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आशा ही जीवन की असली ऊर्जा है !!!

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • 2 days ago
  • 3 min read

Mar 23, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, चलिए एक प्रश्न का जवाब दीजिए, “जीवन की सबसे बड़ी ताकत क्या है? धन, शक्ति, सुविधा, या कुछ और?” चलिए अपने जवाब को मन में रखिए और इस विषय को एक नए नजरिये से समझिए। रोजमर्रा के जीवन में हम अक्सर मान लेते हैं कि अच्छा भोजन, आराम या भौतिक साधन ही जीवन को टिकाए रखते हैं। लेकिन सच इससे कहीं गहरा है, जिसे आज हम एक सरल-सी कहानी से समझने का प्रयास करते है।


एक गाँव में चार बुजुर्ग महिलाएँ आपस में बहस कर रही थी। विषय था, चारों में सबसे बड़ा कौन? जब काफ़ी विवाद के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे चारों पास ही रहने वाली एक समझदार नई बहू के पास पहुँचीं और उससे निर्णय करने को कहा। बहू ने पहले तो मुस्कुराकर सभी का अभिवादन किया, फिर सबको अपना परिचय देने के लिए कहा।


पहली महिला बोली, “मैं भूख हूँ, यहाँ मुझसे बड़ा कोई नहीं है।” बहू ने शांत स्वर में कहा, “भूख महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन इसका विकल्प है। स्वादिष्ट व्यंजनों से भी भूख मिटती है और साधारण रोटी से भी।” नई बहू के उत्तर को सुन दूसरी बुजुर्ग महिला बोली, “मैं प्यास हूँ और यहाँ मैं सबसे बड़ी हूँ।” बहू ने पूर्व की तरह एकदम शांति के साथ उत्तर देते हुए कहा, “प्यास भी महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका भी विकल्प है। स्वच्छ जल से भी प्यास बुझती है और मजबूरी में साधारण पानी से भी।” तभी तीसरी बुजुर्ग महिला बोली, “मैं नींद हूँ और मैं सबसे बड़ी हूँ।” बहू मुस्कुराई और बोली, “नींद भी आवश्यक है, लेकिन इसका भी विकल्प है। आरामदायक बिस्तर पर भी नींद आती है और कठिन परिस्थितियों में जमीन पर भी।” अंत में चौथी महिला आगे बढ़ी और पूर्ण शांति के साथ बोली, “मैं आशा हूँ…”, वह इसके आगे कुछ कहती उससे पहले ही नई बहू कुछ कदम आगे बढ़ी और उनके चरण छूकर बोली, “हाँ, आप सबसे बड़ी हैं क्योंकि भूख, प्यास और नींद का कोई न कोई विकल्प हो सकता है, लेकिन आशा का कोई विकल्प नहीं है। आशा टूट जाए, तो जीवन भी टूट जाता है।”


दोस्तों, अब यह कहने की जरूरत ही नहीं है कि आशा ही जीवन की असली ऊर्जा है; जीवन का सबसे बड़ा सत्य है। जब तक मन में आशा होती है, तब तक इंसान कठिन से कठिन परिस्थिति में भी टिक जाता है। वह गिरता है, लेकिन टूटता नहीं। वह हारता है, लेकिन रुकता नहीं। लेकिन जिस दिन आशा खत्म हो जाती है, उसी दिन जीवन की दिशा भी धुंधली हो जाती है।

दोस्तों, आशा की इस शक्ति से अपने जीवन को संवारने का प्रेरणादायक उदाहरण हेलेन किलर हैं।


हेलेन किलर ने मात्र 19 माह की उम्र में अज्ञात बीमारी के कारण देखने और सुनने की क्षमता को खो दिया था। लेकिन इसके बाद भी उन्होंने ना तो हार मानी और ना ही किसी को दोष दिया। याने उन्होंने अपनी सीमाओं को अपनी पहचान नहीं बनने दिया और आशा व विश्वास के बल पर न केवल शिक्षा प्राप्त की, बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा बन गईं। उन्होंने एक बार कहा था, “अंधकार से भी बड़ा दुख यह है कि आपके पास कोई दृष्टि ही न हो।”


दोस्तों, यही बात हमारे जीवन पर भी लागू होती है। अगर आपके पार संसाधन कम हों तो भी जीवन चल सकता है, लेकिन जीवन में आशा ही ना हो, तो जीवन का चलना असंभव है। इसलिए इंसान के जीवन की सबसे मूल्यवान चीज ‘आशा’ है। याद रखियेगा दोस्तों, परिस्थितियाँ बदलती रहेंगी, लोग बदलते रहेंगे, समय भी बदलता रहेगा, लेकिन अगर आपके भीतर आशा और विश्वास जीवित है, तो आप हर परिस्थिति से सकुशल निकलने की शक्ति रखते हैं।


दोस्तों, आशा वह दीपक है, जो अंधेरे में भी रास्ता दिखाता है और जिसके भीतर यह दीपक जलता है, उसका जीवन कभी अंधकारमय नहीं होता। इसलिए हर हाल में मुस्कुराइए और ईश्वर पर विश्वास रखिए क्योंकि जब तक आशा है, तब तक हर हार में आपको एक नई शुरुआत छिपी मिलेगी।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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