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आपकी सोच और आपके कर्म आपको बड़ा बनाते है…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • 2 days ago
  • 2 min read

Mar 31, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, आज हम ऐसे समय में जी रहे हैं जहाँ इंसान की कीमत उसके कपड़ों, गाड़ियों और बैंक बैलेंस से तय की जाती है। हम मानते हैं कि जिसके पास ज्यादा पैसा है, वही सफल है… वही बड़ा है।


लेकिन कभी-कभी जीवन हमें कुछ ऐसा आईना दिखा देता हैं, जो हमारी सारी परिभाषाएँ बदल देता हैं। ऐसा ही एक जीवन था, डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम का। जब शिलॉन्ग में उनका निधन हुआ, तो पूरा देश शोक में डूब गया। लेकिन असली सीख उस समय सामने आई, जब उनके जीवन की वास्तविकता लोगों के सामने खुली।


लोगों के मन में एक स्वाभाविक जिज्ञासा थी, इतना बड़ा वैज्ञानिक, देश का राष्ट्रपति, वर्षों तक सर्वोच्च पदों पर रहने वाला व्यक्ति आखिर कितनी संपत्ति छोड़कर गया होगा? लेकिन जब उनका कमरा खोला गया, तो वहाँ जो मिला, उसने सबको स्तब्ध कर दिया। न कोई तिजोरी, न कोई महंगी कार, न कोई आलीशान संपत्ति। बस कुछ साधारण कपड़े, एक पुरानी घड़ी, एक लैपटॉप, एक वीणा, और लगभग 2500 किताबें। यही थी उस महान व्यक्ति की पूरी संपत्ति।


सोचिए दोस्तों… जिस व्यक्ति के एक निर्णय से देश की दिशा बदल सकती थी, जिसके पास अपार शक्ति और अवसर थे, उसने अपने लिए कुछ भी जमा नहीं किया। क्यों? क्योंकि उन्होंने जीवन को “संग्रह” के रूप में नहीं, “सेवा” के रूप में जिया। उन्होंने अपनी कमाई, अपनी ऊर्जा, अपना समय; सब कुछ देश और समाज को समर्पित कर दिया। उन्होंने कभी यह नहीं सोचा कि मुझे और क्या चाहिए, उन्होंने हमेशा यह सोचा कि मैं और क्या दे सकता हूँ।


दोस्तों, आज हम छोटी-छोटी चीज़ों में अपनी अमीरी ढूँढते हैं, महंगे कपड़े, ब्रांडेड चीज़ें, दिखावा। लेकिन सच्चाई यह है, असली अमीरी चीज़ों में नहीं, विचारों में होती है। आपके पास कितना है, यह आपको बड़ा नहीं बनाता, आप कितना बाँट सकते हैं, यह आपको महान बनाता है। डॉ. कलाम ने हमें यह सिखाया कि जीवन का उद्देश्य केवल खुद के लिए जीना नहीं है, बल्कि दूसरों के जीवन में रोशनी बनना है।


आज अगर आपके पास रहने के लिए एक छत है, पहनने के लिए कपड़े हैं, और खाने के लिए भोजन है, तो आप वास्तव में बहुत अमीर हैं। लेकिन सवाल यह है, “क्या आपके पास उतना बड़ा दिल है, जितना उस महान व्यक्ति का था?”


दोस्तों, जीवन की असली परीक्षा यह नहीं है कि आपने कितना कमाया, बल्कि यह है कि आपने कितना योगदान दिया क्योंकि अंत में, आपके बैंक अकाउंट की संख्या नहीं याद रखी जाएगी; आपके विचार, आपके कर्म और आपका प्रभाव याद रखा जाएगा।


इसलिए आज से एक छोटा सा संकल्प लीजिए, थोड़ा कम दिखावा, थोड़ा ज्यादा योगदान क्योंकि इंसान अपनी हैसियत से नहीं, अपनी सोच और अपने कर्मों से बड़ा होता है और यही सच्ची अमीरी है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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