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हमारे विचार, शब्द, भाव और कर्म पूरे समाज को प्रभावित करते हैं…

  • Writer: Nirmal Bhatnagar
    Nirmal Bhatnagar
  • Dec 19, 2025
  • 3 min read

Dec 19, 2025

फिर भी ज़िंदगी हसीन है…


दोस्तों, अक्सर हमें लगता है कि हमारे शब्द, विचार या रोजमर्रा में किए गए कर्म सिर्फ हमारे जीवन को ही प्रभावित करते हैं। लेकिन सच्चाई बिल्कुल इसके उलट है। हमारा हर विचार, हर शब्द, हर भाव, ना सिर्फ़ हमारे जीवन बल्कि पूरे सामाजिक परिदृश्य को भी प्रभावित करता है। यह स्थिति बिल्कुल वैसी ही है, जैसे, शांत झील में पत्थर मारने पर पत्थर तो तत्काल झील के तल में जाकर शांत हो जाता है, लेकिन सतह पर उठने वाली लहर बहुत दूर तक जाती है। ठीक उसी तरह एक ग़लत शब्द, कठोर व्यवहार, गलत सोच, हमारे भीतर की नकारात्मकता आदि का ज़हर सिर्फ हमें नहीं, बल्कि हमारे आसपास की पूरी दुनिया को भी प्रभावित करता है। हालाँकि हम इस सोच के साथ जीते हैं कि व्यक्तिगत तौर पर गुस्सा करने, नकारात्मक बोलने या क्रोध में किसी को चोट पहुँचाने से बस वही एक व्यक्ति प्रभावित हुआ, लेकिन हकीकत में ऐसा होता नहीं है। इसलिए ही मैं कहता हूँ, हमारे शब्द, विचार या रोजमर्रा में किए गए कर्म से उठने वाली लहर काफ़ी दूर तक जाती है। आइये इसे हम थोड़ा विस्तार से 5 बिंदुओं में समझते हैं-


1. नकारात्मकता सीमित दायरे में नहीं रहती, वह फैलती है

अक्सर हम बुरा या नकारात्मक कहकर यह सोचते हुए जीवन में आगे बढ़ जाते हैं कि ‘अब सब खत्म हो गया है।’ लेकिन हक़ीक़त में ऐसा होता नहीं है, नकारात्मक बातों से उठी तरंगें सामने वाले व्यक्ति के मन को छूती है और फिर उसका ख़राब मूड आसपास के माहौल को ख़राब करेगा और फिर यही नकारात्मकता इसी तरह आगे बढ़ती चली जाएगी। लेकिन यह बात हम नकारात्मक बात कहते समय महसूस नहीं कर पाते हैं। अब तो यह विज्ञान और मनोविज्ञान दोनों ने साबित कर दिया है कि, ‘एक नकारात्मक भाव लाखों नकारात्मक माइक्रो-इम्पैक्ट्स पैदा करता है।’


2. जिस माहौल में हम रहते हैं, वैसे ही हम बन जाते हैं

जो लोग क्रोध, ईर्ष्या या अहंकार से भरे होते हैं, उनके पास से गुजरने भर से हमारे अंतर्मन का गलत हिस्सा सक्रिय हो जाता है और इसके विपरीत जब हम किसी विनम्र, शांत, सकारात्मक व्यक्ति के पास से गुजरते हैं, तो हमारे अंतर्मन का श्रेष्ठ हिस्सा जाग जाता है। यह सिद्धांत हर रिश्ते, हर कार्यस्थल, हर परिवार और हर समाज या यूँ कहूँ हर इंसान पर लागू होता है। इसलिए मेरी नजर में महत्वपूर्ण यह नहीं है कि आप किस माहौल में रहते हो, महत्वपूर्ण तो यह है कि आप किस तरह के भाव या तरंग को अपनी मौजूदगी से फैलाते हो।


3. मंगलकामना या शुभकामना का भाव रखें

हर क्षण अपने आस-पास मौजूद लोगों, प्राणियों और प्रकृति के प्रति मंगलकामना या शुभकामना का भाव रखें। यह सिर्फ़ एक आध्यात्मिक सलाह नहीं है, बल्कि विज्ञान पर आधारित सत्य है। जब आप किसी के लिए शुभ सोचते हैं तब मुख्य रूप से तीन फायदे होते हैं। पहला, आपके अंदर की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है, दूसरा, आपकी भावनाएँ संतुलित होती हैं, और तीसरा, सामने वाले व्यक्ति के मन में भी अच्छा भाव जागता है। याने हर क्षण दूसरों के प्रति मंगलकामना का भाव रखना दो-तरफा परिवर्तन लाता है। अर्थात् यह आपको बेहतर बनाने के साथ-साथ सामने वाले को भी बेहतर बनाता है।


4. रोज़ खुद से पूछें, ‘मैं अपने लिए क्या बो रहा हूँ?’

आप दूसरों के लिए जैसा सोचते हैं, वही सोच आपके भीतर भी जड़ पकड़ती है। यदि आप क्रोध बोते हैं, तो वह सबसे पहले आप ही को नुक़सान पहुँचाता है। यदि आप ईर्ष्या रखते हैं, तो सबसे पहले वह आपकी शांति को ही ख़त्म करती है। यदि आप नकारात्मक बोलते हैं, तो वह सबसे पहले आपकी अंतरात्मा को ही नुक़सान पहुँचाता है। इसके विपरीत यदि आप शुभकामना या मंगलकामना, नम्रता और प्रेम बोते हैं, तो वह सबसे पहले आप ही को सुखी और शांत बनाता है।


5. अपने जीवन का एक नियम बनाएँ

सामान्यतः फ़ोकस ना होने के कारण हम जीवन में एक ही प्रकार की ग़लतियों को बार-बार दोहराते हैं। इससे बचने के लिए ख़ुद से प्रश्न करें कि “आखिर क्यों मैं इस गलती को बार-बार दोहराता हूँ, जो अंततः मुझे ही कष्ट देती है?” ऐसा करना आपको बेहतर बनने का मौक़ा देने के साथ सोच और व्यवहार बदलने में मदद करता है। साथ ही आप अपने लिए नियम भी बना सकते हैं कि “मैं ऐसा कुछ नहीं करूँगा, जो बार-बार मुझे ही दुख दे।” ऐसा करना आपकी वाइब्स को सकारात्मक बना देगा।


अंत में मैं आपको इतना ही याद दिलाना चाहूँगा कि आप सभी एक चलते-फिरते ऊर्जा केंद्र हैं। आपका हर शब्द, हर विचार, हर मुस्कान, हर शुभकामना या मंगलकामना इस दुनिया पर असर डालते हैं। इसलिए ऐसी ऊर्जा फैलाइए जो आपको भी ऊँचा उठाएँ और दुनिया को भी।


-निर्मल भटनागर

एजुकेशनल कंसलटेंट एवं मोटिवेशनल स्पीकर

 
 
 

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