रुकना भी ज़रूरी है, जीवन में आगे बढ़ने के लिए…

Oct 29, 2026
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, हममें से ज्यादातर लोग इस धारणा के साथ जीते हैं कि सफल होने के लिए लगातार काम करते रहना जरूरी है। याने जितनी ज्यादा मेहनत, जितनी ज़्यादा व्यस्तता और जितनी कम छुट्टी, उतनी ज्यादा और बड़ी सफलता! जो मेरी नज़र में बिल्कुल भी सही नहीं है। सामाजिक जीवन से मिले अनुभव के आधार पर कहूँ तो मैंने लगातार चलते रहने याने काम करने वाले लोगों को थकते हुए और फिर थकान को अनदेखा करने की वजह से मंजिल पर पहुँचने के पहले उत्साह खोते हुए देखा है।
दोस्तों, ज़िंदगी कोई ऐसी दौड़ नहीं है, जिसमें हर समय तेज़ भागना जरूरी है। यह तो एक लंबी यात्रा है, जिसमें आगे बढ़ने के साथ-साथ खुद को शारीरिक और मानसिक तौर पर सम्भालना भी जरूरी है। एक किसान को देखिए, खेत तैयार करने और फिर बीज बोने के बाद, वह कई सप्ताह तक उसे खाद पानी देता है और प्रकृति को अपना कार्य करने का अवसर देता है, तब जाकर अच्छी फसल पाता है। सोच कर देखिए, अगर वही किसान धैर्य रखने के स्थान पर रोज़ मिट्टी खोदकर देखता कि बीज में अंकुरण हुआ है या नहीं, तो क्या पौधा बढ़ पाता? नहीं ना। ठीक ऐसे ही जीवन में भी कुछ बदलाव समय, धैर्य और सही देखभाल से ही आते हैं। इसलिए ही मेरा मानना है कि मजबूत होने का अर्थ हर परिस्थिति में खुद को खींचते रहना नहीं, बल्कि यह समझना भी है कि कब रुकना, आराम करना और नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ना है। हाँ! यहाँ यह समझना ज़रूरी है कि आराम करने का अर्थ अपने लक्ष्य को छोड़ देना भी नहीं है।
दोस्तों, जीवन में कुछ हासिल करने के लिए दृढ़ निश्चय जरूरी है। जब हम शुरुआत करते हैं, तब हमारे साथ बड़े-बड़े संकल्प, बड़ी-बड़ी योजनाएँ और ढेर सारा उत्साह होता है। लेकिन जब रास्ते में मुश्किलें आती हैं, मिश्रित परिणाम मिलते हैं और कई बार तो लगातार असफलता मिलती है, तो वही उत्साह धीरे-धीरे कम होने लगता है। ऐसे विपरीत समय में केवल जुनून नहीं बल्कि दृढ़ संकल्प हमें आगे बढ़ने की ऊर्जा देता है। इसलिए ही कहा जाता है, “जुनून हमें शुरुआत करने की प्रेरणा देता है, जबकि दृढ़ संकल्प कठिन दिनों में भी प्रयास जारी रखने की ताकत देता है।”
दोस्तों, लक्ष्य चाहे अच्छी सेहत बनाना हो या कोई नई कला सीखना, या फिर भीतर की शांति तलाशना, सभी लक्ष्यों को पाने के लिए नियमित प्रयास जरूरी है। लेकिन इन प्रयासों के बीच अपनी सेहत, भावनाओं और मन की जरूरतों का ध्यान रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसलिए दोस्तों, लक्ष्य का पीछा करते वक्त ख़ुद से बार-बार यह दो सवाल पूछना जरूरी है। पहला, क्या मैं लक्ष्य को पाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा हूँ? और दूसरा, क्या मैं खुद को इतना समय दे रहा हूँ कि इस यात्रा का आनंद ले सकूँ? अगर जवाब ‘हाँ’ में है तो बढ़िया और ‘ना’ में है, तो ख़ुद को याद दिलाइए कि अपनी व्यस्त दिनचर्या में थोड़ा समय आराम, परिवार, प्रकृति और आत्मचिंतन के लिए भी रखना आवश्यक है। कभी-कभी कुछ देर शांत बैठना, खुलकर हँसना या अपनों के साथ समय बिताना हमें वह ऊर्जा दे देता है, जो घंटों काम करने से भी नहीं मिलती।
याद रखिएगा, सफलता केवल मंज़िल को पाने का नाम नहीं है। असली सफलता तो मंजिल को पाने के साथ-साथ ख़ुद को खोने से बचाना है। इसलिए दोस्तों सफलता पाने के लिए दृढ़ निश्चय के साथ आगे बढ़िए, जरूरत पड़ने पर विश्राम कीजिए, अपनी शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक, पारिवारिक और सामाजिक जरूरतों और दायित्वों का ध्यान रखिए और फिर नई ऊर्जा से अपनी यात्रा शुरू कीजिए क्योंकि जिंदगी में लंबे समय तक आगे वही बढ़ता है, जो मेहनत करना भी जानता है और खुद को फिर से तरोताज़ा करना भी।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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