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जीत उसी की होती है, जो हर हाल में अवसर देख लेता है !!!

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • 2 days ago
  • 2 min read

Feb 15, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, आपके जीवन में चुनौतियां ज्यादा होंगी या ख़ुशियाँ, यह आपका दृष्टिकोण तय करता है। जी हाँ, जीवन को मनमाफिक बनाने में हमारा दृष्टिकोण निर्णायक भूमिका निभाता है। इसलिए ही कहा गया है कि, “सफलता प्रतिभा के मुक़ाबले दृष्टिकोण पर अधिक निर्भर करती है।” अगर आप सफल और असफल लोगों के जीवन को ध्यान से देखेंगे तो पायेंगे कि दोनों के जीवन में परिस्थितियाँ अक्सर एक जैसी होती हैं; उन्हें मौके भी एक समान मिलते हैं और उनके रास्ते भी समान होते हैं; बस फर्क इतना होता है कि वे उन्हें अलग-अलग नजर से देखते हैं। याद रखिए, सकारात्मक और नकारात्मक में अंतर हालात का नहीं, सोच का होता है। ऊपर जाने और नीचे आने के लिए सीढ़ियाँ वही रहती हैं, अन्तर उसके उपयोग का होता है। इसी तरह हमारे जीवन में घटने वाली हर घटना एक सीढ़ी है। अगर हम उसे अवसर मानते हैं, तो वह हमें जीवन में आगे बढ़ाती है और अगर उसे समस्या मानते हैं, तो वह हमें नीचे खींच लेती है।


दोस्तों, दृष्टिकोण की इस शक्ति को थॉमस एडीसन ने बेहतरीन तरीक़े से पहचाना था। बल्ब बनाने का प्रयोग करते समय वे हजारों बार असफल हुए। लोगों ने उनका मजाक उड़ाया; उन पर तंज कसते हुए कहा, “तुम हज़ार बार असफल हो चुके हो।” इसपर एडीसन बोले, “साथियों मैं असफल नहीं हुआ। मैंने तो बस हज़ार ऐसे तरीके खोजे हैं जो काम नहीं करते।” यही वो सकारात्मक दृष्टि थी जिसने उन्हें इतिहास का महान आविष्कारक बना दिया। अगर वे असफलताओं को हार मान लेते, तो दुनिया शायद आज भी अंधेरे में होती।


दोस्तों, असफलता सिर्फ यह बताती है कि तैयारी में कहाँ कमी रह गई। इसलिए कभी भी मनमाफिक परिणाम ना मिले, तो विश्लेषण कर अपनी ग़लतियाँ पहचानिये, उन्हें दूर कीजिए और दोगुनी मेहनत कर असफलता को अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत बना लीजिए। याद रखियेगा, जीवन हमें हर दिन दो विकल्प देता है, पहला, कमियाँ निकाल कर शिकायत कीजिए और दूसरा सीख कर मेहनत करते हुए आगे बढ़िए। शिकायत हमें कमजोर और सीख हमें मजबूत बनाती है। इसी तरह नकारात्मक सोच हमें परिस्थितियों का शिकार बनाती है और सकारात्मक सोच हमें परिस्थितियों का निर्माता बना देती है।


यहाँ एक बात ध्यान रखिएगा, सकारात्मक सोच का अर्थ यह नहीं है कि जीवन में कठिनाइयाँ नहीं आएँगी। इसका अर्थ सिर्फ़ इतना है कि जब कठिनाई आएगी, तो हम टूटेंगे नहीं, सीखेंगे। दोस्तों हमारा दृष्टिकोण ही तय करता है कि बारिश हमें परेशान करेगी या ताजगी देगी; अंधेरा हमें डराएगा या सितारे दिखाएगा। इसलिए जब भी कोई समस्या आए तो खुद से पूछिए, “यह मुझे रोकने आई है या सिखाने?” आप पाएँगे कि अधिकतर समस्याएँ हमें रोकने नहीं, गढ़ने आती हैं।


दोस्तों, अंत में इतना ही एक बार फिर दोहराऊँगा कि जीवन में हर बार सीढ़ियाँ याने रास्ते बदलने की नहीं, नज़र बदलने की ज़रूरत होती है क्योंकि दुनिया वही रहती है, पर देखने वाला बदल जाए, तो पूरी दुनिया बदल जाती है। इसलिए जीवन में हर परिस्थिति को सकारात्मक दृष्टि से देखना सीखिए क्योंकि अंततः जीत उसी की होती है, जो हर हाल में अवसर देख लेता है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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