जो तुम देते हो वही लौट कर आता है…

Oct 2, 2026
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, अगर आप तटस्थ रहकर अपने अतीत को तार्किक आधार पर देखेंगे तो पायेंगे कि हमारी ज़िंदगी में कुछ परिस्थितियां, परेशानियाँ, रिश्तों से संबंधित कुछ चुनौतियाँ बार-बार लौटती दिखाई देती हैं। जानते हैं क्यों? क्या यह केवल एक संयोग होता है या किस्मत का खेल, या फिर हमारी अपनी सोच या हमारा व्यवहार और कहे गए शब्द भी इसमें भूमिका निभाते हैं? चलिए, बचपन में सुनी एक कहानी से इसे समझने का प्रयास करते हैं-
गर्मियों की छुट्टियों में पिता अपने बेटे को लेकर पहाड़ी इलाके पर घूमने गए। जहाँ चारों ओर हरियाली और ऊपर खुला आसमान था। कुल मिलाकर कहूँ तो दूर-दूर तक फैली शांति मन को सुकून दे रही थी। पिता अभी इस शांति का मजा ले ही रहे थे कि बच्चा उत्साह में एक छोटी पहाड़ी पर चढ़ते हुए, फिसल कर गिरा और एक पत्थर से टकराया। चोट की वजह से उसके मुँह से एकदम “आह” की आवाज़ निकली। जो कुछ ही पलों बाद इको की वजह से लौट कर आई। जिसे सुन बच्चा चौंक गया और चारों ओर देखने लगा। किसी को अपने आस-पास ना पा उसने ज़ोर से पूछा, “कौन है?” पहाड़ों ने भी जवाब में पूछ लिया, “कौन है?” अब बच्चे को लगा कि शायद कोई उसे चिढ़ा रहा है। उसने गुस्से में चिल्लाकर कहा, “तुम कौन हो?” उधर से फिर गुस्से से भरी वही आवाज़ आई, “तुम कौन हो?” बच्चा परेशान होकर पिता के पास पहुँचा और बोला, “पापा, वहाँ कोई है जो मेरी बात दोहरा रहा है।”
बच्चे की बात सुन पिता मुस्कुराए और बेटे का हाथ पकड़कर उसे पूर्व वाले स्थान पर ले जाते हुए बोले, “चलो, तुम्हें आज एक ऐसी चीज़ समझाता हूँ, जिसे अगर तुमने समझ लिया तो जिंदगी को देखने का तरीका बदल जाएगा।” इतना कहकर पिता पहाड़ की ओर मुड़े और जोर से बोले, “तुम कायर हो!” कुछ क्षण बाद वही शब्द पहाड़ों से लौटे जिसे बच्चे ने बड़े ध्यान से सुना। फिर पिता ने पूरी ताकत से कहा, “तुम साहसी हो! तुम कर सकते हो! तुम विजेता हो!” कुछ क्षण की खामोशी के बाद पहाड़ों से आवाज़ आई, “तुम साहसी हो! तुम कर सकते हो! तुम विजेता हो!” बच्चा अब आश्चर्य से पिता को देखने लगा। पिता ने उसके सिर पर हाथ रखते हुए कहा, “बेटा, पहाड़ तुम्हें कुछ नया नहीं बता रहा। वह सिर्फ वही लौटा रहा है, जो तुम उसकी ओर भेज रहे हो। इसे इको कहते हैं और हमारा जीवन भी बहुत हद तक ऐसा ही है।”
दोस्तों, घटना तो छोटी सी थी, लेकिन यह हमारे सामने जीवन का एक बड़ा सच रखती है। ज्यादातर लोग अक्सर शिकायत करते हुए कहते हैं, लोग हमें सम्मान नहीं देते, परिस्थितियाँ हमारा साथ नहीं देती या जीवन हमारे साथ न्याय नहीं करता। ऐसे लोग अक्सर यह भूल जाते हैं या जान ही नहीं पाते हैं कि हम दूसरों से जैसा व्यवहार करते हैं, वे भी हमारे साथ वैसा ही व्यवहार करने लगते हैं। इसलिए दोस्तों, हमें बाहर देखने से पहले हमेशा अपने भीतर देखन चाहिये क्योंकि जैसा हम स्वयं के बारे में सोचते हैं, वैसी ही संभावनाओं को हम आकर्षित करते हैं।
यदि हर कठिन परिस्थिति में हम स्वयं से कहते रहें, “मैं नहीं कर सकता”, “मेरे साथ ही ऐसा क्यों होता है”, “मैं हमेशा असफल रहता हूँ”, तो धीरे-धीरे ये शब्द हमारे विश्वास का हिस्सा बन सकते हैं। इसके विपरीत अगर हम ख़ुद से कहें, “यह मुश्किल है, लेकिन मैं कोशिश करूँगा।” या “यह अभी मुझे नहीं आता, लेकिन मैं इसे सीख सकता हूँ।”, तो यह हमारा आत्मविश्वास बढ़ा सकता है। याद रखिएगा, जीवन की सबसे बड़ी बाधा परिस्थिति नहीं, बल्कि उसके बारे में बनी धारणा होती है। इसीलिए जो परिस्थिति किसी के लिए अंत बन सकती है और वही किसी दूसरे के लिए शुरुआत।
दोस्तों, इसलिए अपने विचार, शब्द और दूसरों के साथ अपने व्यवहार पर ध्यान दीजिए क्योंकि जीवन हमेशा हमारी इच्छा के अनुसार जवाब नहीं देता, लेकिन हम जो आवाज़ दुनिया में भेजते हैं, उसका असर कहीं न कहीं लौटकर हमारे जीवन में जरूर दिखाई दे सकता है।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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