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जिएँ कुछ इस तरह...

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • 3 days ago
  • 2 min read

Feb 5, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, आज मैं आपसे सफलता की ऊँचाइयों की नहीं, बल्कि जीवन की गहराई की बात करना चाहता हूँ। उस गहराई की, जहाँ इंसान को सबसे बड़ी प्रेरणा मिलती है। और वह प्रेरणा बाहर से नहीं आती—वह तब जन्म लेती है, जब हमें यह एहसास होता है कि हम स्वयं किसी और के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।


हम अक्सर सोचते हैं कि हमें क्या मिला, किसने हमें क्या दिया, और हमने क्या हासिल किया। लेकिन जीवन का असली सौंदर्य वहाँ प्रकट होता है, जहाँ हम समझते हैं, “हम जो पाते हैं, उससे जीवनयापन होता है, और जो हम देते हैं, उससे जीवन बनता है।” आपका एक शब्द, एक मुस्कान, एक समय पर दी गई मदद; किसी के जीवन में आशा का बीज बो सकती है। आपको पता भी नहीं चलता और कोई आपको देखकर हिम्मत जुटा लेता है।


ज़िंदगी को समझने के लिए एक बहुत सरल बागवानी का नियम याद रखिए, हर पौधा हर जगह नहीं बढ़ता। कुछ पौधे खुले वातावरण में पनपते हैं, जहाँ हवा, धूप और जगह मिलती है और कुछ पौधे घुटन में मुरझा जाते हैं। यही नियम जीवन पर भी लागू होता है। अपने आप को उन लोगों के पास लगाइए जो आपको खुलकर साँस लेने दें, जो आपकी बात सुनें, जो आपकी कोशिशों को सम्मान दें, जो आपकी वृद्धि देखकर खुश हों। उनके पास नहीं, जो आपकी उड़ान को शक की नज़र से देखें, जो आपकी तरक्की से असहज हो जाएँ, और जो आपकी ऊर्जा को धीरे-धीरे निचोड़ लें। याद रखिए, गलत वातावरण में रहकर सबसे मजबूत व्यक्ति भी कमजोर पड़ सकता है।


इतिहास कहता है, कल सुख था। विज्ञान कहता है, कल सुख होगा। लेकिन धर्म हमें एक बहुत ही व्यावहारिक सत्य सिखाता है, अगर मन सच्चा है और दिल अच्छा है, तो सुख रोज़ हो सकता है। सुख कोई भविष्य की वस्तु नहीं है। सुख कोई बीती हुई याद नहीं है। सुख एक अवस्था है—जो इसी क्षण में पाई जा सकती है। जब आप ईमानदारी से जीते हैं, जब आप किसी का अहित नहीं करते, जब आप अपने भीतर बोझ नहीं पालते, तब सुख किसी वजह का मोहताज नहीं रहता।


फरवरी महीने का नाम एक रोचक बात याद दिलाता है। रोमन सभ्यता में फरवरी को ‘Februa’ कहा जाता था, जिसका अर्थ था शुद्धिकरण का समय। यह महीना केवल मौसम बदलने का संकेत नहीं देता, यह हमें याद दिलाता है कि विचारों को भी समय-समय पर शुद्ध करना ज़रूरी है। पुरानी शिकायतें, अनावश्यक तुलना, ईर्ष्या, और नकारात्मक सोच, ये सब मन को बोझिल बना देती हैं। आइए, इस महीने एक छोटा-सा संकल्प लें, हम अपने विचारों को साफ करेंगे। हम अनावश्यक नकारात्मकता को छोड़ेंगे। हम अपने भीतर जगह बनाएँगे, करुणा के लिए, कृतज्ञता के लिए और सच्चे सुख के लिए।


दोस्तों, जब आप बेहतर इंसान बनने का प्रयास करते हैं, तो आप अनजाने में ही किसी और के लिए रास्ता रोशन कर देते हैं और यही जीवन की सबसे सुंदर सच्चाई है, आप स्वयं किसी की सबसे बड़ी प्रेरणा हो सकते हैं। इसलिए अच्छा सोचिए, अच्छा दीजिए, और सही लोगों के बीच रहिए क्योंकि जीवन वही खिलता है, जहाँ उसे खुलकर साँस लेने की जगह मिलती है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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