क्या आपने कभी अपनी खुशियों का हिसाब लगाया है?
- Nirmal Bhatnagar

- 3 days ago
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July 14, 2026
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, यदि मैं आपसे पूछूँ कि पिछले एक वर्ष में आपको किन-किन परेशानियों का सामना करना पड़ा, तो शायद आप बिना रुके कई बातें गिना देंगे। लेकिन यदि मैं आपसे पूछूँ कि पिछले एक वर्ष में आपको कितनी खुशियाँ मिलीं; कितने लोगों ने आपका साथ दिया; कितने अच्छे अवसर मिले और कितनी बार जीवन ने आपको मुस्कुराने का कारण दिया, तो शायद आपको कुछ पल सोचना पड़ेगा। मेरी नजर में यही हमारे जीवन की सबसे बड़ी भूल है। शायद इसीलिए प्रख्यात रूसी साहित्यकार फ़्योदोर दोस्तोयेव्स्की ने कहा था, “मनुष्य अपनी परेशानियों की गिनती तो करता है, लेकिन अपनी खुशियों का हिसाब नहीं रखता।”
दोस्तों, वास्तव में हमारा जीवन उतना दुखी नहीं होता, जितना हमारा मन उसे बना देता है। हम एक छोटी-सी असफलता को बार-बार याद करते हैं, लेकिन सौ छोटी-छोटी सफलताओं को सामान्य मानकर भूल जाते हैं। हम एक आलोचना को दिल में बसा लेते हैं, लेकिन दस प्रशंसाओं को हवा की तरह गुजर जाने देते हैं। इसी वजह से बीतते समय के साथ हमारा मन धीरे-धीरे केवल कमी देखने का आदी हो जाता है और यहीं से हमारे विचारों की दिशा भी तय हो जाती है। प्रसिद्ध लेखिका लुई हे का कहना है, “यदि आपके विचार नकारात्मक हैं, तो आप अपनी ही नकारात्मकता के समुद्र में डूब सकते हैं। लेकिन यदि आपके विचार सकारात्मक हैं, तो यही जीवन का समुद्र आपको तैरना सिखा देता है।” यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि दोनों ही स्थितियों याने नकारात्मक और सकारात्मक विचारों के बीच परिस्थितियाँ वही रहती हैं, लेकिन विचारों के कारण उन्हें देखने का दृष्टिकोण बदल जाता है। दो लोग एक ही कठिनाई से गुजरते हैं। एक व्यक्ति शिकायत करता है, दूसरा सीख खोजता है। एक हार मान लेता है, दूसरा नया रास्ता बना लेता है। अंतर केवल विचारों का होता है।
दोस्तों, जीवन का एक गहरा सत्य और है, जिसे हम अक्सर देर से समझते हैं। हम अपनी सफलताओं का श्रेय अक्सर बड़े अवसरों और बड़े लोगों को देते हैं, लेकिन उन शांत लोगों को भूल जाते हैं जो बिना किसी अपेक्षा के हमारे जीवन को सम्भाले रखते हैं। उदाहरण के लिए वे शिक्षक जिन्होंने हम पर विश्वास किया; वे मित्र जिन्होंने कठिन समय में केवल इतना कहा, “चिंता मत करो मैं तुम्हारे साथ हूँ…”, वे माता-पिता जिन्होंने अपनी इच्छाएँ छोड़कर हमारे सपनों को पूरा किया; वह सहकर्मी जिसने बिना नाम चाहे हमारी मदद की।
दोस्तों, ऐसे लोग अक्सर मंच पर दिखाई नहीं देते, लेकिन हमारे जीवन की मजबूत नींव वही होते हैं। याद रखिएगा, एक इमारत केवल उसकी सुंदर दीवारों से मजबूत नहीं बनती, उसकी मजबूती तो उस नींव पर निर्भर करती है जो दिखाई नहीं देती। ठीक वैसे ही हमारे जीवन में भी कुछ लोग ऐसे होते हैं जो प्रसिद्ध नहीं होते, लेकिन उनके बिना हमारा आत्मविश्वास, हमारा साहस और हमारी सफलता अधूरी रह जाती।
दोस्तों, अगर आप सकारात्मकता और कृतज्ञता के भाव के साथ जीवन जीना चाहते हैं तो आज से एक नई आदत शुरू कीजिए और हर रात सोने से पहले तीन बातों का हिसाब रखिए; पहली, आज मुझे कौन-सी खुशी मिली? दूसरी, आज मैंने कौन-सा अच्छा विचार चुना? और तीसरी, आज किस व्यक्ति ने मेरे जीवन को थोड़ा बेहतर बनाया? इसके पश्चात ईश्वर, माता-पिता, परिवार और उन लोगों का धन्यवाद कीजिए जो रोज आपके जीवन को आसान और बेहतर बना रहे हैं। याद रखियेगा, कृतज्ञता केवल सामने वाले को सम्मान नहीं देती, वह हमारे भीतर भी सकारात्मकता का एक नया स्रोत खोल देती है।
दोस्तों, सुखी जीवन का रहस्य उपलब्ध सुविधाओं में नहीं, बल्कि सकारात्मकता, ख़ुशियों को पहचानने की क्षमता और उन अनदेखे लोगों का सम्मान करने में भी है, जो चुपचाप हमारे जीवन की नींव बने हुए हैं। याद रखियेगा, जीवन में दुख गिनने वाले हमेशा अभाव में रहते हैं, लेकिन खुशियाँ गिनने वाले हर परिस्थिति में समृद्ध रहते हैं।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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