जो आपको तोड़ता है, उसे छोड़ना सीखिए…

Oct 12, 2026
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, यकीन मानियेगा, भूलना नहीं बल्कि भूल जाने वाली बातों को याद रखना ज़िंदगी की सबसे बड़ी परेशानियों में से एक है। किसी ने जाने-अनजाने में कई सालों पहले कुछ कह दिया, किसी ने धोखा दिया, अपमानित किया या कहीं असफलता मिली और हम सालों तक उस घटना को साथ लिए चलते हैं। घटना चंद मिनटों की थी लेकिन उसकी सजा हम वर्षों तक ख़ुद को देते रहते हैं। आप स्वयं सोच कर देखिए, जो हमें दुख देता है, वह तो उस बात को बोल कर अपने जीवन में आगे बढ़ चुका होता है और जो दूसरे के ग़लत व्यवहार का शिकार होता है, वो उस घटना को बार-बार याद करके, अपने मन की शांति ख़राब करता है। इसलिए ही मुझे कई बार लगता है, संतुष्ट, खुश और सुखी रहने का सूत्र, जीवन के अलग-अलग अनुभवों में बेहतर संतुलन बनाना है। जैसे भूलने और याद रखने वाली बातों के बीच संतुलन बनाकर हम घटना को भूल सकते हैं लेकिन उसकी सीख को याद रख सकते हैं। हम असफलता को भूल, उससे मिली समझ को याद रख जीवन में आगे बढ़ सकते हैं, सफल हो सकते हैं और सबसे महत्वपूर्ण, हर क्षण यह याद रख कि हम वास्तव में कौन हैं अपने जीवन को व्यर्थ तुलना या दूसरों की बनाई धारणा जैसे नकारात्मक भावों में गंवाने से बच सकते हैं।
जी हाँ, हम केवल अपनी नौकरी, संपत्ति, उपलब्धियाँ या दूसरों की राय नहीं हैं। इन सबसे परे भी हमारा एक गहरा अस्तित्व है। हम एक चेतन, संवेदनशील आत्मा हैं, जिसकी मूल प्रकृति प्रेम, शांति और आनंद है। लेकिन रोजमर्रा की आपाधापी याने जीवन की भागदौड़ में हम इसे भूल जाते हैं। शायद इसी वजह से किसी की आलोचना हमारी शांति छीन सकती है, सामान्य अस्वीकृति हमारे आत्मविश्वास को हिला सकती है और किसी का अनुचित व्यवहार हमारी अपनी पहचान पर हावी हो जाता है।
याद रखिएगा दोस्तों, दूसरों का व्यवहार आपकी पहचान नहीं है। किसी ने आपको अस्वीकार किया, इसका अर्थ यह नहीं कि आप अस्वीकार्य हैं। आपसे गलती हुई, इसका अर्थ यह नहीं कि आप ही गलत हैं। इसलिए जो बीत गया, उससे सीखिए; लेकिन उसे अपने भीतर घर मत बनाने दीजिए। हर पुरानी चोट को पकड़े रखना, वर्तमान के साथ अन्याय है। जब भी आपको लगे कि मन अतीत के शोर से भर गया है, तो उसी क्षण खुद से पूछिए, “क्या मैं अभी भी वही बात ढो रहा हूँ, जिसे समय कब का पीछे छोड़ चुका है?” अगर उत्तर “हाँ” में मिले, तो समझ जाइए कि उस बात को हमेशा के लिए छोड़ देने का दिन आज ही है।
दोस्तों, जिंदगी अतीत के बदलने से नहीं बदलती। वह तो तब बदलती है, जब हम अतीत को अपने वर्तमान पर शासन नहीं करने देते। इसलिए जो आपको तोड़ता है, उसे छोड़ना सीखिए और जो आपको सिखाता है, उसे याद रखिए और इन सबसे भी ज़्यादा ज़रूरी हर क्षण अपने भीतर की शांति, प्रेम और प्रकाश को याद रखना है क्योंकि ज़िंदगी का असली आनंद अतीत से सीखने, वर्तमान में जीने और हर परिस्थिति के बीच अपने वास्तविक स्वरूप को याद रखने में है।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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