प्रतिबद्धता सफलता की असली पहचान है !!!
- Nirmal Bhatnagar

- 1 day ago
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July 19, 2026
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, इस दुनिया में हर इंसान बड़ा बनने का सपना देखता है। कोई सफल उद्यमी बनना चाहता है, तो कोई श्रेष्ठ खिलाड़ी, या कोई उत्कृष्ट शिक्षक, तो कोई प्रभावशाली नेता। लेकिन एक आंकड़ा बताता है कि इस दुनिया में 98 प्रतिशत लोग अपने इस सपने को पूरा नहीं कर पाते हैं क्योंकि वे अपने लक्ष्य के प्रति रुचि याने इंट्रेस्ट तो रखते हैं लेकिन उसके प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध याने कमिटेड नहीं रहते। पहली नज़र में आपको ये दोनों शब्द एक जैसे लग सकते हैं, लेकिन वास्तव में इन दोनों के बीच उतना ही अंतर है जितना इच्छा और संकल्प के बीच।
दोस्तों, जब किसी काम में केवल रुचि होती है, तो हम उसे तभी करते हैं जब परिस्थितियाँ अनुकूल हों। याने समय मिला तो करेंगे, मन हुआ तो करेंगे, सुविधा हुई तो करेंगे। लेकिन इस कार्य को करते वक्त जैसे ही कोई कठिनाई आती है, बहाने तैयार हो जाते हैं—आज समय नहीं मिला, तबीयत ठीक नहीं थी, परिस्थितियाँ साथ नहीं थीं, लोग सहयोग नहीं कर रहे थे, आदि। इसके विपरीत, प्रतिबद्ध व्यक्ति परिस्थितियों का इंतज़ार नहीं करता, बल्कि परिस्थितियों को अपने लक्ष्य के अनुसार ढालने का प्रयास करता है। उसके लिए बहानों का नहीं, परिणामों का महत्व होता है।
इसी बात को समझाते हुए महान बास्केटबॉल खिलाड़ी माइकल जॉर्डन ने कहा था, “Some people want it to happen, some wish it would happen, others make it happen.” अर्थात कुछ लोग केवल चाहते हैं कि सफलता मिले, कुछ उसकी कामना करते हैं, जबकि कुछ लोग उसे सच कर दिखाते हैं। यही अंतर रुचि और प्रतिबद्धता का है। महान क्रिकेटर एवं भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण हैं। भारतीय टीम में चुने जाने के पूर्व वे रेलवे में टिकट कलेक्टर की नौकरी करते थे। उनके लिए परिस्थितियाँ आसान नहीं थी। साधारण पृष्ठभूमि, सीमित संसाधन और अनिश्चित भविष्य होने के बाद भी उन्होंने अनुशासित रहते हुए लगातार अभ्यास किया और कोई बहाना नहीं बनाया।
दोस्तों, महेंद्र सिंह धोनी की क्रिकेट में केवल रुचि होती, तो शायद वे क्रिकेट छोड़ सुविधाजनक लगने वाली रेलवे की नौकरी चुन लेते। लेकिन वे अपने लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध थे। इसीलिए उन्होंने तमाम चुनौतियों के बाद भी क्रिकेट को चुना और उसी प्रतिबद्धता का परिणाम आज पूरी दुनिया के सामने है।
दोस्तों, जीवन के हर क्षेत्र में यही सिद्धांत लागू होता है। यदि आपको स्वास्थ्य में रुचि है, तो आप कभी-कभी व्यायाम करेंगे। लेकिन यदि आप स्वास्थ्य के प्रति प्रतिबद्ध हैं, तो व्यायाम आपकी दिनचर्या बन जाएगा। यदि आपको पढ़ने में रुचि है, तो समय मिलने पर किताब खोलेंगे। लेकिन यदि सीखने के प्रति प्रतिबद्ध हैं, तो हर दिन कुछ नया सीखने का समय निकालेंगे। यदि आपको रिश्तों में रुचि है, तो सुविधा होने पर समय देंगे। लेकिन यदि रिश्तों के प्रति प्रतिबद्ध हैं, तो व्यस्तता के बीच भी अपनों के लिए समय निकालेंगे।
याद रखिएगा दोस्तों, सफलता प्रतिभा से पहले प्रतिबद्धता की परीक्षा लेती है। प्रतिभाशाली लोग भी बीच रास्ते में भटक सकते हैं, लेकिन प्रतिबद्ध लोग धीमे ही सही, अपनी मंज़िल तक पहुँच ही जाते हैं। अगर आप अपने सपनों को पूरा करते हुए, जीवन में सफल होना चाहते हैं, तो आज ही ख़ुद से केवल एक प्रश्न पूछिए - ‘क्या मैं अपने लक्ष्य के प्रति केवल उत्साहित हूँ, या वास्तव में प्रतिबद्ध हूँ?” यदि उत्तर “प्रतिबद्ध” है, तो फिर बहानों की कोई जगह नहीं होनी चाहिए क्योंकि प्रतिबद्ध व्यक्ति मौसम नहीं देखता, परिस्थितियाँ नहीं गिनता और कठिनाइयों से नहीं डरता। वह हर दिन अपने लक्ष्य की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाता है। याद रखिएगा, किसी क्षेत्र में रुचि होना आपको शुरुआत दे सकता है, लेकिन प्रतिबद्धता आपको मंज़िल तक पहुँचाती है और यह दुनिया मंज़िल तक पहुँचने वालों को याद रखती है, बहाने बनाने वालों को नहीं।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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