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मैं क्या कर सकता हूँ…

Writer: Trupti Bhatnagar
Trupti Bhatnagar
2 days ago
3 min read

Oct 23, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, आज तकनीक और सुविधाओं से भरे इस युग में आप जिधर नज़र घुमा कर देखेंगे आपको समस्याएँ ही समस्याएँ नज़र आयेंगी। मेरी नजर में इनकी बढ़ती संख्या की मुख्य वजह समस्याओं का जटिल होना नहीं अपितु हम जैसे सामान्य लोगों का उन्हें अपनी समस्या नहीं मानना है। उदाहरण के लिए सड़क पर जब कोई बुजुर्ग या बच्चा हमें परेशान दिखाई देता है तो हम उसे यह सोच नजरंदाज कर आगे बढ़ जाते हैं कि ‘इससे मेरा क्या लेना देना।’ ऐसी ही कुछ प्रतिक्रिया हम तब भी देते हैं, जब कोई हमें सड़क पर गंदगी फैलाता हुआ नजर आता है। याने सामान्य सी समस्याओं को ज्यादातर लोगों द्वारा अनदेखा करना ही समस्याओं की संख्या को बढ़ाकर, इस स्थिति को जटिल बनाता है।


जी हाँ दोस्तों, “इससे मेरा क्या लेना-देना?” वाली सोच ही इस स्थिति को विकराल बनाती है। हम अपने घर को साफ़ रखना चाहते हैं, लेकिन सड़क की गंदगी को दूसरों की समस्या मानते हैं। हम अपने बच्चों के भविष्य की चिंता करते हैं, लेकिन समाज के दूसरे बच्चों की परेशानियों से अनजान बने रहते हैं। हम एक बेहतर देश चाहते हैं, लेकिन उसके निर्माण में अपनी भूमिका निभाने से बचते हैं।


प्रसिद्ध अमेरिकी टेलीविज़न होस्ट फ्रेड रोजर्स के अनुसार इस समस्या का समाधान जिम्मेदारियों को बाँटकर निभाना है। याने समस्याओं को देखकर मुँह मोड़ कर आगे बढ़ने के स्थान पर मदद के लिए आगे आना ही एकमात्र समाधान है। याने दोस्तों, हमें समस्या का हिस्सा बनने के स्थान पर समाधान का हिस्सा बनने का नजरिया विकसित करना होगा और साथ ही हमें ऐसे लोगों को अपना नायक बनना होगा जो ज़रूरत देखते ही मदद के लिए आगे आ जाते हैं।


थोड़ा गंभीरता के साथ अगर आप सोचकर देखेंगे तो निश्चित तौर पर मेरी इस बात से सहमत भी होंगे कि किसी की मदद करने, कुछ समस्याओं को दूर करने के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की ज़रूरत नहीं होती। आप किसी परेशान व्यक्ति की बात को ध्यान से सुनकर, ज़रूरतमन्द बच्चे को पढ़ाई में सहयोग देकर, किसी घायल को अस्पताल पहुँचा कर या अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखकर भी समाज के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी निभा सकते हैं।


याद रखिएगा दोस्तों, एक अच्छा इंसान अपने परिवार के साथ-साथ दूसरों के जीवन को भी बेहतर बनाने का प्रयास करता है। अगर आप मेरे इस विचार से सहमत हैं और इस बात को अपने जीवन में अपनाना चाहते हैं तो हर दिन ख़ुद से पूछिए, “आज मैंने अपने अलावा किसी दूसरे के जीवन को थोड़ा बेहतर बनाने के लिए क्या किया?” अगर नहीं, तो तत्काल अपना नजरिया बदलिए और अगर जवाब ‘हाँ’ है, तो इस गुडनेस को आगे बढ़ाइए। एक बात और याद रखियेगा, अगर उपरोक्त सवाल के जवाब में आपको कोई छोटी सी उपलब्धि याद आ रही है तो चिंता मत कीजिए क्योंकि सच्चे मन से की गई छोटी सी मदद भी इस दुनिया को बेहतर बनाने के लिए पर्याप्त है। वैसे भी मेरा मानना है कि कभी-कभी अपने हिस्से की ज़िम्मेदारी ईमानदारी से निभाना ही सबसे बड़ा बदलाव होता है। क्योंकि जब हम दूसरों की ज़िंदगी को बेहतर बनाने में योगदान देते हैं, तो हमारी अपनी ज़िंदगी भी अधिक अर्थपूर्ण बन जाती है। इसीलिए मैं हमेशा कहता हूँ, “दुनिया को बेहतर बनाने की शुरुआत ‘किसी को कुछ करना चाहिए’ से नहीं, बल्कि ‘मैं क्या कर सकता हूँ’ से होती है।”


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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