जो संघर्ष से नहीं डरता, वही जीवन में फलता-फूलता है !!!
- Nirmal Bhatnagar

- 8 hours ago
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July 17, 2026
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, आज का समय त्वरित सफलता का समय बन गया है। हर व्यक्ति चाहता है कि बिना अधिक प्रतीक्षा किए उसे सफलता, सुख और सम्मान मिल जाए। लेकिन प्रकृति का नियम आज भी वही है जो हजारों वर्ष पहले था—हर बड़ी उपलब्धि की कीमत संघर्ष, धैर्य और निरंतरता से चुकानी पड़ती है। सोचिए, एक छोटे-से बीज की पेड़ बनने की यात्रा कितनी अद्भुत होती है। पेड़ बनने के लिए वो खुली दुनिया नहीं, मिट्टी के नीचे दबने का निर्णय लेता है, जहाँ चारों ओर अंधेरा होता है। याने वह ऐसी जगह चुनता है जहाँ न तो रोशनी होती है, ना ही वह किसी को या कोई उसको देख पाता है। यहाँ ना कोई उसके संघर्ष को देख पाता है, ना ही कोई उसकी प्रशंसा करता है। इतना ही नहीं कई बार तो उसे कीचड़ और दूसरे जीवों के बीच, ख़ुद को बचाते हुए रहना पड़ता है। जानते हैं वो ऐसा क्यों करता है? क्योंकि वो पेड़ बनना चाहता है। सोच कर देखिए, अगर उस समय बीज यह सोचता, “मेरे साथ ही ऐसा क्यों हो रहा है?”, तो क्या वो कभी अंकुरित हो पाता?
दोस्तों, वह शिकायत करने के स्थान पर चुपचाप अपनी ऊर्जा विकसित करने का निर्णय लेता है और सही समय आने पर मिट्टी को चीरकर बाहर निकलता है। लेकिन उसकी परीक्षा यहीं समाप्त नहीं होती। कभी तपती धूप उसे झुलसाती है, कभी तेज़ हवाएँ उसे झुकाने की कोशिश करती हैं, कभी मूसलाधार बारिश और कभी कड़ाके की सर्दी उसकी सहनशक्ति की परीक्षा लेती है।
फिर भी वह हार नहीं मानता और इन सबसे लड़ते हुए धीरे-धीरे वही नन्हा-सा पौधा एक दिन विशाल वृक्ष बन जाता है। इतना ही नहीं बड़ा पेड़ बनने के बाद अब उसका जीवन केवल अपने लिए नहीं रहता। वह अपनी छाया से राहगीरों को विश्राम देता है, अपने फलों से भूख मिटाता है, अपनी शाखाओं पर पक्षियों को घर देता है और अपनी लकड़ी से भी दूसरों के काम आता है।
यह पूरी प्रक्रिया हमें जीवन का एक महत्वपूर्ण नियम सिखाती है, “जिसने सबसे अधिक संघर्ष सहा, वही सबसे अधिक उपयोगी बन गया।” दोस्तों, हम सब मनुष्यों का जीवन भी इसी बीज की तरह है। हम सभी के जीवन में कठिन दिन आते हैं। कभी आर्थिक संकट, कभी असफलता, कभी आलोचना, कभी रिश्तों की चुनौतियाँ और कभी अकेलापन। ऐसे विपरीत दौर में अक्सर हमें लगता है कि शायद जीवन हमारे साथ न्याय नहीं कर रहा। लेकिन सच इसके विपरीत होता है, ऐसे विपरीत दौर में जीवन हमें तोड़ नहीं रहा होता, बल्कि गढ़ रहा होता है। जिस तरह सोना आग में तपकर कुंदन बनता है, उसी तरह व्यक्तित्व भी संघर्ष की भट्ठी में निखरता है। यदि जीवन में कठिनाइयाँ न हों, तो धैर्य नहीं आएगा। यदि असफलताएँ न मिलें, तो अनुभव नहीं मिलेगा। यदि चुनौतियाँ न हों, तो हमारी वास्तविक क्षमता कभी सामने ही नहीं आएगी।
दोस्तों, सफलता चाहते हो तो कठिन समय को सज़ा नहीं, तैयारी समझो और जीवन में जब भी विपरीत दौर से गुजरो तब ख़ुद को याद दिलाओ कि आप भी किसी बीज की तरह अपनी जड़ों को मजबूत बना रहे हैं। इसी तरह जब भी परिस्थितियाँ आपको झकझोरें, तब याद रखो, मजबूत वृक्ष हवा से नहीं डरते, वे उसी से और अधिक मजबूत होते हैं। हक़ीक़त में साथियों हर कठिन दिन आपके भीतर उस व्यक्ति को जन्म दे रहा है, जो आने वाले वर्षों में न केवल स्वयं सफल होगा, बल्कि दूसरों के जीवन में भी आशा, प्रेरणा और सहारा बनेगा।
उपरोक्त हकीकत की वजह से ही मैं हमेशा कहता हूँ, सुखमय, शांतिमय और आनंदमय जीवन संघर्ष से बचने वालों को नहीं मिलता। वह तो उन लोगों को मिलता है जो परिस्थितियों को विपरीत देख भागते नहीं, बल्कि साहसपूर्वक उनका सामना करते हैं क्योंकि वे जीवन के इस शाश्वत नियम को जानते है—जो डटा रहेगा, वही टिकेगा; जो टिकेगा, वही आगे बढ़ेगा; और जो आगे बढ़ेगा, वही एक दिन दूसरों के जीवन का सहारा बनेगा।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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