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चेहरा नहीं, चरित्र देखिए !!!

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • Dec 21, 2025
  • 3 min read

Dec 21, 2025

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, हम अक्सर लोगों को उनके बाहरी रूप, पद, भाषा या प्रसिद्धि के आधार पर आँक लेते हैं। सामान्यतः जो आकर्षक दिखा, जिसने मीठे शब्द बोले, जिसने आत्मविश्वास के साथ चमक-दमक दिखाई, उसे श्रेष्ठ मान लिया जाता है। लेकिन जीवन बार-बार यह सिद्ध करता है कि व्यक्ति नहीं, उसका व्यक्तित्व मूल्यवान होता है। इस बात का एहसास मुझे कई साल पहले उस वक्त हुआ जब मेरे गुरु ने एक इंटरव्यू के दौरान रिज्यूम में एक नया शब्द ‘हॉरिज़ोंटली टॉलर’ पढ़ा, जिसका अर्थ ‘मोटा’ होना था। उन्होंने उस कैंडिडेट को इंटरव्यू के लिए तत्काल बुलाया और उससे इस विषय में पूछा। इस पर उसने कहा, ‘सर, मैं थोड़ी सी मोटी जरूर हूँ, लेकिन अनफिट नहीं। अक्सर लोग शारीरिक बनावट के आधार पर धारणा बना लेते हैं।’ जीवन के प्रति उसके नजरिये या यूँ कहूँ उसकी गहरी सोच ने ना सिर्फ़ इंटरव्यूअर का निर्णय बल्कि पूरे जीवन को देखने के नजरिये को भी बदल दिया। आइए आज हम ऐसी ही कुछ और बातों को गहराई से समझने का प्रयास करते हैं-


1. सुंदरता भरोसे की गारंटी नहीं होती

सुंदर फूलों में भी अक्सर कीड़े मिल जाते हैं। इसी तरह इंसानों में बाहरी सौंदर्य आकर्षित कर सकता है, लेकिन भीतर क्या है, वही यह तय करता है कि वह सौंदर्य टिकाऊ है या नहीं। इसी तरह बहुत से लोग दिखने में सभ्य, प्रभावशाली और सुसंस्कृत लगते हैं, लेकिन उनके भीतर अहंकार, छल या स्वार्थ भरा हो सकता है। अगर हम केवल बाहरी चमक से प्रभावित होकर निर्णय लेते हैं, तो धोखा मिलना तय है।


2. उपेक्षित पत्थरों में भी हीरे छिपे होते हैं

कई बार जीवन हमें ऐसे लोग देता है, जो साधारण दिखते हैं, शांत रहते हैं, कम बोलते हैं, और किसी भीड़ में खास नज़र नहीं आते। लेकिन जब संकट आता है; जब भरोसे की ज़रूरत होती है; जब सच्चाई की परीक्षा होती है, तब वे लोग हीरे की तरह चमकते हैं। यही वो कारण है जिसकी वजह से हमें कभी किसी को कम नहीं आंकना चाहिए। याद रखिएगा, सही व्यक्तित्व समय आने पर स्वयं प्रकट हो जाता है।


3. उपयोगिता ही असली मूल्य है

पानी कितना भी गंदा क्यों न हो, आग बुझाने का काम तो कर ही देता है। यह उदाहरण हमें सिखाता है कि पूर्णता नहीं, उपयोगिता जीवन को आगे बढ़ाती है। कोई व्यक्ति आपके जैसा नहीं सोचता; आपकी भाषा नहीं बोलता; आपकी तरह नहीं जीता, फिर भी वह किसी परिस्थिति में अत्यंत उपयोगी और विश्वसनीय हो सकता है। इसलिए लोगों को उनके योगदान और चरित्र से पहचानिए, न कि उनकी सीमाओं से।


4. व्यक्तित्व ही भरोसे की नींव है

किसी भी इंसान का व्यक्तित्व ईमानदारी, दया, निष्ठा, संयम, और संकट में साथ खड़े रहने की क्षमता आदि से बनता है। यही गुण किसी इंसान को बड़ा भी बनाते हैं। याद रखियेगा, पद, रूप और प्रसिद्धि समय के साथ बदल जाते हैं, लेकिन व्यक्तित्व जीवन भर साथ रहता है। जब आप व्यक्तित्व पर ध्यान देना सीख लेते हैं, तो आपके रिश्ते गहरे होते हैं, निर्णय सही होते हैं, और जीवन में पछतावे कम हो जाते हैं।


दोस्तों, जब आप व्यक्ति नहीं, व्यक्तित्व देखते हैं, तब आप किसी से जल्दी प्रभावित नहीं होते, आप सही लोगों को चुनते हैं; आप धोखा खाने से बच जाते हैं और साथ ही आप दूसरों को भी सम्मान देना सीखते हैं और सबसे बड़ी बात, आप खुद भी अपने व्यक्तित्व को निखारने लगते हैं। दूसरे शब्दों में कहूँ तो जब आप समझ जाते हैं कि लोग आपको आपकी बातों से नहीं, आपके आचरण से पहचानते हैं, तो आप भीतर से बेहतर बनने लगते हैं।


अंत में इतना ही कहूँगा कि जीवन में चमक नहीं, स्थिरता चुनिए क्योंकि चमक क्षणिक होती है, पर चरित्र स्थायी होता है। सुंदर फूलों की खुशबू जल्दी उड़ जाती है, लेकिन हीरे की चमक युगों तक रहती है। इसलिए अगली बार जब किसी को आँकें—
तो चेहरे नहीं, पद नहीं, दिखावा नहीं, उसके व्यक्तित्व को देखिए। यही सोच आपको गलत फैसलों से बचाएगी और जीवन को सचमुच बदल देगी।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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