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सामर्थ्य विनम्र बनाता है…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • Aug 3, 2025
  • 2 min read

Aug 3, 2025

फिर भी ज़िंदगी हसीन है...

दोस्तों, मानव जीवन में अनेक गुण हमें महान बनाते हैं, परंतु उनमें सबसे महत्वपूर्ण है विनम्रता और सहनशीलता। यही गुण व्यक्ति के सामर्थ्य का वास्तविक परिचायक हैं। अक्सर हम सामर्थ्य का अर्थ शक्ति या दूसरों को झुका देने की क्षमता मान लेते हैं, जबकि यह परिभाषा अधूरी है। सच्चा सामर्थ्य यह है कि हम स्वयं कितना झुक सकते हैं, कितना धैर्य रख सकते हैं और परिस्थितियों में संतुलन बनाए रख सकते हैं।


जीवन में जब व्यक्ति समर्थ बनता है, तो उसके अंदर एक विशेष आत्मविश्वास और सम्मान का भाव स्वतः उत्पन्न होता है। लेकिन यही समय है जब विनम्रता की परीक्षा होती है। क्योंकि जहाँ सामर्थ्य होता है, वहाँ अक्सर अहंकार भी साथ आता है। यह अहंकार व्यक्ति को ऊपर से बड़ा दिखाता है, लेकिन भीतर से खोखला बना देता है। इसलिए यह आवश्यक है कि सामर्थ्य के साथ-साथ विनम्रता का विकास हो।


हमें यह समझना चाहिए कि सम्मान पाने वाले नहीं, देने वाले बनना ही जीवन की सच्ची सफलता है। यदि हमारी शक्ति केवल दूसरों से अपना सम्मान दिलवाने में ही लगी रहती है, तो यह सामर्थ्य नहीं, बल्कि कमजोरी का संकेत है। सामर्थ्य का सही उपयोग दूसरों के सम्मान और सुरक्षा की रक्षा करने में है। भगवान श्रीकृष्ण इसका सबसे श्रेष्ठ उदाहरण हैं। वे अपार बल और सामर्थ्य के स्वामी थे, लेकिन जीवन भर शीलवान और विनम्र बने रहे। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि शक्ति का उद्देश्य केवल स्वयं को ऊँचा दिखाना नहीं, बल्कि दूसरों को भी ऊँचा उठाना है।


हमारे जीवन में अनेक अवसर ऐसे आते हैं जब हम विवाद में पड़ सकते हैं। लेकिन याद रखिए, विवाद बिना झुके मिल जाएगा, आशीर्वाद नहीं। यदि हम थोड़ा झुक जाएँ, दूसरों की भावनाओं को समझें और उन्हें सम्मान दें, तो यही आशीर्वाद के द्वार खोलता है। झुकना कमजोरी नहीं, बल्कि एक उच्च स्तर का सामर्थ्य है। यह वह सामर्थ्य है जो दूसरों के दिलों में हमारे लिए सम्मान पैदा करता है।


जीवन स्वयं एक विशाल पाठशाला है जहाँ हर व्यक्ति एक शिक्षक है और हर घटना एक सबक। हर अनुभव हमें यह सिखाने आता है कि परिस्थितियाँ चाहे कैसी भी हों, हमें अपने भीतर विनम्रता बनाए रखनी चाहिए। क्योंकि विनम्रता से ही हम सीखते हैं, आगे बढ़ते हैं और दूसरों को भी साथ लेकर चलते हैं।


अतः अपने सामर्थ्य को केवल बाहरी शक्ति के रूप में न देखें। यह देखें कि आप कितना धैर्य रखते हैं, कितना क्षमा कर सकते हैं और कितनी सहजता से दूसरों के लिए झुक सकते हैं। यही सामर्थ्य का असली अर्थ है। जब यह समझ जीवन का हिस्सा बन जाएगी, तब आपका जीवन दूसरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन जाएगा।


याद रखिएगा दोस्तों, सामर्थ्य का सर्वोच्च रूप वही है जो हमें विनम्र बनाता है, अहंकारी नहीं।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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