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दिखावे से नहीं, संकल्प से बनती है ज़िंदगी…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • 14 minutes ago
  • 3 min read

Apr 2, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, ग़लत धारणाओं के साथ जीवन जीना ही हमारे जीवन को चुनौतीपूर्ण बनाता है। जैसे अक्सर हम अपने जीवन को किसी व्यक्ति, किसी परिस्थिति आदि से जोड़ कर, या यूँ कहूँ बाँध कर देखते हैं, जबकि जीवन कभी किसी से बँधा नहीं होता। बँधे हुए तो इंसान की उम्मीद, आशा, भावना और विश्वास होते है। जिसकी वजह से आज के युग में इंसान जीवन को जीने से ज्यादा, दिखाने में व्यस्त हो गया है। इसी तरह से हम जीवन को बेहतर बनाने से ज्यादा, बेहतर दिखाने में व्यस्त हैं। आज इंसान सोशल मीडिया पर तो खुश नजर आता है, लेकिन अंदर से बेचैन रहता है। बाहरी दुनिया को वो अपनी सफलता की तस्वीर दिखाता है, लेकिन हक़ीक़त में अपने भीतर अधूरापन महसूस करता है। मेरी नज़र में यह इंसान के जीवन की सबसे बड़ी विडंबना है।


यकीन मानियेगा दोस्तों, यह दौड़ बहुत खतरनाक है क्योंकि इसमें हम दूसरों को प्रभावित करने के चक्कर में खुद से दूर होते जाते हैं। इसलिए मेरी नजर में “लोग आपको कितना अच्छा मानते हैं”, से ज़्यादा जरूरी सवाल यह है कि आप खुद को कितना सच्चा मानते हैं। याद रखिएगा, दिखावा कुछ समय के लिए लोगों को प्रभावित कर सकता है, लेकिन जीवन में असली बदलाव केवल सच्चे प्रयास से आता है।


इसी बात को आप आदरणीय नारायण मूर्ति जी के जीवन से बेहतर तरीके से समझ सकते हैं। देश और दुनिया की सबसे सफल आईटी कंपनी स्थापित करने के बाद भी उन्होंने कभी शोर नहीं मचाया, कभी दिखावे का सहारा नहीं लिया। बस एक मजबूत संकल्प के साथ, ईमानदारी और सादगी से काम करते रहे। जिसके परिणामस्वरुप उन्होंने एक सफल कंपनी बनाने के साथ-साथ ऐसा उदाहरण भी स्थापित किया, जहाँ मूल्य और चरित्र, सफलता से बड़े हो जाते हैं।


दोस्तों, लक्ष्य छोटा या बड़ा होने से ज़्यादा यह मायने रखता है कि आपका संकल्प कितना बड़ा है। याद रखियेगा, मजबूत संकल्प के साथ बड़े से बड़े लक्ष्य को भी हासिल किया जा सकता है और कमजोर संकल्प के साथ छोटे लक्ष्य भी अधूरे रह जाते हैं। आज कई युवा बिना संघर्ष किए जल्द सफल होना और बिना संघर्ष के पहचान बनाना चाहते हैं। दूसरे शब्दों में कहूँ तो बिना मेहनत के परिणाम चाहते हैं, जो कतई संभव नहीं है।


दोस्तों, सफलता दिखावे से नहीं, निरंतर प्रयास और सच्चे इरादों से मिलती है। इसलिए अगर आप सच में जीवन में आगे बढ़ना चाहते हैं, तो दूसरों को दिखाने के बजाय, खुद को बदलने पर ध्यान दीजिए। हर दिन खुद से एक सवाल पूछिए, “क्या मैं रोज़ अपने बीते हुए कल से बेहतर बन रहा हूँ?” अगर जवाब “हाँ” में आए, तो आप सही रास्ते पर हैं और अगर जवाब “ना” या “नहीं” है, तो आपको दिखावा छोड़ कर, दिशा बदलने की जरूरत है।


दोस्तों, जीवन में रिश्ते, उम्मीदें और भावनाएँ जरूरी हैं, लेकिन उनसे बंध जाना नहीं क्योंकि जब हम दूसरों से बहुत ज्यादा उम्मीदें जोड़ लेते हैं, तो हम खुद की शक्ति को कमजोर कर देते हैं। इसलिए खुद पर विश्वास रखिए, अपने संकल्प को मजबूत बनाइए और अपने जीवन को सच्चाई के साथ जीना शुरू कीजिए।


याद रखिएगा, दिखावे की वजह से लोग आपको कुछ समय के लिए सराह सकते हैं, लेकिन असल जीवन में आत्म-सम्मान ही आपको जीवनभर सम्भालता है। इसलिए दिखावे की दुनिया से बाहर निकलकर सच्चाई की राह चुनिए क्योंकि अंत में जीवन को बड़ा बनाने के लिए, दिखावे का नहीं, बड़े संकल्प का होना जरूरी है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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