आपकी संगति आपके भविष्य की दिशा तय करती है…
- Nirmal Bhatnagar

- 4 days ago
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Mar 30, 2026
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, जीवन में हमारी पहचान केवल हमारे काम से ही नहीं बल्कि जिस माहौल में हम रहते हैं उससे भी बनती है। अर्थात् आपकी पहचान में उन लोगों का भी योगदान रहता है जिनके साथ आप उठते-बैठते हैं और किस तरह की बातों का हिस्सा बनते हैं। जी हाँ! कई बार हम अनजाने में ऐसी जगह बैठ जाते हैं जहाँ लोग दूसरों की बुराई कर रहे होते हैं। जैसे किसी की कमी निकालना, किसी की अनुपस्थिति में उसकी आलोचना करना, आदि। शुरुआत में यह सब सामान्य लगता है, लेकिन धीरे-धीरे यही आदत हमारी सोच का हिस्सा बन जाती है। वैसे इस बात के साथ एक कड़वी सच्चाई और जुड़ी हुई है, जहाँ लोग दूसरों की बुराई करते हैं, वहाँ आपकी अनुपस्थिति में आपकी बारी भी तय होती है। इसलिए समझदारी इस बात में नहीं है कि आप क्या, कितना और कैसे बोलते हैं, बल्कि इस बात में है कि आप कहाँ बोलते हैं और कहाँ चुप रहते हैं।
एक अफ्रीकी कहावत है, “बुद्धिमान व्यक्ति बोलने से पहले अपने मन को भरता है।” याने बोलने से पहले सोचना जरूरी है। गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई को ही ले लीजिए। वे सिर्फ़ बुद्धिमत्ता की वजह से सफल नहीं हुए बल्कि इसमें उनके शांत और संतुलित व्यवहार का भी योगदान था। इतनी बड़ी जिम्मेदारी सम्भालने के बावजूद भी वे कभी भी अनावश्यक विवादों या नकारात्मक चर्चाओं का हिस्सा नहीं बनते। वे प्रतिक्रिया देने से पहले सोचते हैं, फिर जरूरत पड़ने पर ही बोलते हैं। याने वे कम लेकिन सटीक बोलते हैं। यही कारण है कि लोग उन्हें केवल एक सफल लीडर नहीं, बल्कि एक सम्मानित व्यक्तित्व के रूप में देखते हैं।
दोस्तों, जीवन में यह समझना बेहद जरूरी है कि हर बात का जवाब देना और हर चर्चा में शामिल होना जरूरी नहीं होता। कई बार हमारी सबसे बड़ी ताकत ख़ुद को नकारात्मक माहौल से दूर रखना होती है। याने जीवन में ख़ुद को उस माहौल से दूर रखना आवश्यक होता है जो आपको छोटा बना रहा होता है। याद रखियेगा, अगर आप नकारात्मक लोगों के बीच बैठते हैं, तो धीरे-धीरे आपकी सोच भी वैसी ही बन जाती है। लेकिन अगर आप ऐसे लोगों के साथ रहते हैं जो प्रेरित करते हैं, आगे बढ़ाते हैं और सम्मान देते हैं, तो वही ऊर्जा आपके भीतर भी उतर जाती है।
इसलिए दोस्तों, अपने जीवन में एक स्पष्ट नियम बना लीजिए, “जहाँ सम्मान नहीं, वहाँ उपस्थिति नहीं!” जहाँ नकारात्मकता है, वहाँ दूरी रखना ही समझदारी है। कहते हैं ना, “आपके शब्द आपकी सोच का आईना हैं और आपकी संगति आपके भविष्य की दिशा तय करती है।” इसलिए बोलने से पहले सोचिए, और सुनने से पहले भी सजग रहिए क्योंकि अंत में, लोग यह नहीं याद रखते कि आपने कितना कहा, वे यह याद रखते हैं कि आपने क्या कहा और कैसे कहा।
इसलिए दोस्तों, अपनी संगति को सजगता से चुनिए, अपने शब्दों को मूल्यवान बनाइए और अपने जीवन को उस ऊँचाई पर ले जाइए जहाँ सम्मान और शांति साथ चलते हैं क्योंकि इस दुनिया में बुद्धिमान वही है, जो बोलने से पहले सोचता है और बैठने से पहले जगह पहचानता है।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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