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स्टेटस बड़े ब्रांडों से नहीं, सोच, कर्म और चरित्र से बनता है…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • Dec 18, 2025
  • 3 min read

Dec 18, 2025

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, आज ‘ज़ेन-जी’ याने ‘जनरेशन जेड’ और ‘ज़ेन-अल्फा’ की दुनिया अवसरों से भरी हुई है। लेकिन कहीं ना कहीं जीवन के प्रति अस्पष्टता और ग़लत प्राथमिकताओं के कारण वह दबावों से भी उतनी ही घिरी हुई है। आज सोशल मीडिया, करियर रेस, रिश्तों की जटिलता, और “परफेक्ट लाइफ” दिखाने की होड़, आदि सब मिलकर कहीं ना कहीं जीवन को तेज़, चमकदार और कभी–कभी बेहद भारी बना देते हैं।


इस युग में तेज़ी से सब कुछ पाने की चाह में कहीं ना कहीं कुछ जरूरी बातों को अक्सर नज़रअंदाज़ किया जा रहा है। जैसे, 'सफलता बाहर से नहीं, भीतर से शुरू होती है।’ या ‘महंगी चीजें या ब्रांड स्टेटस सिंबल होते हैं।’ दोस्तों, कहीं ना कहीं ‘जेन-जी’ याने ‘जनरेशन जेड’ और ‘ज़ेन-अल्फा’ भूल गया है या यूँ कहूँ कि हम उनको सिखा नहीं पायें हैं कि असली ‘स्टेटस’ आपकी सोच, आपके कर्म और आपके चरित्र से बनता है।


आइए, आज हम ऐसी ही कुछ बातों को 5 सूत्रों के रूप में समझने का प्रयास करते हैं-

पहला सूत्र - अमीरी का दिखावे से कोई लेना देना नहीं है

‘ज़ेन-जी’ और ‘ज़ेन-अल्फा’ अक्सर यह मान कर चलते हैं कि महंगे कपड़े, स्मार्ट फोन, ग्लैमरस लाइफ़स्टाइल, सोशल मीडिया फ़ॉलोवर की संख्या अथवा ट्रेंडिंग लोकेशंस पर फोटो क्लिक करवाना ही असली सफलता है। पर यह मेरी नजर में लाइफ का सबसे बड़ा झूठ है। याद रखिएगा, अमीरी दिखाने से नहीं आती, चमक और मूल्य दो अलग चीज़ें हैं। महंगी चीज़ें आपको फैशनेबल बना सकती हैं, पर मूल्यवान नहीं। मूल्यवान बनने के लिए विज़न, कौशल और चरित्र चाहिए।


दूसरा सूत्र - किसी के जैसा बनकर हम उनकी बराबरी कर सकते हैं

‘ज़ेन-जी’ और ‘ज़ेन-अल्फा’ के रोजमर्रा के जीवन में एक संघर्ष को साफ़तौर पर देखा जा सकता है, “कौन बेहतर दिख रहा है?”, “किसके ज़्यादा फॉलोअर्स हैं?”, “कौन कहाँ घूम रहा है?” मेरी नजर में इस तरह की बराबरी समय, ऊर्जा और संसाधनों की बर्बादी से अधिक कुछ नहीं है। याद रखिएगा, तुलना इंसान के सबसे बड़े दुश्मनों में से एक है और इसका खेल कभी खत्म नहीं होता। यह इंसान की ऊर्जा को खत्म करता है, आत्मविश्वास को नुक़सान पहुँचाता है और उन्हें दूसरों के हिसाब से जीने पर मजबूर करता है। तुलना से बचकर आप जीवन में तभी आगे बढ़ सकते हैं, जब आप यह स्वीकार लें कि ‘आपकी जीवन यात्रा, आपकी अपनी है, किसी और की नहीं।’


तीसरा सूत्र - महत्वाकांक्षी याने एंबिशियस होना ग़लत नहीं है

आज हर युवा एंबिशियस याने महत्वाकांक्षी, उच्चाकांक्षी या अभिलाषी है और ऐसा होना कतई ग़लत भी नहीं है। बल्कि मैं तो इसे ‘ज़ेन-जी’ और ‘ज़ेन-अल्फा’ की सबसे बड़ी पॉवर मानता हूँ। वैसे आज का लगभग हर बच्चा या युवा महत्वाकांक्षी है और यह अच्छी बात भी है, लेकिन मेरा मानना है कि महत्वाकांक्षा के साथ संतोष का संतुलन होना अतिआवश्यक है। यहाँ यह याद रखना जरूरी है कि संतोष और आलस एक नहीं होते। संतोष का एहसास उस मानसिक शांति से जुड़ा होता है, जो आपको अपनी तरक्की पर फोकस बनाए रखने में मदद करता है, वह भी बिना बिखरे, बिना टूटे। याद रखियेगा, एम्बिशन याने महत्वाकांक्षा आपको आगे बढ़ाती है, और संतोष आपको मजबूत बनाता है।


चौथा सूत्र - खुशियाँ बाहर नहीं, भीतर पैदा होती हैं

‘ज़ेन-जी’ और ‘ज़ेन-अल्फा’ अक्सर अपनी ख़ुशी को विशेष परिस्थिति से जोड़ कर देखते हैं। वे सोचते हैं कि “जब यह मिल जाएगा, तब मैं खुश हो जाऊँगा।” लेकिन जीवन में यह “जब–तब” का खेल कभी खत्म नहीं होता। याद रखिएगा, जीवन की सबसे बड़ी खुशियाँ प्यार, दोस्ती, सच्चे साथ, केयर जैसी भावनाओं से मिलती है। इसलिए मेरा मानना है कि खुशियाँ बाहर नहीं, भीतर पैदा होती हैं। जैसे, एक बड़ा लक्ष्य पूरा करने की संतुष्टि या खुद को बेहतर बनते देखने का आनंद, आदि। ये सब भीतर से आते हैं, बाहर से नहीं।


पाँचवाँ सूत्र - सफलता का अर्थ बंधन नहीं मुक्ति है

असली सफलता आपको आत्मविश्वास, विकास और मानसिक शांति देती है, तनाव, बेचैनी या तुलना नहीं। इसलिए मैं कहता हूँ असली सफलता वह है जो आपको मुक्त करे, बाँधे नहीं। याद रखियेगा, असली सफलता आपको स्वतंत्र बनाती है, निर्भर नहीं।


अंत में दोस्तों मैं ‘ज़ेन-जी’ और ‘ज़ेन-अल्फा’ को इतना ही कहना चाहूँगा कि आपके पास दुनिया की हर सुविधा हो सकती है,
लेकिन यदि मन अशांत है, तो सब कुछ अधूरा है और यही जीवन का सबसे बड़ा राज़ है। इसलिए ही मैंने पूर्व में कहा है असली अमीरी संपत्तियों में नहीं, मन की स्थिरता, आत्म-सम्मान और संतोष में होती है। अगर आप अपना भविष्य चमकदार बनाना चाहते हैं तो बस अपनी कीमत बाहरी चीज़ों से नहीं, अपने भीतर के मूल्य से तय करना शुरू कर दीजिए। माइंडसेट का यह बदलाव यकीनन आपका जीवन बदल देगा।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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