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बीता कल सिर्फ़ सबक़ लेने के लिए होता है…

Writer: Nirmal Bhatnagar
Nirmal Bhatnagar
2 days ago
2 min read

Updated: 6 hours ago

Oct 26, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, जीवन से मिले अनुभव के आधार पर मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि सफलता की राह की सबसे बड़ी रुकावट विपरीत परिस्थितियाँ या कोई और इंसान नहीं, हम खुद होते हैं। उदाहरण के लिए बीते हुए कल की गलतियों को याद करके खुद को दोष देते रहना और सोचना कि काश! उस दिन फलाना फैसला न लिया होता या काश! उस इंसान से ऐसा न कहा होता या फिर काश! उस मौके को पहचान लिया होता, आदि। लेकिन सोच कर देखिएगा, जिस घटना को बदला नहीं जा सकता, उसका बोझ उठाकर, हम अपने आज को मुश्किल क्यों बना रहे हैं?


दोस्तों, गलती करना या होना सामान्य है, बल्कि ये कहना बेहतर होगा कि ग़लतियाँ करना इंसान होने की निशानी है। इसलिए मैं हमेशा कहता हूँ, हर निर्णय सही हो, हर कोशिश सफल हो और किसी भी रिश्ते में हमसे कोई चूक न हो, यह संभव नहीं है। इसलिए गलतियों को भूल कर ख़ुद को माफ करना ही बेहतर है। लेकिन हम दूसरों की गलतियों को जितनी आसानी से माफ कर देते हैं, खुद को उतनी आसानी से माफ नहीं कर पाते हैं और अपनी एक गलती को अपनी पूरी पहचान बना लेते हैं, जबकि सच यह है कि हम अपनी गलतियों से कहीं अधिक हैं।


याद रखिएगा दोस्तों, जब आप ख़ुद को अतीत में बाँधते हैं तब आप अपने भीतर पछतावे को जन्म देते हैं और जब आप अतीत से सीख लेते हैं तब आप ख़ुद को भविष्य के लिए तैयार करते हैं। इसलिए दोस्तों, अगर किसी फैसले से नुकसान हुआ है, तो उसकी जिम्मेदारी स्वीकार कीजिए। संभव हो तो सुधार कीजिए, किसी का दिल दुखाया है तो माफी माँगिए और अपनी गलती से सबक लीजिए। लेकिन उसके बाद खुद को बार-बार सजा देना बंद कीजिए। आत्ममंथन आपको बेहतर बनाता है, जबकि आत्मग्लानि आपको भीतर से कमजोर करती है।


याद रखिएगा, जीवन का उद्देश्य केवल जिम्मेदारियाँ निभाना नहीं, बल्कि अपने भीतर की रुचियों, क्षमताओं और सपनों को भी पहचानना है। जब मन पछतावे के बोझ से दबा रहता है, तो वर्तमान की संभावनाएँ दिखाई नहीं देतीं। हम जो बन सकते हैं, उसकी जगह इस बात में उलझे रहते हैं कि हम पहले क्या कर चुके हैं।


दोस्तों, सफलता चाहते हैं, तो आज से ही एक छोटा-सा अभ्यास शुरू कीजिए। अपनी किसी पुरानी गलती को याद करिए और फिर लिखिए कि आपने उससे क्या सीखा। ऐसा करना आपको बार-बार याद दिलायेगा कि मैं अपने अतीत को बदल तो नहीं सकता, लेकिन उससे मिली सीख के आधार पर अपना अगला कदम जरूर बेहतर बना सकता हूँ।


दोस्तों, आपका अतीत आपकी कहानी का एक हिस्सा है, पूरी कहानी नहीं। खुद को अपनी गलतियों से आगे बढ़ने का अवसर दीजिए। अपने आज को पूरी ईमानदारी से जियें और उन कामों के लिए समय निकालें, जो आपके जीवन को अर्थ, आनंद और उद्देश्य देते हैं क्योंकि ज़िंदगी खूबसूरत ही तब बनती है, जब हम गलतियों का बोझ ढोने के बजाय उनसे सीखकर आगे बढ़ना सीख जाते हैं। इसलिए अपने बीते कल से सबक लीजिए, और अपने आज को उसके हवाले मत कीजिए।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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