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जीतता वही है जो शांत रहता है…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • Nov 1
  • 3 min read

Nov 1, 2025

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

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दोस्तों, जीवन के सीखे सबसे बड़े पाठों में से एक है, मूर्ख व्यक्ति से ना उलझना क्योंकि मूर्ख पहले उकसाकर आपको अपने स्तर तक गिराता है, और जब आप उसके स्तर याने मूर्खता के स्तर तक गिर जाते हैं तब वह आपको अपने मूर्खता के अनुभव से हरा देता है। चलिए इस बात को मैं आपको एक प्रचलित कहानी से समझाने का प्रयास करता हूँ। एक बार नीला चश्मा पहने एक गधा चीते से बोला, “देखो भाई नीली घास कितनी सुंदर लग रही है।” चीता बोला, “नहीं घास तो हरी है।” लेकिन गधा तो बड़ा ‘गधा’ ही था, वह भी कहाँ मानने वाला था। वो तो एकदम से अड़ गया कि घास तो नीली है। इस वजह से चीते और गधे में तगड़ी बहस हो गई और गधा एकदम से गुस्सा होकर, जंगल के राजा शेर के दरबार में पहुँच गया और उन्हें प्रणाम करते हुए बोला, “महाराज न्याय कीजिए, मैं कब से इस मूर्ख चीते को समझाना चाह रहा हूँ कि बाहर सारी घास नीली है, लेकिन यह मानने को राजी ही नहीं है।” राजा बोला, “यह गधा सही कह रहा है, बाहर घास नीली है। चीते को एक माह के लिए जेल में डाल दो।” इतना सुनते ही गधा ख़ुशी से झूमने लगा और वहाँ से चला गया। उसके जाते ही चीता बोला, “महाराज, घास तो हरी होती है?” शेर बोला, “हाँ, तुम सही कह रहे हो।” शेर का जवाब सुनते ही चीता आश्चर्य के साथ बोला, “महाराज, फिर आपने गधे को सही ठहरा कर, मुझे सजा क्यों दी?” शेर एकदम गंभीर स्वर में बोला, “क्योंकि तुम मूर्ख के साथ बहस कर अपना समय और ऊर्जा दोनों बर्बाद कर रहे थे।”


दोस्तों, जीवन में हर बात का जवाब देना ज़रूरी नहीं होता। कई बार मौन ही सबसे बड़ी बुद्धिमत्ता बन जाता है। जब आप मूर्ख की बातों का जवाब देने के स्थान पर चुप हो जाते हैं, तो मूर्ख को लगता है कि जीत उसकी हो गई। लेकिन जब कोई समझदार व्यक्ति चुप हो जाता है, तब हक़ीक़त में जीत उस शांति की होती है, जो मौन व्यक्ति के भीतर बसती है।

आज की दुनिया में कोई अपनी बात, तो कोई अपनी सोच या फिर कोई अपना वजूद सिद्ध करना चाहता है। याने हर कोई कुछ न कुछ “साबित” करना चाहता है, फिर भले ही वह सही हो या नहीं। इसलिए मेरा मानना है कि हर जगह, हर व्यक्ति को समझाना संभव नहीं है। कुछ लोग तर्क नहीं, सिर्फ़ तकरार के लिए आते हैं। ऐसे लोगों से बहस करने में आपको परिणाम तो कुछ नहीं मिलता, बस आपकी ऊर्जा खर्च होती है।


इसलिए हमेशा याद रखो कि हर ताने का जवाब देना जरूरी नहीं। इसी तरह अनावश्यक झगड़े में अपनी शांति खोना और बहस में उलझना भी जरूरी नहीं है क्योंकि मौन रहना कमजोरी नहीं है, बल्कि यह तो आत्म-नियंत्रण का सर्वोच्च रूप है। जो व्यक्ति अपने शब्दों पर नियंत्रण रख सकता है, वह अपने जीवन को भी दिशा दे सकता है।


वैसे भी हर बात जानना, ज्ञानी होने की निशानी नहीं है, कई बार आप अनावश्यक बातों को नज़रअंदाज़ करके भी अपने ज्ञानी होने का परिचय दे सकते हैं। याद रखियेगा, जो बात हमारे विकास में सहायक नहीं, उसे मन में जगह देना भी ऊर्जा की बर्बादी है। याद रखिए दोस्तों, शांति आपकी सबसे बड़ी ताकत है। हमें उसे किसी के शब्दों, आरोपों या नकारात्मकता के हवाले नहीं करना है। जहाँ मन शांत होता है, वहाँ बुद्धि स्पष्ट होती है और जहाँ बुद्धि स्पष्ट होती है, वहाँ जीवन सफल है।


इसलिए दोस्तों, अगली बार अगर आपको कोई उकसाए, तो सिर्फ़ मुस्कुरा कर याद कर लीजिएगा कि मौन मेरी ढाल है, और शांति मेरी जीत क्योंकि इस दुनिया में अंत में वही व्यक्ति जीतता है जो खुद से, अपनी आत्मा से, और अपनी शांति से जुड़ा रहता है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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