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डर के आगे जीत है…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • 16 hours ago
  • 3 min read

Nov 30, 2025

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

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दोस्तों, जीवन में अक्सर आपका सामना ऐसी स्थिति-परिस्थितियों से होता है जहाँ अगला कदम उठाना तो छोड़िये, उसके विषय में सोचने में भी डर लगता है और हमारा मन तमाम आशंकाओं से भर जाता है। जैसे, “अगर असफल हो गया तो?”, “इसके कारण मैं, कहीं हँसी का पात्र ना बन जाऊँ?” या “अगर सब गलत हो गया तो?” आदि। लेकिन दोस्तों, अक्सर जीवन में बड़े बदलाव या बड़ी सफलता उस कदम को उठाने के बाद ही मिलती है, जो हमें डराता है। याने जिस कदम को उठाने से आप डरते है, अक्सर वही कदम आपकी पूरी ज़िंदगी को बदल देते हैं। इसी बात को समझाते हुए महान विचारक राल्फ वाल्डो इमर्सन ने कहा था, “Do the thing you fear and the death of fear is certain.” अर्थात् “जिस काम से डरते हो, वही कर लो, डर खुद समाप्त हो जाएगा।”


चलिए एक सच्ची कहानी के माध्यम से इस सत्य को समझने का प्रयास करते हैं। एक अकेली माँ, जो आर्थिक तंगी और भावनात्मक कारणों से अवसाद से जूझ रही थी, ने तमाम विपरीत परिस्थितियों के बाद एक पुस्तक लिखने का निर्णय लिया। जब उन्होंने इस विषय में अपने परिचितों से सलाह ली तो उन्होंने इस विचार को त्याग कर, नौकरी करने की सलाह दी। वैसे और कोई भी होता तो उन्हें यही सलाह देता क्योंकि उस वक्त उनके पास किताब छपाई के पैसे तक नहीं थे।


तमाम परेशानियों के साथ, उस महिला के दिल में एक जादुई सपना था, एक जादू और आशा से भरी एक कहानी थी। उन्होंने अपने सपने पर विश्वास किया और उस कहानी को किताब का रूप दिया। लेकिन यहाँ भी उनकी चुनौतियाँ ख़त्म नहीं हुई, जब वे इस किताब को छपवाने के लिए प्रकाशक के पास गए, तो उन्हें एक-दो नहीं, बारह प्रकाशकों ने यह कहते हुए लौटा दिया कि “बच्चों की कहानियाँ नहीं बिकतीं… यह बेकार है…”


लेकिन उस महिला का विश्वास असफलता के डर से कई गुना बड़ा था। उनका मानना था कि “कभी न कभी कोई न कोई इसे समझेगा।” आखिरकार 13वें प्रकाशक ने उनसे कहा, “चलो हम एक छोटा-सा संस्करण निकालकर देखते हैं।” इस एक छोटे से कदम या यूँ कहूँ इस एक “हाँ” और हिम्मत ने इतिहास रच दिया और कहानियों की उस छोटी किताब ने श्रृंखला का रूप ले लिया और आज उस श्रृंखला की 50 करोड़ से ज्यादा प्रतियां बिक चुकी हैं।


जी हाँ दोस्तों, आप बिल्कुल सही अंदाजा लगा रहे हैं, मैं बात कर रहा हूँ जे. के. रोलिंग और उनके द्वारा लिखित, इतिहास रचने वाली हैरी पॉटर श्रृंखला की। आज जे.के. रोलिंग दुनिया की सबसे प्रेरक शख्सियतों में से एक हैं। डर के आगे जाकर जीतने के विषय में पूछा जाने पर एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने खुद कहा था, “मैंने शुरुआत अपने डर से नहीं, अपने सपने से की थी।”


दोस्तों अगर आप मुझसे उनकी सफलता के विषय में पूछेंगे तो मैं इतना ही कहूँगा कि उनके साथ यह सब इसलिए हुआ क्योंकि उन्होंने कदम उन विषम स्थितियों में उठाया था जब वे सबसे ज़्यादा अनिश्चितता और डर के बीच जीवन जी रही थी। जे के रोलिंग की यह कहानी हमें निम्न बातें सिखाती है

1) जीवन में किसी ना किसी चीज का डर हमेशा होगा, लेकिन हमें इस भाव के साथ जीना होगा कि डर के आगे ही जीत है। दूसरे शब्दों में कहूँ तो, सफलता उन लोगों को मिलती है, जो डर के बावजूद कदम बढ़ाने की हिम्मत रखते हैं।

2) कम्फर्ट जोन सुरक्षा का भाव तो देता है, लेकिन इंसान सपनों की उड़ान कम्फर्ट ज़ोन छोड़ने के बाद ही उड़ पाता है।
3) असफलता का डर आपको रोक सकता है, लेकिन कोशिश आपको आगे बढ़ाती है।


अंत में इतना ही कहूँगा कि आप अभी जिस कदम को उठाने से डर रहे हैं, वही कदम भविष्य में आपकी सबसे बड़ी उपलब्धि बन सकता है। इसलिए डर को निर्णय मत लेने दें और साहस के साथ आगे बढ़ें और याद रखें आप का उठाया बस एक कदम आपको वहीं पहुँचा सकता है, जहाँ आप हमेशा से जाना चाहते थे।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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