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करें कोशिश अपनी आखरी साँस तक…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • 12 minutes ago
  • 3 min read

Feb 7, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, आज मैं आपसे एक ऐसी सच्ची घटना साझा करना चाहता हूँ, जो डर, अकेलेपन और अनिश्चितता के बीच इंसान की इच्छाशक्ति और उसकी अद्भुत ताक़त को उजागर करती है। हालांकि मैं इस किस्से की सत्यता के विषय में सीधे तौर पर तो कुछ कह नहीं सकता हूँ क्योंकि व्हाट्सएप पर किसी मित्र के द्वारा साझा की गई एक पोस्ट के माध्यम से ही मुझे इस विषय में पता पड़ा। पर मेरा मानना है कि इंसान अपनी हिम्मत और इच्छाशक्ति से मुश्किल से मुश्किल स्थितियाँ का सामना कर सकता है। इसलिए ही मैं इस किस्से को सही मान आपसे साझा कर रहा हूँ।


बात वर्ष 2019 की है। एक युवती हवाई द्वीप के माउई इलाके के घने जंगलों में उस स्थान पर रास्ता भटक गई, जहाँ ना तो मोबाइल नेटवर्क था और ना ही फोन चार्ज करने की सुविधा। इतना ही नहीं उसके पास ना तो खाने के लिए कोई खाद्य पदार्थ था और ना ही पीने के लिए पानी। अगर वहाँ कुछ था तो बस चारों ओर अनजान जंगल, ऊँचे पेड़, और अजनबी आवाज़ें। स्थिति कुछ इस तरह डरावनी थी कि उस क्षण डरना, घबराना या हार मान लेना हिम्मत रखने से आसान था। लेकिन अपनी अदम्य इच्छाशक्ति के चलते उसने निर्णय लिया कि, “मैं हार नहीं मानूँगी।”


दिन बीतते गए पर अपनी इसी अदम्य इच्छाशक्ति के बूते पर उसने हर दिन रास्ता खोजने का प्रयास जारी रखा। हालाँकि हर सुबह वह यह नहीं जानती थी कि वो शाम देख पाएगी या नहीं। पर उसने जंगली बेरियाँ खाकर और झरनों का पानी पीकर उसने खुद को जीवित रखा। साथ ही उसने हर कदम सोच-समझकर रखा, क्योंकि एक गलत कदम उसके जीवन का आख़िरी कदम भी हो सकता था। कुल मिलाकर कहूँ तो हर दिन उसके लिए ज़िंदगी और मौत के बीच की लड़ाई थी। लेकिन उसने उम्मीद नहीं छोड़ी।


इस दौरान जंगल ने उसे डराया, लेकिन उसने डर को अपना मालिक नहीं बनने दिया। थकान ने उसे घेरा, लेकिन उसने रुकने से इनकार कर दिया। अकेलेपन ने उसे तोड़ने की कोशिश की, लेकिन उसने खुद से संवाद करना सीख लिया। दिन बीतते गए और फिर आया सत्रहवाँ दिन। याने वह दिन जब एक हेलिकॉप्टर की नज़र झरने के पास बैठे उस छोटे से साहसी अस्तित्व पर पड़ी और वहीं, ज़िंदगी ने उसे फिर से गले लगा लिया।


दोस्तों, इसे आप किस्मत या संयोग कह सकते हैं, लेकिन सच्चाई यह है, अगर उसने पहले दिन ही हार मान ली होती, तो सत्रहवें दिन कोई चमत्कार नहीं होता। यह कहानी हमें एक सीधी और गहरी सीख देती है, हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, इंसान की इच्छाशक्ति उससे कहीं ज़्यादा ताक़तवर होती है।


हममें से ज़्यादातर लोग जंगल में नहीं, लेकिन जीवन में खो जाते हैं। कोई आर्थिक दबाव में, कोई रिश्तों की उलझन में, कोई असफलता के डर में, तो कोई भविष्य की चिंता में और फिर हममें से कुछ लोग कहते हैं; “अब और नहीं हो पाएगा।”; “मेरी किस्मत ही खराब है।”; “मेरे हालात ही ऐसे हैं।” लेकिन याद रखिए, जंगल में फँसी उस लड़की के हालात हमसे कहीं ज़्यादा कठिन थे। फिर भी उसने कोशिश नहीं छोड़ी।


दोस्तों, हिम्मत का मतलब यह नहीं होता कि डर नहीं लगता। हिम्मत का मतलब होता है, डर लगने के बावजूद आगे बढ़ते रहना। उम्मीद का मतलब यह नहीं होता कि सब ठीक दिख रहा है। उम्मीद का मतलब होता है, जब कुछ भी ठीक न दिखे, तब भी विश्वास बनाए रखना।


दोस्तों, आज अगर आप किसी संघर्ष से गुजर रहे हैं, और आपको आगे का रास्ता नजर नहीं आ रहा है या आप ख़ुद को थका हुआ महसूस कर रहे हैं, तो बस इतना याद रखिएगा, आज हार मान लेना सबसे आसान रास्ता है, लेकिन एक दिन और टिके रहना ही आपकी ज़िंदगी बदल सकता है क्योंकि आप नहीं जानते कि आपका “हेलिकॉप्टर” किस दिन, किस मोड़ पर, आपको ढूँढ ले। इसलिए हिम्मत मत छोड़िए और बस उम्मीद थाम कर एक-एक कदम चलते रहिए क्योंकि जो आख़िरी साँस तक कोशिश करता है, ज़िंदगी अक्सर उसी को बचाती है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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