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क्या हम अपने जीवन के मालिक हैं?

Writer: Nirmal Bhatnagar
Nirmal Bhatnagar
11 minutes ago
3 min read

Sep 14, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, मित्र द्वारा विरोधी से अच्छा व्यवहार करने की मिली सलाह पर रामू चिढ़ते हुए बोला, “जब वो मुझसे अच्छा व्यवहार नहीं कर सकता, तो मैं उसके साथ अच्छा व्यवहार क्यों करूँ?” मित्र मुस्कुराते हुए बोला, “अगर कोई तुम्हारे ऊपर कीचड़ उछाल दे, तो क्या तुम भी अपने हाथ ख़राब कर उसके ऊपर कीचड़ फेंकेंगे?” “बिल्कुल नहीं,” रामू ने कहा। जवाब सुन मित्र मुस्कुराते हुए बोला, “फिर उसके व्यवहार को अपनी पहचान क्यों बनने देते हो?”


बात छोटी सी थी, लेकिन जीवन का एक बहुत बड़ा सत्य अपने भीतर समेटे हुए थी। हमारे लिए अच्छे लोगों के साथ अच्छा रहना बहुत आसान है। सामान्यतः जो हमें सम्मान देता है, हम उसका सम्मान करते हैं। जो हमसे प्रेम से बात करता है, हम भी उससे प्रेम से बात करते हैं। जो हमारी मदद करता है, हम भी उसकी मदद करने के लिए तैयार रहते हैं। लेकिन असली परीक्षा तब होती है, जब सामने वाला हमसे रूखा व्यवहार करने लगे; हमारी उपेक्षा करने लगे या फिर हमारी अच्छाई को हमारी कमजोरी समझने लगे याने बिना वजह किसी ना किसी तरह की चोट पहुँचाने लगे। ऐसी स्थिति में हमारे भीतर “जैसे को तैसा” जवाब देने का भाव उठने लगता है और हम ख़ुद से ही कहने लगते हैं कि “पहले वह अपना व्यवहार सुधारे, फिर मैं भी उसके साथ अच्छा रहूँगा।”


दोस्तों, यही वह क्षण होता है, जहाँ हमें रुककर सोचना चाहिए क्योंकि इस स्थिति में हम कहीं ना कहीं अपना कंट्रोल सामने वाले के हाथों में दे रहे होते हैं। आप स्वयं सोच कर देखिए अगर किसी अन्य के गुस्से से हमारा गुस्सा तय होता है या किसी का कड़वाहट से भरा व्यवहार हमारी कड़वाहट तय करता है या फिर किसी दूसरे का व्यवहार, हमारा व्यवहार तय करता है, तो फिर हम अपने जीवन के मालिक कहाँ रहे? यह तो इतना ही बताता है कि हमने अपने व्यवहार की चाबी किसी और के हाथ में दे रखी है। इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि हम हर गलत व्यवहार सहते रहें। जहाँ जरूरी हो, वहाँ स्पष्ट सीमाएँ बनाना आवश्यक है. इसलिए गलत का विरोध कीजिए। उनसे दूरी बनाइए। लेकिन किसी की नकारात्मकता को अपने भीतर घर मत बनाने दीजिए। याद रखिए सामने वाले का गलत व्यवहार उसकी कहानी बताता है और आपका व्यवहार आपकी कहानी।


दोस्तों, अगर आप स्वयं अपने जीवन के मालिक बनना चाहते हैं तो आज से एक अलग दृष्टिकोण अपनाकर देखिए। जब भी कोई आपको परेशान करे, तो ख़ुद से यह मत पूछिए, “उसने मेरे साथ ऐसा क्यों किया?” बल्कि ख़ुद से पूछिये कि “इस परिस्थिति में मैं अपने सर्वोत्तम रूप में कैसे रह सकता हूँ?” यह छोटा-सा प्रश्न आपकी पूरी प्रतिक्रिया बदल सकता है। याद रखिएगा, हर व्यक्ति में कुछ न कुछ अच्छा होता है। कोई धैर्यवान होता है तो कोई साहसी, कोई मेहनती होता है तो कोई संवेदनशील। अगर हम हर इंसान से कुछ ना कुछ सीखने का प्रयास करेंगे तो हमारी सामान्य मुलाकातें भी हमारे व्यक्तित्व को समृद्ध करने लगेंगी। इसलिए व्यक्ति कोई भी क्यों ना हो उससे सीखने का प्रयास कीजिए। अगर किसी में अच्छाई दिखे, तो उसे अपनाइए। अगर गलती दिखे, तो उससे सीखिए। किसी की कठोरता दिखे, तो अपनी विनम्रता को और मजबूत बनाइए। और सबसे महत्वपूर्ण, किसी के बुरे व्यवहार के कारण अपने भीतर की अच्छाई को मत मारिए। क्योंकि सामने वाला जैसा भी है, वह उसका चुनाव है। लेकिन उसके जैसा बन जाना, निश्चित तौर पर आपका चुनाव है।


दोस्तों, जीवन में बहुत से लोग आपको बदलने की कोशिश करेंगे। कोई अपने गुस्से से, कोई अपनी आलोचना से, कोई अपनी उपेक्षा से और कोई अपने अहंकार से। लेकिन आपको हर बार प्रतिक्रिया देने की जरूरत नहीं है। कभी-कभी सबसे शक्तिशाली जवाब यही होता है कि आप अपने मूल्यों से एक कदम भी पीछे न हटें। याद रखिएगा लोगों के गलत व्यवहार के बाद भी, आप कैसे बने रहे, यही आपके चरित्र की सबसे बड़ी परीक्षा है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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