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प्रक्रिया सही होगी तो परिणाम दिखेगा !!!

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • 2 days ago
  • 3 min read

Jan 23, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

प्रक्रिया सही होगी तो परिणाम दिखेगा !!!


दोस्तों, मुझे नहीं पता हमारा यह शो सीधे तौर पर कितने लोगों के जीवन में परिवर्तन ला रहा है या उन्हें प्रेरित कर रहा है। लेकिन मैं इतना तो कह ही सकता हूँ कि यह जितने भी लोगों तक पहुँच रहा होगा, उन सभी को सोचने के लिए मजबूर ज़रूर कर रहा होगा और यही मेरा मकसद भी है। दोस्तों, आज मैं आपसे एक ऐसे विषय पर बात करना चाहता हूँ जिसे बहुत ही कम लोग समझ पाते हैं या समझना चाहते हैं।


दोस्तों, आज हम दिखावे और सच्चाई पर चर्चा करेंगे। अंग्रेजी में एक कहावत है,“Everyone sees what you appear to be, few experience what you truly are.” याने आप ख़ुद को कैसा दिखाते हैं, उसी रूप से दुनिया आपको जानती है, लेकिन आप वास्तव में क्या हैं, यह बहुत कम लोग महसूस कर पाते हैं।


इसी तरह ज़िंदगी में ज़्यादातर लोग परिणाम देखते हैं, प्रक्रिया नहीं। दूसरे शब्दों में कहूँ तो सफलता की चमक सबको दिखती है, लेकिन उस चमक के पीछे की थकान, डर, असफलताएँ और संघर्ष, अक्सर अदृश्य रहते हैं। इसीलिए कहा गया है, बतख़ की तरह बनो। याने जिस तरह पानी के ऊपर तैरती हुई बतख एकदम शांत, स्थिर और बिना किसी परेशानी के तैरती नजर आती है। लेकिन पानी के नीचे उसके पैर लगातार, तेज़ी से बिना रुके, बिना दिखावे के चल रहे होते हैं। यही जीवन की सबसे बड़ी सीख है, काम चुपचाप बिना किसी शोर-शराबे के होता है, और पहचान या सफलता अपने आप नजर आ जाती है।


उदाहरण के लिए हमारी भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को ही ले लीजिए, जिन्हें दुनिया “कैप्टेन कूल” के नाम से जाती है। उन्हें यह नाम सिर्फ़ इसलिए मिला क्योंकि लोगों ने हमेशा उन्हें एक शानदार व्यक्तित्व और कप्तान के रूप में देखा, जो ना तो कभी अत्यधिक उत्साहित जश्न मनाता हुआ दिखता है और ना ही कभी गुस्से में नजर आता है। लेकिन अगर आप गहराई में उतर कर उनकी यात्रा को देखेंगे तो पायेंगे कि उनके लिए यह सफ़र इतना आसान नहीं था। उन्होंने छोटे शहर से निकलकर, रेलवे में टिकट कलेक्टर की नौकरी करते हुए, कई बार असफलता का स्वाद चखा और खुद पर शक किया। लेकिन इस सब के बाद भी उन्होंने अंदर ही अंदर अपने प्रयास जारी रखे और मैदान पर शांत रहे। हक़ीक़त में उनके भीतर असफलताओं से लड़ता हुआ एक योद्धा था। लेकिन लोगों ने मैदान पर उनका व्यवहार और जीती गई ट्रॉफी देखी, उनका संघर्ष नहीं। इसलिए ही उनकी छवि कूल बन गई।


दोस्तों, दृढ़ निश्चय वाला व्यक्ति सफल होने में नहीं, रुक जाने में कठिनाई महसूस करता है। सच्चा विजेता वह नहीं है जो कभी गिरा नहीं, बल्कि वह है जो गिरने के बाद भी कोशिश करना बंद नहीं करता। दुनिया आपकी मेहनत नहीं देखेगी, दुनिया आपके आँसू नहीं गिनेगी, दुनिया आपके डर नहीं समझेगी और यह ज़रूरी भी नहीं है। ज़रूरी यह है कि आप अपने लक्ष्य से नज़र न हटाएँ। ज़रूरी यह है कि आप पानी के नीचे लगातार पैर चलाते रहें।


आज के सोशल मीडिया के दौर में, लोग “दिखने” में व्यस्त हैं, “बनने” में नहीं। याद रखिए, जो लोग सच में कुछ बनते हैं, वे शोर नहीं करते। वे शांत रहकर, लगातार, ईमानदारी से काम करते हैं।


अगर आज आपकी मेहनत कोई नहीं देख रहा, अगर आपकी कोशिशें अनदेखी हैं, अगर आपको लग रहा है कि आप अकेले संघर्ष कर रहे हैं, तो घबराइए मत। आप बतख़ की तरह सही रास्ते पर हैं। एक दिन, जब आप किनारे पहुँचेंगे, दुनिया सिर्फ़ आपकी शांति देखेगी, लेकिन आप जानेंगे कि उस शांति के नीचे कितनी मेहनत छिपी हुई है और वही सच्ची जीत होती है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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