हवा में महल जरूर बनाएँ…

Oct 5, 2026
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, एजुकेशनल कंसलटेंट के रूप में अनेकों विद्यालय में, हजारों बच्चों के साथ काम करते हुए मैंने देखा है कि सपनों के विषय में बच्चों की सोच की कोई सीमा नहीं होती। आप उनसे बस इतना सा पूछ कर देख लीजिए, “बड़े होकर वे क्या बनाना चाहेंगे?” बस फिर उनके जवाब सुन आश्चर्यचकित होते रहिए क्योंकि उनमें से कोई बोलेगा, “मैं अंतरिक्ष में जाऊँगा…”, कोई कहेगा, “मैं दुनिया बदलूँगा…”, “मैं बहुत बड़ा व्यवसायी बनूँगा…”, “मैं इतना बड़ा खिलाड़ी, कलाकार या वैज्ञानिक बनूँगा कि पूरी दुनिया मुझे जानेगी…”, आदि।
दोस्तों, बच्चे सपने देखने से नहीं डरते लेकिन हम बड़े, अपने तथाकथित ज्ञान और अनुभव से उनके सपनों को “व्यवहारिक” और “हवाई महल” जैसे भागों में बाँटने लगते हैं और बातों ही बातों में कहने लगते हैं, “इतना बड़ा सपना मत देखो…”, “तुमसे नहीं होगा…”, “पहले अपनी परिस्थितियाँ तो देखो…”, “यह इतना आसान नहीं है…”, आदि। यही बातें जब बार-बार दोहरायी जाती हैं तो ये समय के साथ धीमे-धीमे बच्चों के सपने छोटे करने लगती है। इसके ठीक विपरीत बात कहते हुए प्रसिद्ध अमेरिकी दार्शनिक हेनरी डेविड थोरो का कहना है, “अगर आपने हवा में अपना महल बना लिया है, तो चिंता मत कीजिए। वे वहीं हैं जहाँ उन्हें होना चाहिए। बस अब उनके नीचे नींव रखने के लिए काम कीजिए।”
दोस्तों, बात बड़ी गहरी है सपना कभी ग़लत नहीं होता, कमी सिर्फ़ उसके लिए किए जाने वाले कर्म में होती है। हममें से भी कई लोग ऐसे हैं, जिनके भीतर कोई सपना वर्षों से पल रहा है। जैसे, कोई किताब लिखना चाहता है। कोई नया व्यवसाय शुरू करना चाहता है। कोई अपनी सेहत बदलना चाहता है। कोई नई कला सीखना चाहता है। कोई अपने परिवार के साथ बेहतर जीवन जीना चाहता है। लेकिन ये सभी लोग अपने सपने को सिर्फ़ इसलिए पूरा नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि ये सभी आज भी “सही समय” का इंतजार कर रहे हैं।
लेकिन सिर्फ़ सपने देखने से काम नहीं होगा, उसे पूरा करने के लिए आपको सबसे पहले योजना बनाना होगी, फिर अनुशासित रहते हुए लगातार प्रयास करना होगा। कई बार बड़े लक्ष्य को देखकर डर लग सकता है। इसलिए पूरे पहाड़ को एक साथ चढ़ने की कोशिश मत कीजिए। आज सिर्फ पहला कदम उठाइए। अगर किताब लिखनी है, तो पहला पन्ना लिखिए। अगर व्यवसाय शुरू करना है, तो पहला ग्राहक खोजिए। अगर फिट होना है, तो आज से चलना शुरू कीजिए। अगर कोई कौशल सीखना है, तो रोज सिर्फ तीस मिनट दीजिए क्योंकि बड़े सपने अचानक पूरे नहीं होते। वे छोटे-छोटे अनुशासित कदमों से वास्तविकता बनते हैं।
और हाँ, एक बात और याद रखिएगा, सपने देखने और कल्पना में खोए रहने में बहुत अंतर है। सपना आपको आगे बढ़ाता है, कल्पना आपको वहीं बैठाए रख सकती है। सपना कहता है, “मैं यह कर सकता हूँ।” लेकिन मेहनत पूछती है, “आज इसके लिए तुमने क्या किया?” यहीं से असली यात्रा शुरू होती है। दोस्तों, अपने सपनों को केवल इसलिए छोटा मत कीजिए क्योंकि आज वे आपकी वर्तमान स्थिति से बड़े दिखाई देते हैं। हो सकता है आज आपकी जेब में संसाधन कम हों। हो सकता है अनुभव कम हो। हो सकता है रास्ता साफ दिखाई न दे। लेकिन अगर सपना सार्थक है, तो उसकी नींव आज से रखी जा सकती है।
दोस्तों, अगर आपके भीतर भी कोई सपना है, जिसे आपने परिस्थितियों के कारण छोड़ दिया था, तो आज उसे फिर से याद कीजिए और कागज पर लिख लीजिए। इसके बाद योजना बना कर देखिए कि इसे सच बनाने के लिए क्या सीखना है; क्या बदलना है और पहला कदम क्या उठाना है। इसके पश्चात योजनानुसार प्रतिदिन सपने को सच बनाने की दिशा में काम कीजिए। कुछ वर्षों बाद शायद यही छोटी-छोटी कोशिशें उस महल की मजबूत नींव बन चुकी होंगी। सपनों का काम आसमान में रहना नहीं है। वे सिर्फ़ शुरू वहाँ से होते हैं और हमारा योजनाबद्ध प्रयास उन्हें जमीन पर उतारता है। इसलिए ना सिर्फ़ बच्चों को हवा में महल बनाने दीजिए बल्कि ख़ुद भी बनाइए। याने बड़े सपने जरूर देखिए। असंभव लगने वाली मंजिलों की कल्पना जरूर कीजिए क्योंकि हवा में महल का होना कोई समस्या नहीं है।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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