top of page
Search

धैर्य रखिए, सबकी यात्रा समान नहीं होती…

Writer: Nirmal Bhatnagar
Nirmal Bhatnagar
1 day ago
3 min read

Oct 30, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


माली ने एक बगीचे में, एक ही जैसी मिट्टी में दो बीज बोए और फिर दोनों बीजों का बराबर ध्यान रखते हुए खाद-पानी भी दिया। हालांकि दोनों बीजों को एक जैसा मौसम और एक जैसी धूप भी मिली लेकिन इसके बाद भी कुछ दिनों बाद एक ही बीज में अंकुरण हुआ और दूसरा बीज अभी भी मिट्टी के भीतर ही रहा।


एक ओर पहले पौधे को बढ़ते देख माली खुश था, वहीं दूसरे बीज को लेकर चिंतित। कुछ दिन और बीतते-बीतते उसे लगने लगा था कि शायद दूसरा बीज खराब है। विचार आते ही उसने मिट्टी हटाकर देखने का सोचा, लेकिन फिर धैर्य रखते हुए, उसे और समय देने का फैसला किया। कुछ सप्ताह बाद दूसरा बीज भी अंकुरित हुआ। उसकी जड़ें पहले से अधिक गहरी थी और वह धीरे-धीरे मजबूत होने लगा। समय बीतने पर दोनों पौधे बड़े हुए। पहला पौधा जल्दी बढ़ा था, लेकिन दूसरे की जड़ें अधिक मजबूत थीं। दोनों की अपनी खूबियाँ थीं, अपना विकास था और प्रकृति में अपनी जगह थी।


दोस्तों, बीज की देरी उसकी असफलता नहीं थी। वह बस अपने तरीके से तैयार हो रहा था। हमारी ज़िंदगी भी कुछ ऐसी ही है।किसी को 25 साल की उम्र में सफलता मिल जाती है, तो कोई 40 की उम्र में अपनी पहचान बनाता है। कोई कम उम्र में अपना घर खरीद लेता है, तो किसी को वर्षों की मेहनत के बाद अपने सपनों का आशियाना मिलता है। कोई जल्दी मंज़िल तक पहुँच जाता है, तो किसी को रास्ता तलाशने में ही समय लग जाता है।परेशानी तब शुरू होती है, जब हम अपनी ज़िंदगी की तुलना दूसरों से करने लगते हैं। हमें लगता है कि हम पीछे रह गए हैं, हमारे पास अवसर कम हैं या शायद हममें कोई कमी है। ऐसी स्थिति में अक्सर हम यह भूल जाते हैं कि हर इंसान की परिस्थितियाँ, जिम्मेदारियाँ, अवसर और संघर्ष अलग होते हैं। हमें दूसरों की उपलब्धियाँ दिखाई देती हैं, लेकिन उनके पीछे की पूरी कहानी नहीं।


दोस्तों, प्रकृति हमें सिखाती है कि सारे फूल एक ही मौसम में नहीं खिलते। ठीक इसी तरह सभी को समान उम्र में सफलता नहीं मिलती। प्रकृति ने सबके लिए अलग प्लान बनाया हुआ है। लेकिन हाँ, इसका अर्थ यह भी नहीं है कि हम प्रयास करना छोड़ दें। अपने सपनों के लिए मेहनत कीजिए, नई चीजें सीखिए और अपनी कमियों को सुधारिए। लेकिन साथ ही दूसरों की सफलता को अपनी असफलता का प्रमाण मत बनाइए। किसी लक्ष्य को पाने के प्रयास में कभी आप दूसरों के मुक़ाबले पीछे रह भी गए हैं, तो परेशान मत होइए। बस ख़ुद से ये तीन प्रश्न पूछिए, पहला, लक्ष्य का पीछा करते हुए क्या मैं कल से बेहतर हुआ हूँ? दूसरा, क्या मैं अपने लक्ष्य की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा हूँ? और तीसरा, क्या मैं अपनी छोटी-छोटी प्रगति को पहचान रहा हूँ? अगर जवाब ‘हाँ’ में है तो चिंता मत करिए और याद रखिए, दूसरों की घड़ी देखकर हमें अपनी रफ़्तार नहीं बदलना है। हमें तो बस अपनी दिशा सही रखते हुए, लगातार आगे बढ़ना है।


दोस्तों, संभव है, आज आपकी मेहनत का परिणाम दिखाई न दे। लेकिन याद रखिए, मिट्टी के भीतर बीज भी तब तक काम कर रहा होता है, जब तक दुनिया को उसका विकास दिखाई नहीं देता। इसलिए परिणाम से ज़्यादा अपनी यात्रा पर भरोसा रखिए। याद रखिएगा, सही समय का इंतज़ार करने से अधिक जरूरी है, उस समय के लिए खुद को तैयार करना क्योंकि आपकी कहानी दूसरों की कहानी से अलग है। इसलिए उसे अपनी गति से आगे बढ़ने दीजिए। वैसे भी ज़िंदगी की खूबसूरती सबसे पहले पहुँचने में नहीं, बल्कि अपनी मंज़िल तक पहुँचने के लिए ईमानदारी से प्रयास करते रहने में है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

Comments


bottom of page