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वह बदलाव बनिए जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं !!!

Writer: Nirmal Bhatnagar
Nirmal Bhatnagar
12 minutes ago
3 min read

Sep 15, 2026

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, अक्सर हम चाहते हैं कि लोग बदलें, परिस्थितियाँ बदलें और हमारे साथ होने वाला व्यवहार बदल जाए। लेकिन कभी ख़ुद से सवाल नहीं करते कि “अगर बदलाव की शुरुआत मुझसे हो जाए, तो क्या होगा?” मेरे हिसाब से तो शायद बहुत कुछ बदल जाएगा क्योंकि जब हम बदलते हैं, तभी हमारे आसपास की दुनिया बदलती है।


यकीन मानियेगा, जीवन में आने वाली समस्याओं की वजह हमेशा परिस्थितियाँ नहीं होती। कई बार मुख्य समस्या ख़ुद को परिस्थितियों के अनुसार ना बदल पाने की वजह से अपनी शांति दूसरों के व्यवहार के हवाले करना होता है। जैसे किसी ने अच्छा व्यवहार किया, तो हम खुश। लेकिन किसी ने अनदेखा किया, तो हम परेशान। इसी तरह किसी ने प्रशंसा की, तो हम उत्साहित। लेकिन किसी ने आलोचना की, तो हम टूट गए। यानी हमारी भावनाओं की चाबी हमारे हाथ में नहीं, दूसरों के हाथ में होती है। लेकिन जिस दिन हम तय करते हैं कि “मैं परिस्थितियों से प्रभावित होने के बजाय अपने भीतर सुधार पर ध्यान दूँगा, उसी दिन जीवन में परिवर्तन की शुरुआत हो जाती है।


दोस्तों, जब इंसान सचमुच खुद को बेहतर बनाने का प्रयास करता है, तो सबसे पहले उसकी सोच सकारात्मक होती है। फिर भाषा में नरमी और प्रतिक्रियाओं में धैर्य आता है। भीतर आए इस बदलाव की वजह से इंसान शिकायतों की जगह समाधान देखने लगता है। इतना ही नहीं इस बदलाव के कारण एक अद्भुत घटना और घटती है, उस व्यक्ति का बदलाव उसके आसपास के लोगों को भी प्रभावित करने लगता है। इसलिए ही कहते हैं, एक मुस्कान किसी का दिन बदल सकती है। एक भरोसा किसी टूटे हुए व्यक्ति को सम्भाल सकता है। एक प्रोत्साहन किसी के भीतर छिपी क्षमता को जगा सकता है और एक सकारात्मक व्यक्ति पूरे वातावरण की ऊर्जा बदल सकता है। यही कारण है कि हमें अपने जीवन में सकारात्मकता को केवल महसूस नहीं करना चाहिए, उसे फैलाना भी चाहिए क्योंकि जब यही सकारात्मक ऊर्जा कई लोगों के बीच मिल जाती है, तो उसकी शक्ति कई गुना बढ़ जाती है और एकता और विश्वास को जन्म देती है।


दोस्तों, जहाँ एकता होती है, वहाँ विश्वास होता है। जहाँ विश्वास होता है, वहाँ लोग विचार खुलकर रखते हैं; एक-दूसरे की मदद करते हैं। जोखिम लेने से नहीं डरते और सबसे महत्वपूर्ण, अपनी क्षमता का अधिकतम उपयोग करते हैं। इसके विपरीत, जहाँ अविश्वास और आपसी खींचातानी होती है, वहाँ प्रतिभाशाली लोग भी अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पाते। उनकी ऊर्जा लक्ष्य हासिल करने में कम और एक-दूसरे से बचने, खुद को साबित करने या दूसरों पर शक करने में ज्यादा खर्च होती है।


दोस्तों, अविश्वास केवल रिश्ते नहीं तोड़ता, वह हमारी सामूहिक क्षमता को भी कमजोर कर देता है। इसलिए परिवार हो या संस्था, मित्रता हो या समाज, हर अवसर पर विश्वास बनाने की कोशिश कीजिए। मतभेद हो तो संवाद कीजिए। गलतफहमी हो तो पूछिए। किसी की अच्छाई दिखे तो उसकी सराहना कीजिए और अगर किसी साथी की कमजोरी दिखाई दे, तो उसे गिराने के बजाय सम्भालिए क्योंकि एकता का अर्थ यह नहीं कि हम हमेशा एक जैसा सोचें। एकता का अर्थ है, अलग सोच होने के बाद भी, एक-दूसरे के खिलाफ खड़े नहीं होना।


दोस्तों, ईश्वर ने हमें अपार भीतरी क्षमता दी है। लेकिन हम उस क्षमता का पूरा उपयोग तभी कर पाते हैं, जब हम भय और अविश्वास से मुक्त होकर एक-दूसरे के साथ खड़े होते हैं। इसलिए दोस्तों, आज दो संकल्प लें, पहला - मैं हर दिन कल से थोड़ा बेहतर इंसान बनने की कोशिश करूँगा और दूसरा - जहाँ भी रहूँगा, वहाँ विश्वास और एकता बढ़ाने का प्रयास करूँगा। क्योंकि दुनिया बदलने के लिए हमेशा किसी बड़े आंदोलन की जरूरत नहीं होती। कभी-कभी एक बेहतर इंसान ही पर्याप्त होता है। याद रखिएगा, आप बेहतर होंगे, तो आपका परिवार बेहतर होगा। परिवार बेहतर होगा, तो संस्था बेहतर होगी। संस्था बेहतर होगी, तो समाज बेहतर होगा। इसलिए बदलाव का इंतजार मत कीजिए। जिस दुनिया को आप बेहतर देखना चाहते हैं, उसकी शुरुआत अपने भीतर से कीजिए क्योंकि सकारात्मक ऊर्जा और विश्वास अपने आप फैलता है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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