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शक्ति याने पॉवर अपने साथ जिम्मेदारी लाती है !!!

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • Dec 17, 2025
  • 3 min read

Dec 17, 2025

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, इस संसार में शक्ति का बंटवारा समान रूप से नहीं होता। कुछ लोग अपने पद, प्रभाव या धन के कारण दूसरों की तुलना में कहीं अधिक शक्तिशाली होते हैं। अक्सर हम ऐसे लोगों को राजनेता, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, बड़े व्यवसायी, कॉर्पोरेट लीडर, धनाढ्य वर्ग और समाजसेवी के रूप में देखते हैं। ये सभी लोग एक ऐसी सोसाइटी का हिस्सा होते हैं, जिनका एक निर्णय लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित करता है। इसलिए इनके लिए पॉवर केवल एक अधिकार नहीं, बल्कि एक अत्यंत गंभीर नैतिक दायित्व होता है। लियो टॉलस्टॉय ने इसी बात को समझाते हुए कहा था, “Power is the ability to do good things for others.” यानी शक्ति का असली अर्थ दूसरों के लिए अच्छा करने की क्षमता का होना है।



दोस्तों, ख़ुद को प्राथमिकता में रखने की मानसिकता, बंटे हुए समाज और बढ़ती हुई सामाजिक खाई को देख इस बात पर जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है। अन्यथा पॉवर का दुरुपयोग निरंकुशता की ओर जा सकता है। यह संदेश आज उन लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण है जिनके पास व्यापक प्रभाव रखने वाली सीमित और चुनिंदा शक्तियाँ है। आइए इस बात को 5 बिंदुओं में समझने का प्रयास करते हैं -


1. जब शक्ति सीमित हो, तो उसका प्रभाव असीमित होता है

दोस्तों, कॉर्पोरेट लीडर द्वारा एक नीति बदलते ही, हजारों कर्मचारियों की जिंदगी बदल जाती है। इसी तरह राजनेता एक कानून पारित करते हैं, तो करोड़ों नागरिक प्रभावित होते हैं और एक धनाढ्य व्यक्ति द्वारा किया गया संपत्ति का सदुपयोग, पूरे समाज की संरचना बदल सकता है। इसलिए मेरा मानना है कि ऐसे शक्तिशाली लोगों के लिए शक्ति याने पॉवर सिर्फ एक संसाधन नहीं, बल्कि एक उत्तरदायित्व है जिसकी जड़ में करुणा, न्याय और दूरदर्शिता होना जरूरी है।


2. शक्ति का दुरुपयोग दुनिया को खोखला कर देता है

दोस्तों, जब शक्तिशाली लोग अपने लाभ को प्राथमिकता पर रख, अहंकार को निर्णय लेने देते हैं या अपने पद का उपयोग दमन के लिए करते हैं या फिर अपनी संपत्ति से असमानता बढ़ाते हैं, तब समाज टूटने लगता है और सामान्य लोगों में असंतोष, भय और अविश्वास पैदा होता है। याद रखियेगा, जब शक्ति याने पॉवर को निजी लाभ का औजार बनाया जाता है, तब वह विनाश करती है।


3. शक्ति का सदुपयोग, समाज को पुनर्जीवित कर सकता है

दोस्तों, यदि कॉर्पोरेट लीडर न्यायपूर्ण अवसर दें, कर्मचारियों के जीवन को बेहतर बनाएं और अपने प्रभाव से नए मानक स्थापित करें, तो निश्चित तौर पर उद्योग जगत बदल सकता है। इसी तरह यदि राजनेता, ईमानदारी, पारदर्शिता और नैतिकता को केंद्र में रखें, तो देश मजबूत और स्थिर बन सकता है और यदि धनाढ्य लोग अपनी संपत्ति को समाज उत्थान में लगाएँ और अवसरों को उन तक पहुँचाएँ जिन्हें इसकी जरूरत है, तो ग़रीबी, अशिक्षा और असमानता विलुप्त हो सकती है। याद रखिएगा, सत्ता यदि सही हाथों में हो और उसका सही दिशा में उपयोग हो, तो वह मानवता को उन्नत करने की शक्ति रखती है।


4. असली नेतृत्व सेवा से शुरू होता है

दोस्तों, नेतृत्व का अर्थ आदेश देना नहीं, बल्कि दिशा देना है। इसलिए सच्चा लीडर या नेता उसे माना जाता है, जो निर्णय लेने से पहले सबसे कमजोर व्यक्ति के दृष्टिकोण से सोचे। जो उनकी आवाज़ों को सुने, जो अक्सर अनसुनी रह जाती हैं और जो अपनी शक्ति याने पॉवर को हथियार नहीं, सेतु बनाये ताकि कमजोर लोग भी जीवन में आगे बढ़ सकें।


5. शक्ति आपकी पहचान नहीं, विरासत है

दोस्तों, एक दिन पद छिन जाएगा, धन घट जाएगा, प्रभाव भी कम हो जाएगा। उस वक्त सिर्फ़ यह याद रहेगा या याद रखा जायेगा कि आपने अपनी शक्ति याने पॉवर से क्या बदला, कितने लोगों का जीवन सुधरा, आप कितने लोगों की आवाज और सुरक्षा कवच बने।


अंत में दोस्तों, निष्कर्ष के तौर पर इतना ही कहूँगा कि राजनेता, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, बड़े व्यवसायी, कॉर्पोरेट लीडर, धनाढ्य वर्ग, समाजसेवी या उच्च पदों पर बैठे लोगों के हाथ में शक्ति भले ही सीमित हो, पर उसका परिणाम असीमित होता है। इसलिए दूसरों के जीवन को बेहतर करने की क्षमता को मैं शक्ति याने पॉवर का सबसे सुंदर रूप मानता हूँ और यही वह विरासत है, जिसे समय भी कभी मिटा नहीं सकता।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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