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दुनिया आज भी दिल से ही चलती है…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • 13 hours ago
  • 3 min read

Feb 23, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, यकीन मानियेगा, तकनीक, मशीन, इंटरनेट, एआई, सिस्टम और नियमों से लेस यह दुनिया आज भी दिल से चलती है। मेरा तो यहाँ तक मानना है कि जब दिल जुड़ते हैं तब तकनीक, मशीनें आदि सब भी इंसानियत के सामने झुक जाती है। चलिए अपनी बात को मैं आपको इंग्लैंड के वेस्ट यॉर्कशायर के मिर्फील्ड शहर में रहने वाले 68 वर्षीय स्टेन बीटन की कहानी से समझाने का प्रयास करता हूँ।


वर्ष 2003 में स्टेन बीटन अपनी पत्नी का निधन कैंसर से हो जाने के कारण भावनात्मक रूप से टूट गए थे और ख़ुद को पूरी दुनिया में अकेला महसूस करने लगे थे। ऐसे में उनकी पत्नी द्वारा वॉइसमेल पर छोड़ा गया एक संदेश उनके जीवन का सहारा बन गया। असल में यह संदेश स्टेन के लिए सिर्फ़ एक वॉइसमेल नहीं बल्कि पत्नी की मौजूदगी का एहसास था। जब भी वे ख़ुद को अकेला और उदास महसूस करते थे, वे रिकॉर्डिंग सुनना शुरू कर देते थे। इससे उन्हें रूबी के अपने पास होने का एहसास होता था, इसलिए यह रिकॉर्डिंग एक तरह से उनकी जीवनरेखा बन गई थी।


स्टेन इस रिकॉर्डिंग को किसी भी स्थिति में खोना नहीं चाहते थे, इसलिए सालों तक उन्होंने फ़ोन कंपनी नहीं बदली। लेकिन दिसंबर 2014 में रिकॉर्डिंग खोने का उनका यह डर सच्चाई में बदल गया। असल में उन्होंने गलती से वह वॉइसमेल डिलीट कर दिया था। इससे स्टेन पूरी तरह टूट गए क्योंकि यह उनके लिए सिर्फ़ डेटा लॉस नहीं बल्कि एक रिश्ते का हमेशा के लिए खोने जैसा था। अब वे स्वयं को पूरी तरह तबाह और गुस्से से भरा महसूस कर रहे थे।


स्टेन ने किसी तरह अपनी भावनाओं पर काबू पाकर ब्रिटेन की मशहूर टेलीकॉम कंपनी वर्जिन मीडिया को फ़ोन कर अपनी शिकायत दर्ज करते हुए पूरी परेशानी बताई और यहीं से ही सारी कहानी बदल गई। वर्जिन मीडिया कंपनी का मानना था कि ‘यादें कभी साधारण नहीं होतीं, वे किसी की पूरी दुनिया होती हैं।’ इसलिए उन्होंने इसे सिर्फ़ शिकायत नहीं माना और इस डिलीट हुए वॉइसमेल को खोजने के लिए 11 इंजीनियरों की पूरी टीम लगाई। जिन्होंने 3 दिनों तक सिस्टम, बैकअप और सर्वर खँगाले। जिसके परिणामस्वरूप रिकॉर्डिंग वापस मिल गई। जब स्टेन ने एक बार फिर अपनी पत्नी की आवाज़ सुनी, उनकी आँखों से आँसू बह निकले और वे बस इतना कह पाए, “यही है… अद्भुत… अद्भुत।” दोस्तों, उस क्षण तकनीक नहीं, मानवता जीती थी। इस विषय में कंपनी के इंजीनियरिंग निदेशक रॉब इवांस ने बाद में कहा, “यह संदेश ढूँढना आसान नहीं था, लेकिन हम जानते थे कि यह उनके लिए कितना मायने रखता है।”


दोस्तों, यह घटना हमें एक बहुत बड़ा जीवन-संदेश देती है। महानता का लेना-देना सिर्फ़ बड़े और प्रतिष्ठित लोगों से नहीं है। महान तो हर वो इंसान बन सकता है जो अपने हर कार्य से किसी ना किसी के दिल को छू ले, जैसा वर्जिन मीडिया की टीम ने किया था। उन इंजीनियरों ने उस रिकॉर्डेड वॉइसमेल को सिर्फ़ एक फ़ाइल या रिकॉर्डिंग नहीं माना। बल्कि उन्होंने स्वीकारा कि यह स्टेन के लिए उनकी पूरी दुनिया है।


दोस्तों, आज की तेज़ दुनिया में लोग कहते हैं, “इमोशनल नहीं, प्रोफेशनल बनो।” लेकिन याद रखिएगा, बिना संवेदना के प्रोफेशनलिज़्म इंसान को मशीन बना देता है, और संवेदना के साथ प्रोफेशनलिज़्म साधारण इंसान को महान बना देता है। इसलिए ही सच्चा लीडर हमेशा नियम से ऊपर उठकर मूल्य आधारित संवेदना चुनता है।


एक बात और, हम सभी के पास भी स्टेन की तरह किसी की याद, किसी के विश्वास, किसी के भरोसे का ‘वॉइसमेल’ है, जो हमारे जीवन में संतुलित बनाए रखता है। इसलिए ‘जीवन में आप कितने सफल हैं’, के मुक़ाबले यह ज़्यादा ज़रूरी है कि आप किसी के जीवन में उम्मीद की किरण हैं या नहीं। वैसे भी अंत में आपने कितना कमाया है के मुक़ाबले यह ज़्यादा मायने रखता है कि आपकी वजह से कितने लोगों को आँखों में आँसू आए, दुख के नहीं कृतज्ञता के।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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