दृष्टि बदलिए, सृष्टि अपने आप बदल जाएगी…

Oct 6, 2026
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, रविवार को दो दोस्त एक गुलाब के बगीचे में घूमने गए। वहाँ पहुँचते ही पहला व्यक्ति चारों तरफ़ देखते हुए बोला, “कितने कांटे हैं यहाँ पर…”, दूसरा व्यक्ति उसकी बात को नजरंदाज करते हुए बोला, “वाह! कितने सुंदर गुलाब हैं यहाँ!” बगीचा, गुलाब और काँटे सब वही थे, फर्क बस दो लोगों की नजरों का था। शायद इंसान का जीवन भी कुछ ऐसी ही है। किसी की पूरी जिंदगी शिकायतों में बीत जाती है, तो किसी को उन्हीं परिस्थितियों में संभावनाएँ नजर आती है। किसी को जो मिला है वह कम लगता है, तो किसी को वही चीजें जीवन के लिए पर्याप्त लगती हैं। इसी बात को एमी वैदरली ने बड़े खूबसूरत अंदाज़ में बताते हुए कहा है, “कुछ लोगों को गुलाबों का पूरा बगीचा दे दीजिए, लेकिन वे उसमें भी सिर्फ काँटे देखेंगे। इसके ठीक विपरीत किसी को एक जंगली फूल दे दीजिए, वह उसमें भी ख़ूबसूरती खोज लेगा। यही हमारी परसेप्शन, याने देखने का नजरिया होता है और शायद कृतज्ञता की शुरुआत भी यहीं से होती है। जिस व्यक्ति की नजर केवल उस चीज पर रहती है जो उसके पास नहीं है, उसके पास कितना भी हो, उसे हमेशा कुछ न कुछ कम लगेगा। लेकिन जो व्यक्ति उन चीजों को देखना सीख लेता है जो उसके पास हैं, वह छोटी-छोटी बातों में भी खुशी खोज लेता है। जैसे, सुबह की चाय; किसी अपने का फोन; बच्चे की मुस्कान; स्वस्थ शरीर; काम करने का अवसर; बिना किसी स्वार्थ के किसी के साथ खड़े होना, आदि।
दोस्तों, कृतज्ञता भौतिक संसाधनों की संख्या नहीं, लेकिन व्यक्ति की कीमत जरूर बढ़ा देती है। शायद यही वो कारण है जो ग्रेटीट्यूड और जॉय के रिश्ते को गहरा बना देता है। लेकिन हमारी नजर केवल परिस्थितियों को नहीं देखती, वह लोगों को भी देखती है। एक व्यक्ति को जब यह महसूस होता है कि उसकी मेहनत देखी जा रही है, उसका योगदान महत्वपूर्ण है और उसकी उपस्थिति की कद्र है, तो वह अक्सर अपनी जिम्मेदारी से आगे बढ़कर काम करता है और जब इस कार्य के लिए उसकी प्रशंसा की जाती है, तो वो अपेक्षाओं से आगे बढ़ कर अपना सकारात्मक योगदान देता है।
दोस्तों, इसलिए अपने आसपास के लोगों की अच्छाई को नोटिस कीजिए। किसी कर्मचारी ने अच्छा काम किया है, उसकी प्रशंसा कीजिए। किसी बच्चे ने प्रयास किया है, तो उसकी कोशिश की सराहना कीजिए। किसी साथी ने मुश्किल समय में आपका साथ दिया है, तो उसे बताइए कि उसके साथ ने आपको कैसा महसूस कराया। कई बार ऐसी छोटी-छोटी सच्ची सराहना किसी व्यक्ति के भीतर महीनों तक ऊर्जा बनाए रख सकती है।
एक सच्चाई और भी है, जिंदगी हमेशा गुलाब नहीं देती। कभी-कभी कुछ घटनाएँ हमारा दिल तोड़ देती हैं। रिश्ते टूटते हैं, विश्वास टूटता है, योजनाएँ असफल होती हैं, लोग बदल जाते हैं। उस समय लगता है कि जीवन ने हमसे बहुत कुछ छीन लिया। लेकिन बीतते समय के साथ हमें एहसास होता है कि कुछ चीजों ने हमारा दिल जरूर तोड़ा, लेकिन उसने हमारी दृष्टि ठीक कर दी। याने हमने जिस व्यक्ति को खोया, उसने शायद हमें लोगों को पहचानना सिखाया। जिस असफलता ने चोट दी, उसने शायद हमारी दिशा बदल दी। जिस धोखे ने हमें तोड़ा, उसने शायद हमें सीमाएँ तय करना सिखाया। हाँ यह भी सही है की हर दर्द अच्छा नहीं होता, लेकिन कुछ दर्द हमें पहले से अधिक स्पष्ट देखने की क्षमता जरूर दे जाते हैं और यही दृष्टि हमें जीवन का एक महत्वपूर्ण सत्य और सिखाती है, जीवन में सिर्फ सकारात्मक देखना ही पर्याप्त नहीं है; कई बार सही देखना भी जरूरी होता है क्योंकि जब अज्ञानता के साथ शक्ति जुड़ जाती है, तो वह केवल व्यक्ति के लिए नहीं, पूरे समाज के लिए खतरनाक हो सकती है। जबकि शक्ति अगर समझदारी, संवेदना और सत्य के साथ हो तो सुरक्षा बनती है। याने जब शक्ति के साथ अज्ञानता हो, तो अन्याय को जन्म लेने में देर नहीं लगती।
इसलिए जीवन में अपनी नजर को लगातार प्रशिक्षित करते रहिए। जहाँ काँटे हैं, उन्हें पहचानिए; लेकिन गुलाब देखना मत भूलिए। जहाँ कमी है, उसे स्वीकारिए; लेकिन जो मिला है उसकी कद्र करना मत भूलिए। जहाँ दर्द है, उसे महसूस कीजिए; लेकिन उससे मिली सीख को मत खोइए और जहाँ शक्ति है, वहाँ उसके साथ विवेक और जिम्मेदारी जरूर रखिए क्योंकि जिंदगी केवल यह नहीं है कि हमारे साथ क्या हुआ बल्कि बहुत कुछ इस पर निर्भर है कि आपने उसे किस नज़र से देखा। इसलिए दृष्टि बदलिए, कृतज्ञता बढ़ेगी और कृतज्ञता बढ़ेगी, तो खुशी अपने आप रास्ता खोज लेगी और शायद यही जीवन में खुश रहने का सरल सूत्र है।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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