सच्चे रिश्ते आज़ादी में खिलते हैं, क़ैद में नहीं !!!
- Nirmal Bhatnagar

- Dec 28, 2025
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Dec 28, 2025
फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

दोस्तों, दो बड़े साधारण से शब्द हैं केयर और कंट्रोल, लेकिन अगर इनका सही प्रयोग करना सीख लिया जाये तो जीवन में रिश्तों को ईश्वरीय आशीर्वाद के रूप में लिया जा सकता है। वैसे मैं आपको कोई नई बात नहीं बता रहा हूँ, हममें से ज़्यादातर लोग यह मानते हैं कि हम अपने रिश्तों में “केयर ” कर रहे हैं। इसी वजह से हम सलाह देते हैं, दिशा बताते हैं, नियम बनाते हैं, टोका-टाकी करते हैं और यह सब हम अच्छे इरादे से करते हैं। लेकिन यहीं एक महत्वपूर्ण लेकिन असहज करने वाला सवाल आता है, “क्या यह सच में केयर है, या कंट्रोल?” यही वह फर्क है जिसे न समझ पाने के कारण सबसे अच्छे रिश्ते भी तनाव, दूरी और कड़वाहट में बदल जाते हैं। आइए, कुछ बिंदुओं में इसे विस्तार से समझने का प्रयास करते हैं-
1. केयर और कंट्रोल दोनों दूर से एक जैसे दिखते हैं
दोस्तों, केयर और कंट्रोल दोनों में चिंता होती है। दोनों में सामने वाले का “भला” चाहने का दावा होता है। लेकिन उनकी जड़ बिल्कुल अलग होती है। केयर, प्रेम से जन्म लेता है और कंट्रोल, अहंकार और डर से। केयर कहती है, “मैं तुम्हारे साथ हूँ।” कंट्रोल कहता है, “तुम मेरी बात मानो।” यही छोटा-सा अंतर बड़े टकरावों की वजह बन जाता है।
2. जहाँ गुस्सा है, वहाँ अक्सर कंट्रोल छिपा होता है
दोस्तों, अगर आप सच में किसी की परवाह करते हैं, तो आप उसके अलग होने पर नाराज़ नहीं होते। लेकिन जब आपकी बात न मानी जाए और आपको गुस्सा आ जाए, तो यह इस बात का संकेत है कि आप सामने वाले की मदद करने के स्थान पर उस पर हुक्म चलाना चाहते हैं या आज्ञाकारिता चाहते थे। जब सामने वाला आज्ञाकारिता को छोड़ अपने तरीके से जीने की कोशिश करता है, तब हमें अपना कंट्रोल खत्म होता नजर आता है और इसी वजह से रिश्तों के बीच में गुस्सा, ताने और दूरी आ जाती है।
3. केयर विकल्प देती है, कंट्रोल आदेश देता है
दोस्तों, केयर कहती है, “मेरे अनुसार यह सही है, लेकिन फ़ैसला तुम्हें करना है।”, कंट्रोल कहता है, “मैं जानता हूँ क्या सही है, तुम सिर्फ़ मेरी बात मानो और उसके अनुसार करो।” केयर धैर्य रखती है, कंट्रोल, जल्दी परिणाम चाहता है। केयर, प्रक्रिया पर भरोसा करती है, कंट्रोल, तुरंत सुधार चाहता है।
4. कंट्रोल रिश्ते काटता है, केयर रिश्ते जोड़ती है
दोस्तों, कंट्रोल, चोट पहुँचाता है, क्योंकि वह व्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला करता है। केयर, उपचार करती है, क्योंकि वह व्यक्ति को सुरक्षित महसूस कराती है। जहाँ कंट्रोल होता है, वहाँ लोग अपने मत या बातों को छुपाने लगते हैं। जहाँ केयर होती है, वहाँ लोग खुल कर अपना मत रखते हैं।
5. लोग अक्सर गलत नहीं होते, बस अलग होते हैं
दोस्तों, हम आपसी टकराव को “सामने वाले की गलती” समझ लेते हैं। जबकि वह अलग सोच, अलग स्वभाव और अलग रास्ते का परिणाम होता है। जब हम इस अंतर को स्वीकार कर लेते हैं, तो हमें सामने वाले को नियंत्रित करने की ज़रूरत नहीं पड़ती। याद रखिएगा, स्वीकार्यता ही केयर की पहली शर्त है।
6. अपने व्यवहार को ईमानदारी से जाँचिए
दोस्तों, रिश्तों में सामने वाला हमेशा ग़लत नहीं हो सकता। इसलिए उसे दोषी ठहराने से पहले खुद से पूछिए—
१) क्या मैं मदद कर रहा हूँ या दबाव डाल रहा हूँ?
२) क्या मैं सुन रहा हूँ या सिर्फ़ समझा रहा हूँ?
३) क्या मैं सामने वाले को उसकी इच्छानुसार खिलने या बढ़ने दे रहा हूँ या उसे अपने साँचे में ढाल रहा हूँ?
ये सवाल कठिन जरूर हैं, लेकिन विश्वास कीजियेगा आने वाले समय में यही सवाल रिश्तों को बेहतर बनायेंगे।
अंत में इतना ही कहूँगा कि प्रेम में कंट्रोल नहीं, विश्वास चाहिए और केयर प्रेम की भाषा है, जबकि कंट्रोल अहंकार की। केयर सम्मान देता है और कंट्रोल अपमान पैदा करता है। एक बात और याद रखिएगा, प्रेम, केयर, सराहना, सम्मान, आलोचना और अपमान, ये ऐसे निवेश हैं जो कई गुना होकर वापस मिलते हैं। इसलिए लोगों की परवाह कीजिए, उन्हें नियंत्रित मत कीजिए क्योंकि सच्चे रिश्ते आज़ादी में खिलते हैं, क़ैद में नहीं।
-निर्मल भटनागर
एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर




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