सच्चाई को खोजना होता है और झूठ अपने आप चला आता है…
- Nirmal Bhatnagar

- 4 days ago
- 3 min read
Jan 11, 2026
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, हर मुलाक़ात, हर साथ, हर रिश्ते का एक अंत होता है और इस सच्चाई को हमें समय के साथ स्वीकार ही लेना चाहिए। दूसरे शब्दों में कहूँ तो जीवन में एक समय ऐसा भी आता है जब हमें इस सच्चाई को दिल से स्वीकारना होता है कि जो रिश्ता, जो साथ या जो मुलाक़ात हमारे सबसे क़रीब थी, वहाँ अब हमारी मौजूदगी की आवश्यकता नहीं है। जी हाँ, हर रिश्ते में हमेशा बराबर स्थान मिलना जरूरी नहीं होता और इसी तरह हर बातचीत में शामिल होना जरूरी नहीं होता और सबसे बड़ी बात, जो लोग आपको महत्व नहीं देते, उनके पीछे तो भागना कतई ज़रूरी नहीं होता।
दोस्तों, अगर आप शान्त, सुखी और संतुष्ट रहना चाहते हैं तो आपको इस बात को गहराई से समझना होगा कि अगर कोई आपको कहीं शामिल नहीं कर रहा है, तो वहाँ खुद को ज़बरदस्ती शामिल ना करें। अगर वे आपको कोई बात नहीं बताते हैं, तो उनसे उस विषय में कुछ पूछिए मत। अगर वे आपको कहीं बुलाते नहीं हैं, तो वहाँ जाइए मत। यह आत्मसम्मान का पहला चरण है और आत्मसम्मान ही आत्मज्ञान की शुरुआत है।
लेकिन इसके विपरीत सामान्य जीवन में हम अक्सर वही चीजें जानने की कोशिश करते हैं जो लोग हमसे छिपा रहे होते हैं क्योंकि हमारा मन अटकलें लगाने का आदी है। लेकिन ऐसा करते वक्त हम दुनिया के इस सबसे बड़े नियम को भूल जाते हैं कि सच्चाई को खोजने के लिए प्रयास करना पड़ता है, लेकिन अफवाहें और झूठ बिना मेहनत के हमारे दरवाज़े तक आ जाते हैं। याद रखिएगा, लोग आपको बताएँगे भी नहीं, फिर भी आप उनके ग़लत विचारों और गपशप के शिकार बन जाते हैं। इसलिए सच्चाई के रास्ते पर चलने के लिए दो गुण ज़रूरी है। पहला, शांत मन और दूसरा, मजबूत चरित्र। जब आप इस सच्चाई को जीवन में अपनाते हैं, तो आपको अंदर से एक स्थिरता और स्पष्टता मिलती है जो कोई झूठ या अफवाह आपसे छीन नहीं सकती।
सच्चाई की राह पर जीवन बदलता है
Ellen DeGeneres ने कहा है, “सच्चाई को खोजो, सच्चाई को जीयो… बाकी सब अपने आप आ जाएगा।” इस वाक्य में जीवन का गहरा दर्शन छिपा है। जब आप इस सच को स्वीकार करते हैं, तो फिर आपका रास्ता कितना भी कठिन क्यों न हो, उसकी दिशा साफ होने लगती है। आपकी ऊर्जा बिखरती नहीं, आपकी भावनाएँ टूटती नहीं, आपके रिश्ते उलझते नहीं। आपकी पूरी जीवन–शक्ति अपनी प्रगति और शांति की ओर मुड़ जाती है।
दोस्तों, इस सिद्धांत को जीवन में अपनाने के निम्न 5 लाभ हैं -
1. यह ग़लत लोगों, ग़लत रिश्तों और ग़लत वातावरण से आपको बचाता है।
2. इसे अपनाने से जीवन स्पष्टता आती है, आपका फोकस सही रहता है और महत्वहीन चीज़ों में समय बर्बाद नहीं होता।
3. इसे अपनाने के कारण आप दूसरों की मान्यता पर नहीं, अपने मूल्य पर जीते हैं, जो आपका आत्मसम्मान बढ़ाता है ।
4. आपका मन चिंताओं, सवालों और अटकलों से मुक्त होकर शांत हो जाता है।
5. ऊर्जा सही दिशा में लगती है, आप अपने लक्ष्यों तक तेज़ी से पहुँचते हैं। याने जीवन विकास की ओर जाने लगता है ।
दोस्तों, अगर आप इसे व्यावहारिक रूप से अपनाना चाहते हैं तो निम्न कार्य करें -
1) हर चीज़ पर प्रतिक्रिया देना बंद करें
2) लोगों के मन को पढ़ने की कोशिश न करें
3) अपनी ऊर्जा वहाँ लगाएँ जहाँ मूल्य मिले
4) रिश्तों में सम्मान देखें, ध्यान नहीं
5) खुद को साबित करने की ज़रूरत महसूस न करें
6) सीमाएँ बनाना सीखें
और सबसे महत्वपूर्ण, यदि कोई आपको शामिल नहीं करता, तो अपने आप को इसमें दोषी मत मानें। यह आपकी कमी नहीं, उनकी पसंद है और आपको अपनी ज़िंदगी दूसरों की पसंद के आधार पर नहीं चलानी चाहिए।
अंत में…
सच्चाई की राह कठिन जरूर है, लेकिन वही आपको भीतर से मुक्त करती है। जब आप दूसरों की सोच, व्यवहार और निर्णयों से प्रभावित हुए बिना अपना मार्ग चुनते हैं, तभी आप सच्चे अर्थों में स्वतंत्र होते हैं। याद रखें, सच्चाई का बोझ हल्का होता है, झूठ का बोझ हमेशा भारी। सच्चाई को अपनाइए, और जीवन को सरल, शांत और शक्तिशाली बनाइए।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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