मैं सचमुच ईश्वर का आभारी हूँ…

Oct 16, 2026
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, जिंदगी में सब कुछ हमारी इच्छा के अनुसार हो, यह संभव नहीं। जीवन हमेशा उतार-चढ़ाव से भरा होता है। यानी कभी कुछ दिन हमारी इच्छा और अपेक्षा के अनुसार बीतते हैं, तो कई बार हमारा सामना एक के बाद एक कई परेशानियों से होता है। स्वयं मैंने भी कई बार ऐसे मुश्किल और परेशानी भरे दौर का सामना किया है। लेकिन साथ ही हर बार यह भी महसूस किया है कि जीवन के कठिनतम समय में भी ज़िंदगी कभी भी पूरी तरह अंधेरी नहीं होती। कहीं ना कहीं आस की छोटी-सी रोशनी ज़रूर मौजूद रहती है। लेकिन अक्सर हमारा ध्यान उस पर जाता ही नहीं है क्योंकि हम अपनी नज़र परेशानियों से हटा ही नहीं पाते हैं।
जी हाँ दोस्तों, हमारा मन अक्सर उन चीजों पर अटक कर रह जाता है, जो हमें या तो मिली नहीं हैं या फिर बिगड़ गई हैं अथवा कहीं खो गई हैं। यही भटकाव हमें अक्सर उन चीजों से दूर कर देता है, जो अब भी हमारे पास है। जैसे, चलती हुई साँस, स्वस्थ शरीर, एक नई सुबह, आस-पास मौजूद कुछ ऐसे लोग जिनसे आप अपने मन की बात कह सकते हैं। इतना ही नहीं, हम अपनी सीखने, काम करने, बदलने और फिर से शुरुआत करने की क्षमता तक को नजरंदाज कर जाते है।
दोस्तों, जो चीज़ें लगातार हमारे साथ रहती हैं, अक्सर उनकी कीमत हमें तब समझ आती है, जब वे हमसे दूर होने लगती हैं। शायद इसीलिए हम उपरोक्त वर्णित चीज़ों के लिए कभी भी आभार व्यक्त नहीं करते। याद रखिएगा दोस्तों, ग्रेटीट्यूड का अर्थ यह नहीं है कि ज़िंदगी में कोई समस्या नहीं है। इसका अर्थ सिर्फ़ इतना सा है कि आप तमाम समस्याओं के बाद भी यह देखने में सक्षम हैं कि जिंदगी में अभी भी क्या अच्छा है। जिस तरह अंधेरे कमरे में एक छोटा-सा दीपक पूरे अंधेरे को तुरंत खत्म नहीं करता, लेकिन वह इतना उजाला ज़रूर करता है कि हमें अगला कदम दिखाई देने लगे।
कृतज्ञता भी कुछ ऐसी ही है। वह हर परेशानी को खत्म नहीं करती, लेकिन हमें परेशानियों के बीच टूटने से बचा सकती है। यानी कृतज्ञता परिस्थितियों को तुरंत नहीं बदलती, लेकिन परिस्थितियों को देखने का हमारा नज़रिया ज़रूर बदल देती है। इसलिए जीवन में जब भी कठिन समय आए, तो खुद से यह प्रश्न पूछें, “इस परिस्थिति के बावजूद मेरे जीवन में ऐसा क्या है, जिसके लिए मैं आभारी हूँ?” संभव है कि इस प्रश्न के जवाब में आपको किसी का एक फ़ोन याद आए, या किसी बच्चे की वह मुस्कान याद आए, जिसने आपका दिन बदल दिया हो। या फिर आपने किसी से कोई नई बात सीखी हो, या सुबह की वह चाय याद आए, जिसने आपको सुकून दिया हो। या फिर सिर्फ़ इतना ही कि ईश्वर ने आपको अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए एक और दिन दिया है।
दोस्तों, इस छोटे से अभ्यास के परिणामस्वरूप कुछ ही दिनों में आपको महसूस होने लगेगा कि जीवन को देखने का नज़रिया बदलने से, जीवन अपने आप बदलने लगा है क्योंकि नज़रिया बदलने से रास्ता थोड़ा कम कठिन नज़र आता है; रिश्ते ज्यादा मूल्यवान दिखाई देते हैं और वही जीवन, जिसे हम कभी-कभी शिकायतों से भर देते हैं, फिर से सुंदर लगने लगता है।
याद रखिएगा, ज़िंदगी से मिला हर दिन आसान नहीं होता, हर इच्छा पूरी नहीं होती और हर सवाल का जवाब तुरंत नहीं मिलता। लेकिन हर दिन कुछ ना कुछ ऐसा जरूर होता है, जिसे थामकर हम जीवन में आगे बढ़ सकते हैं। इसलिए मुश्किलों का हिसाब रखने के साथ-साथ जीवन में मिली नेमतों का हिसाब भी रखिए, क्योंकि जिस दिन हम यह देखना बंद कर देते हैं कि ज़िंदगी ने हमसे क्या लिया और यह देखना शुरू करते हैं कि उसने हमें क्या-क्या दिया, उसी दिन हमारे भीतर शिकायत की जगह शांति जन्म लेने लगती है।
दोस्तों, मुश्किलें ज़िंदगी का हिस्सा हैं, लेकिन वे पूरी ज़िंदगी नहीं हैं। अँधेरा चाहे जितना हो, रोशनी की तलाश मत छोड़िए, क्योंकि ज़िंदगी में हमेशा कुछ न कुछ ऐसा होता है, जिसके लिए कहा जा सकता है, “इसके लिए मैं सचमुच आभारी हूँ।”
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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