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इतिहास सिर्फ़ परिणाम देखता है, संघर्ष नहीं…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • 12 hours ago
  • 3 min read

Jan 24, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


अपने लेख के माध्यम से हमेशा मेरा एक ही प्रयास रहता है, “अपने पाठकों के भीतर एक नई शुरुआत का साहस जगाना क्योंकि मैंने ज्यादातर लोगों को इस भ्रम में जीते हुए देखा है कि “अब देर हो गई”, “अब बदलाव ला पाना असंभव है।”, या “अब कुछ नहीं हो सकता…” आदि। जबकि प्रकृति और इतिहास हमें हर क्षण यह सिखाता है कि हर दिन एक नया आरंभ हो सकता है। चलिए आज शुरुआत हम ऐसे ही तीन सरल लेकिन जीवन बदल देने वाले विचारों से करते हैं -

1) Everyone deserves new beginnings याने हर किसी को नई शुरुआत करने का हक है।

2) Beginnings often begin when you shift your focus याने शुरुआत अक्सर तब होती है जब आप अपना फोकस बदलते हैं।

3) New beginnings are not gifts, they are choices याने नई शुरुआत इनाम में नहीं मिलती है, उससे चुनना होता है।


कहने के लिए यह तीनों विचार बड़े साधारण से है लेकिन इसकी गहराई को समझने के लिए हम एक ऐसे व्यक्ति को याद करते हैं, जिसे पूरा देश ना सिर्फ़ जानता है, बल्कि उनका हृदय से सम्मान भी करता है। मैं बात कर रहा हूँ हमारे देश के पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक डॉ ए. पी. जे. अब्दुल कलाम की, जिन्हें दुनिया “मिसाइल मैन” के रूप में भी जानती है। 


उनका जीवन इतना सरल और आसान नहीं था क्योंकि उनके जीवन की असली कहानी वहाँ से शुरू नहीं होती, जैसी आज दिखती है। बहुत कम लोग जानते हैं कि उनका बचपन ग़रीबी में बीता और घर चलाने के लिए उन्होंने अख़बार तक बेचे। जीवन ने उन्हें सुविधाएँ नहीं दीं, लेकिन उन्होंने कभी इसकी शिकायत भी नहीं की। वैज्ञानिक जीवन में भी उनके कई प्रयोग असफल हुए। एक बार तो असफलता के बाद उन्हें सार्वजनिक आलोचना तक का सामना करना पड़ा था। पूरे देश के सामने उन्हें जिम्मेदार ठहराया गया था। लेकिन उस दिन उन्होंने जो कहा, वही नई शुरुआत की असली परिभाषा है, “असफलता मुझे परिभाषित नहीं करती, वह मुझे सिखाती है।” यही वह क्षण था, जब उन्होंने अतीत पर नहीं, भविष्य पर ध्यान केंद्रित किया। इस सोच ने समय के साथ उन्हें देश के सर्वोच्च पद पर पहुंचा दिया था।


दोस्तों, नई शुरुआत अक्सर तभी होती है, जब हम अपनी दिशा बदलते हैं। समस्या यह नहीं होती कि हमारे पास अवसर नहीं हैं, समस्या यह होती है कि हमारा ध्यान अक्सर गलत जगह अटका रहता है, याने बीते हुए कल में, पूर्व में हुई गलतियों में, लोग क्या कहेंगे, इस डर में। डॉ. कलाम ने भी चाहा होता तो कह सकते थे, “मेरे हालात ऐसे थे।”, “मैं असफल हो गया।”, “अब मुझसे नहीं होगा।” लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने अपने ध्यान को असफलता से सीख की ओर मोड़ दिया और वही मोड़, इतिहास बन गया।


याद रखें, नई शुरुआत कोई उपहार नहीं होती। वह हमारे अपने निर्णय का परिणाम होती है। कोई देवदूत आकर यह नहीं कहता कि “लो, अब तुम्हारा समय आ गया।”, समय तब आता है, जब आप कहते हैं, “अब मैं खुद को दूसरा मौका दूँगा।” डॉ. कलाम को भी नई शुरुआत किसी ने थाली में सजाकर नहीं दी, बल्कि उन्होंने खुद, हार न मानने, सीखते रहने और विनम्र व दृढ़ बने रहने का चुनाव किया।


अगर आज आप अपने जीवन के किसी मोड़ पर खड़े हैं, जहाँ आपको लगता है कि सब कुछ रुक गया है, तो याद रखें, आप भी नई शुरुआत के हक़दार हैं। बस आपको अपना ध्यान बदलना है, और एक साहसी निर्णय लेना है क्योंकि नई शुरुआत उम्र नहीं देखती, हालात नहीं देखती, दुनिया की राय नहीं देखती। वह सिर्फ़ एक चीज़ देखती है, आपका चुनाव और जब आप सही चुनाव करते हैं, तो इतिहास सिर्फ़ परिणाम देखता है, संघर्ष नहीं।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर


 
 
 

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