चुनौतियाँ जीवन का संगीत हैं !!!
- Nirmal Bhatnagar

- 2 hours ago
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Jan 16, 2026
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

आइए दोस्तों, आज के शो की शुरुआत एक कहानी से करते हैं. कई साल पहले एक थका हुआ सिपाही अपने प्यासे घोड़े के साथ एक लंबे सूने, रेगिस्तान से गुजर रहा था। रास्ते में कड़क धूप के कारण सिपाही और घोड़े दोनों को पानी की सख़्त जरूरत थी। काफी तलाश के बाद उन्हें एक बूढ़े किसान का खेत दिखा, जहाँ कुएँ में से पानी निकालने वाला काफ़ी पूराना यंत्र ‘रहट’ चल रहा था। रहट कुएँ में से पानी तो ला रहा था, लेकिन साथ ही लगातार एक तेज़, आवाज़ करता जा रहा था, “ठक-ठक… ठक-ठक…”
घोड़ा उस आवाज़ से डर गया और पानी पीने के स्थान पर थोड़ा पीछे हट गया। यह देख सिपाही ने किसान से कहा, “काका, क्या आप थोड़ी देर के लिए यह आवाज़ रोक सकते हैं? मेरा घोड़ा डर रहा है।” सिपाही की बात सुन किसान ने मुस्कुरा कर जो जवाब दिया, वही हमारी ज़िंदगी की असली सीख बन सकता है। वह बोला, “बेटा, अगर मैं यह ‘ठक-ठक’ रोक दूँ, तो पानी भी रुक जाएगा। अगर घोड़े को प्यास बुझानी है, तो उसे इसी शोर के बीच पानी पीना सीखना होगा।” ये बात सुनकर सिपाही समझ गया। उसने घोड़े को शांत किया, धीरज दिलाया और आखिरकार घोड़े ने उसी शोर के बीच अपनी प्यास बुझा ली।
दोस्तों, हमारी ज़िंदगी भी बिलकुल ऐसे ही चलती है। हममें से ज्यादातर लोग सोचते हैं कि जब सब कुछ शांत हो जाएगा, जब जीवन की सभी समस्याएं दूर हो जायेंगी, जब सारे हालात अनुकूल हो जाएंगे, तब हम अपने लक्ष्य पर फोकस करेंगे। हम ‘परफेक्ट समय’ का इंतज़ार करते रहते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि जीवन की “ठक-ठक” कभी खत्म नहीं होती। कभी काम का प्रेशर, कभी परिवार की चिंता, कभी आर्थिक तनाव, कभी लोगों की बातें, कभी समय की कमी; ये सब जीवन का हिस्सा हैं। इन्हें हटाने की कोशिश में हम अपना समय, ऊर्जा और आत्मविश्वास गंवा देते हैं। असल हुनर यह नहीं है कि शोर खत्म हो, बल्कि शोर के बीच रहकर भी आगे बढ़ना। अगर प्यास बुझानी है, तो राह के शोर से दोस्ती करनी ही होगी।
तो दोस्तों, आज अपने दिन की शुरुआत इस सोच के साथ करें कि आज से मैं लोगों की बातों, समस्याओं के ख़त्म होने एवं हालात के परफेक्ट होने का इंतज़ार करने के स्थान पर, अपने समय का सही उपयोग करूँगा ओर अपना ध्यान याने अपना फ़ोकस लक्ष्य पर बनाए रखूँगा। जिससे पूर्व में की गई तैयारियों के अनुरूप, ठक-ठक के उसी शोर के बीच अपने लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाऊँगा क्योंकि जीत उसी की होती है, जो कठिनाइयों के बीच भी चलना जारी रखता है। याद रखिएगा दोस्तों, “ठक-ठक” शोर नहीं, जीवन का संगीत है, उसे समझिए, अपनाइए और आगे बढ़ते रहिए। आपका आज का दिन हमेशा की तरह शानदार रहे…
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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