आज के जीवन से लेकर आज के भारत तक !!!
- Nirmal Bhatnagar

- 14 hours ago
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Jan 26, 2026
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, सर्वप्रथम तो आप सभी को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!!! वैसे बताने की जरूरत नहीं है कि आज ही के दिन वर्ष १९५० में हमारा संविधान लागू हुआ था। दोस्तों, मेरी नजर में भारत का संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि यह तो हमारा मार्गदर्शक है, जो हमें बताता है कि एक सामान्य इंसान के रूप में हम किस तरह सम्मान के साथ जी सकते हैं; समाज को किस तरह संतुलित बना सकते हैं और सबसे महत्वपूर्ण अपने राष्ट्र को कैसे मजबूत बना सकते हैं।
इस आधार पर देखा जाए तो आज के भारतीय परिदृश्य में संविधान का महत्व पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक और आवश्यक हो गया है। चलिए, इस बात को थोड़ा और विस्तार से समझने का प्रयास करते हैं। संविधान सबसे पहले व्यक्ति के जीवन को सुरक्षा और दिशा देता है। यह हमें समानता का अधिकार देता है, फिर चाहे कोई अमीर हो या गरीब, स्त्री हो या पुरुष, किसी भी जाति, धर्म या भाषा से जुड़ा हो। जब एक आम नागरिक जानता है कि कानून की नज़र में वह किसी से कम नहीं है, तभी उसके भीतर आत्मसम्मान और आत्मविश्वास जन्म लेता है। संविधान हमें बोलने की स्वतंत्रता देता है, लेकिन साथ ही यह भी सिखाता है कि यह स्वतंत्रता दूसरों के अधिकारों को चोट पहुँचाए बिना हो।
कुल मिलाकर कहूँ, तो हमारे दैनिक जीवन में संविधान की भूमिका बहुत गहरी है। आज हम सुरक्षित हैं क्योंकि कानून है। आज हम सवाल पूछ सकते हैं क्योंकि अभिव्यक्ति की आज़ादी है। इसी तरह हम सपने देख सकते हैं क्योंकि संविधान हमें समान अवसर का अधिकार देता है। दोस्तों, संविधान न हो, तो शक्ति कुछ हाथों में सिमट सकती है और आम व्यक्ति असहाय बन सकता है। इसलिए मेरा मानना है कि संविधान कमज़ोर की ढाल और मजबूत की मर्यादा है।
आज के भारतीय संदर्भ में संविधान का महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि आज हम ऐसे दौर में हैं जहाँ विचारों की विविधता है, मतभेद हैं, तेज़ सूचनाएँ हैं और भावनाएँ जल्दी भड़क जाती हैं। ऐसे समय में संविधान हमें याद दिलाता है कि असहमति देशद्रोह नहीं होती, और संवाद ही लोकतंत्र की आत्मा है। यह हमें सिखाता है कि राष्ट्रभक्ति का अर्थ केवल नारे लगाना नहीं, बल्कि संवैधानिक मूल्यों का पालन करना है।
दोस्तों, संविधान का एक बड़ा योगदान, संतुलन की सीख देना है। यह अधिकार और कर्तव्य के बीच संतुलन बनाता है। यह सत्ता और जनता के बीच संतुलन रखता है। यह बहुमत की शक्ति को अल्पसंख्यकों के अधिकारों से नियंत्रित करता है। आज जब समाज में ध्रुवीकरण, असहिष्णुता और अविश्वास बढ़ने का खतरा दिखता है, तब संविधान हमें बंधुत्व की भावना की याद दिलाते हुए कहता है “हम अलग-अलग होकर भी एक हैं।”
संविधान हमें यह भी सिखाता है कि परिवर्तन संभव है, लेकिन संस्थागत और शांतिपूर्ण तरीके से। यही कारण है कि भारत ने कठिन परिस्थितियों, आपातकाल, आर्थिक संकट और सामाजिक आंदोलनों के बावजूद लोकतंत्र को बनाए रखा। हाँ! यह भी सही है कि हमारा संविधान लचीला है, लेकिन यकीन मानियेगा ये कमजोर नहीं है और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है।
दोस्तों, संविधान के विषय में एक बात और याद रखना जरूरी है, संविधान केवल किताबों में रहने से जीवित नहीं रहता। वह तब जीवित रहता है जब नागरिक उसे अपने व्यवहार में उतारते हैं। याने यह तब जीवित रहता है, जब हम कानून का सम्मान करते हैं। जब हम अफवाह की जगह तथ्य चुनते हैं। जब हम अधिकारों के साथ कर्तव्यों को भी निभाते हैं।
आज भारत को केवल मजबूत अर्थव्यवस्था या तकनीक की नहीं, बल्कि संवैधानिक चेतना की सबसे अधिक आवश्यकता है क्योंकि अगर संविधान सुरक्षित है, तो लोकतंत्र सुरक्षित है और अगर लोकतंत्र सुरक्षित है, तो हर नागरिक का भविष्य सुरक्षित है। अंत में इतना ही कहूँगा कि संविधान हमें यह याद दिलाता है कि भारत केवल एक भू-भाग नहीं, बल्कि एक साझा समझौता है, जहाँ न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व केवल शब्द नहीं, बल्कि जीवन के मूल मूल्य हैं। आइए, आज गणतंत्र दिवस के इस मौके पर हम एक प्रण लेते हैं कि आज से हम संविधान को सम्मान देने के साथ-साथ उसे जीने का प्रयास भी करेंगे।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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