिश करते हैं, और शायद खुद से भी कुछ बातें छिपाते रहते हैं और कहते हैं कि हमें कोई फर्क नहीं पड़ता, जबकि भीतर ही भीतर वही बात हमें परेशान कर रही होती है। या फिर कई बार हम कहते हैं कि हम खुश हैं, लेकिन मन में कोई अधूरी इच्छा हमें बेचैन कर रही होती है।


दोस्तों, दूसरों से अपनी भावनाएँ छिपाना संभव है, लेकिन उनसे भागकर अपने मन को शांत करना आसान नहीं। इसलिए कभी-कभी खुद से ईमानदारी से बात करना जरूरी है। अगर दुख है, तो उसे स्वीकार कीजिए। अगर किसी से नाराज़गी है, तो उसके कारण को समझिए। अगर किसी से प्रेम है, तो उसे सम्मान और सही शब्दों के साथ व्यक्त करना सीखिए। हर भावना को दबाना मजबूत होने की निशानी नहीं है। इसके विपरीत अपनी भावनाओं को समझना और उसे सही तरीके से व्यक्त करना भावनात्मक रूप से मजबूत होना है।


एक बात का ध्यान जरूर रखिएगा, जब कभी किसी की आँखों में उदासी दिखाई दे, तो तुरंत कोई निष्कर्ष मत निकालिए। हो सकता है वह किसी परेशानी से गुजर रहा हो, और उसके बारे में आप जानते ना हों। कभी-कभी सलाह देने से ज्यादा जरूरी होता है किसी को ध्यान से सुनना और उसे यह भरोसा देना कि वह अपनी बात कह सकता है।


दोस्तों, अगर मेरे इस विचार से सहमत हों तो आज से एक छोटा-सा अभ्यास कीजिए। प्रतिदिन कुछ मिनट शांत बैठकर खुद से पूछिए, “मेरे मन में इस समय वास्तव में क्या चल रहा है? क्या मैं अपनी भावनाओं को स्वीकार कर रहा हूँ या केवल दुनिया को खुश दिखाने की कोशिश कर रहा हूँ?” याद रखिएगा, मन की सच्चाई को पहचानना ही खुद को बेहतर समझने की शुरुआत है।


दोस्तों, चेहरे की मुस्कान दुनिया को दिखाई देती है, लेकिन दिल का सुकून आपकी पूरी ज़िंदगी में झलकता है। इसलिए अपने दिल को समझिए, अपनी भावनाओं का सम्मान कीजिए और दूसरों के अनकहे दर्द के प्रति भी संवेदनशील रहिए और हमेशा याद रखिए कि अक्सर आँखें वह कह देती हैं, जिसे शब्दों में कहने का साहस हम जुटा नहीं पाते।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

Comments


bottom of page