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सफलता चाहते हो तो बिना शोर मचाए गढ़ो ख़ुद को…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • Nov 20
  • 3 min read

Nov 20, 2025

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…

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दोस्तों, जीवन में घटी अच्छी-बुरी घटनाओं के लिए मैंने अक्सर लोगों को भाग्य को दोष देते हुए देखा है। लेकिन इस विषय में मेरा मानना है कि भाग्य के भरोसे जीवन को छोड़ना बेवक़ूफ़ी से अधिक कुछ नहीं है क्योंकि भाग्य आपके हाथ में नहीं है और दूसरी बात अवसर कभी भी ख़ुद आकर आपका दरवाज़ा नहीं खटखटाता है, उसके लिए तो हमेशा तैयार रहना पड़ता है। इसी बात को समझाते हूँ बॉबी अनसर ने कहा था “Success is where preparation and opportunity meet.”


जी हाँ दोस्तों, जीवन में अवसर याने ऑपर्च्युनिटी अचानक आती है। वो ना तो पहले से कोई संदेश भेजती है और ना ही उसके आने का समय और तारीख़ पहले से तय रहती है। दूसरे शब्दों में कहूँ तो अवसर कभी भी अपॉइंटमेंट लेकर नहीं आता। वह बस आता है और जो सजग और तैयार रहता है, वही उसे पकड़ पाता है। बाकी लोग बस ‘भाग्य’ को दोष देते या कहते रह जाते हैं कि “काश उस समय मैं तैयार होता…”


इसी तरह की एक ग़लत अवधारणा सफलता के विषय में भी है। अक्सर लोग सफलता को; तात्कालिक मौकों को भुनाने की क्षमता से जोड़ कर देखते हैं, लेकिन यह सही नहीं है। अवसर अचानक आता है, पर सफलता अचानक नहीं आती। दुनिया का कोई भी बड़ा बदलाव एक मिनट में नहीं हुआ। हाँ, यह भी सही है कि वह होता हुआ एक मिनिट में जरूर दिखा है, पर उस एक मिनट तक पहुँचने के लिए सालों की तैयारी लगती है। उदाहरण के लिए कोई एक कैच या एक शॉट मैच जिताती लगती है। लेकिन उस एक शॉट को पूर्ण दक्षता के साथ खेलने में बरसों की तैयारी लगती है।


दोस्तों, लक्ष्य अचानक पूरे नहीं होते, लोग उसे पाने के लिए बरसों तैयारी करते हैं और उसके बाद हर क्षण तैयार रहते हुए, मौकों को पहचान कर, अपना सर्वश्रेष्ठ देते हैं। लेकिन अक्सर दुनिया उन्हें “भाग्यशाली” कह देती है। पर मेरी नजर में असलियत कुछ और है। सच तो यह है, भाग्यशाली वही होते हैं जिन्होंने मौके से पहले खुद को तराश लिया हो। याने जीत उसी की होती है जिसने तैयारी में पसीना बहाया हो और जीवन अवसर उसी का होता है जो उम्मीद और अभ्यास नहीं छोड़ता है।


इस बात को दूसरे शब्दों में कहूँ तो अवसर केवल उन्हीं को दिखता है, जिनकी दृष्टि तैयार होती है। कई बार अवसर हमारे सामने खड़ा होता है, पर हम उसे देख ही नहीं पाते; पहचान ही नहीं पाते क्योंकि हमारा मन उस वक्त तैयार नहीं होता। जैसे, एक किसान बीज लेकर घूमे, पर खेत तैयार न करे, तो खेती कैसे होगी? ठीक वैसे ही जीवन में सफलता तभी मिलेगी, जब मन, कौशल और चरित्र — तीनों तैयार होंगे।


उपरोक्त आधार पर कहा जाए तो सफल लोग दो चीज़ें सीख लेते हैं-

1) अवसर की प्रतीक्षा करने के स्थान पर वे खुद को तैयार करते हैं क्योंकि वे जानते हैं कि क्या पता कब मौक़ा सामने आ जाये और जीवन कह दे, “अब तुम्हारी बारी है।” इसलिए रोज़ थोड़ा-थोड़ा सुधरते रहो; रोज़ सीखते रहो; रोज़ अभ्यास करते रहो क्योंकि अभ्यास बंद होते ही अवसर भी दूर जाना शुरू हो जाता है।

2) छोटे अवसरों को भी महत्व दो क्योंकि कई बार बड़ा अवसर छोटे रूप में आता है और हम उसे हल्का समझकर छोड़ देते हैं, और वही मौका किसी और को महान बना देता है।


दोस्तों, किसी ने क्या खूब कहा है, “Luck is when opportunity knocks… and you answer.” सोचिए, अगर ए.पी.जे. अब्दुल कलाम हर छोटी जिम्मेदारी को नज़रअंदाज़ कर देते, तो क्या मिसाइल मैन बनते? अगर सचिन तेंदुलकर हर दिन घंटों अभ्यास न करते, तो क्या महान खिलाड़ी बनते और अगर मैरी कॉम छोटे मुकाबलों को महत्व न देतीं तो क्या बड़ी जीतें कभी उनके पास आतीं? नहीं ना! दोस्तों, वे तैयार थे, इसलिए अवसरों ने उन्हें चुना।


दोस्तों, तैयारी का सबसे बड़ा लाभ यह है कि जब अवसर अचानक आता है, तो तैयार व्यक्ति के भीतर डर नहीं होता। वह ख़ुद से कहता है, “हाँ, मैं कर सकता हूँ।” और उसे सफल देख दुनिया कहती है, “वाह, कितना भाग्यशाली है!” असल में दुनिया को क्या पता कि यह भाग्य नहीं, सालों की तैयारी का इनाम है।


दोस्तों, आपको सफलता की ऊंचाइयों तक पहुँचाने के लिए ईश्वर एक ही बात चाहता है, “तुम तैयार रहो!” क्योंकि अवसर और सफलता दोनों उसी के चरण चूमते हैं जो बिना शोर किए, बिना दिखावा किए दिन-प्रतिदिन खुद को गढ़ता रहता है।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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