जिंदगी पहले से ही बहुत खूबसूरत है…

Oct 11, 2026
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, कभी गौर किया है कि हमारी जिंदगी में अच्छा बहुत कुछ होता है, फिर भी हमारी बातचीत में शिकायतों की जगह ज्यादा क्यों होती है? सुबह की एक अच्छी खबर हमें कुछ देर खुश करती है, लेकिन दिन में हुई एक छोटी-सी परेशानी पूरे दिन का मूड बिगाड़ देती है। कोई हमारी दस खूबियों की तारीफ करे, लेकिन एक कमी बता दे तो हमारा ध्यान उसी कमी पर टिक जाता है। शायद हमने जिंदगी में मुश्किलों को गिनने की आदत तो बना ली है, लेकिन ब्लेसिंग्स को गिनना भूल गए हैं। ई. डबल्यू. होव ने इसी बात को समझाते हुए एक बहुत खूबसूरत बात कही है, “एक व्यक्ति अपनी अच्छी किस्मत अगले दिन भूल जाता है, लेकिन अपनी बुरी किस्मत अगले साल तक याद रखता है।” सहमत ना हों तो जरा अपने जीवन पर नजर डालिए। कितनी ही चीजें ऐसी हैं जिन्हें हम रोज पाते हैं, लेकिन उनकी मौजूदगी को सामान्य मान लेते हैं। जैसे, स्वस्थ शरीर, परिवार का साथ, मित्रों का प्रेम, काम करने का अवसर, दो वक्त का भोजन, अपने लोगों से बात करने की सुविधा, प्रकृति की सुंदरता और सबसे बढ़कर… एक और सुबह।
दोस्तों, इनमें से किसी एक चीज की कमी हो जाए, तो हमें उसकी कीमत समझ आने लगती है। लेकिन इसके बाद भी विडंबना यही है कि जो हमारे पास है, वह हमें सामान्य लगता है और जो नहीं है, वही सबसे महत्वपूर्ण दिखाई देता है। सामान्यतः हमारी नजर अक्सर उस एक चीज पर चली जाती है, जो जीवन में नहीं है और उन सौ चीजों को नजरअंदाज कर देती है जो हमारे पास हैं। मेरी इस बात का अर्थ यह कतई नहीं है कि जीवन की परेशानियों को नजरअंदाज कर दिया जाए। याद रखें, सकारात्मक सोच का मतलब यह नहीं कि समस्या को समस्या न माना जाए। इसका अर्थ है, समस्या के साथ संभावना को भी देखना। जैसे बारिश के दौरान रास्ते कीचड़ से भरे हो सकते हैं, लेकिन उसी बारिश में मिट्टी की खुशबू भी होती है। इसी तरह मुश्किल समय है तो चिंता स्वाभाविक है, लेकिन उसी समय हमारे भीतर धैर्य, साहस और सीखने की क्षमता भी जन्म ले सकती है। दृष्टिकोण का यही छोटा-सा बदलाव जीवन का अनुभव बदल देता है क्योंकि कई बार समस्या हमारी परिस्थितियों में उतनी नहीं होती, जितनी हमारी दृष्टि में होती है।
चलिए, आज एक छोटा-सा प्रयोग कीजिए। रात को सोने से पहले अपनी जिंदगी की तीन ऐसी चीजें लिखिए, जिनके लिए आप सचमुच ग्रेटफुल हैं। और हाँ, बहुत बड़ी चीजें खोजने की जरूरत नहीं है। किसी प्रिय व्यक्ति की मुस्कान, दिनभर का अच्छा संवाद, प्रकृति का सुंदर दृश्य, कोई उपलब्धि, या बस यह तथ्य कि आज आपने एक और दिन पूरी तरह जिया। ऐसा करने से धीरे-धीरे आपको महसूस होगा कि जीवन में ब्लेसिंग्स अचानक बढ़ी नहीं हैं बल्कि आपकी नजर उन्हें पहचानना सीख गई है।यही जीवन जीने की एक खूबसूरत कला है, जिसे अंग्रेजी में “काउंट योर ब्लेसिंग्स” कहते हैं।
दोस्तों, शिकायतें गिनने में जिंदगी का बहुत समय निकल जाता है। लेकिन जब हम ब्लेसिंग्स गिनना शुरू करते हैं, तो वही जिंदगी थोड़ी अधिक समृद्ध, थोड़ी अधिक सुंदर और बहुत अधिक अर्थपूर्ण दिखाई देने लगती है। याद रखिएगा, जीवन हमेशा हमारी इच्छाओं के अनुसार नहीं चलता। लेकिन हर परिस्थिति के बीच कुछ ऐसा जरूर होता है, जिसके लिए आभारी हुआ जा सकता है। इसलिए आज से केवल यह मत पूछिए, “मेरे पास क्या नहीं है?” बल्कि थोड़ा सा ठहर कर ख़ुद से यह पूछिए, “मेरे पास ऐसा क्या है, जिसे खोने के बाद मैं सबसे ज्यादा याद करूंगा?” शायद इस सवाल का जवाब ही आपको आपकी जिंदगी की असली दौलत दिखा दे।
अंत में इतना ही दोहराऊँगा कि शिकायतें गिनते-गिनते जिंदगी छोटी मत करिए। इसके स्थान पर कभी-कभी अपनी ब्लेसिंग्स भी गिनिए। शायद आपको एहसास हो जायेगा कि जिंदगी पहले से ही बहुत खूबसूरत है।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




Comments